Thursday, July 2, 2026

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भरत एनकाउंटर- क्या गिरफ्तार होंगे अफसर?:आरोपी DSP को मिली नई पोस्टिंग, क्लीन चिट या कानूनी चक्रव्यूह में फंसेंगे, 4 सवाल-जवाब में जानिए


भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी अफसर राजेश कुमार शर्मा को नई पोस्टिंग मिल गई है। वहीं, शाहपुर SHO सहित 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड हैं। हत्या के आरोपी अफसर क्या जेल जाएंगे। उन पर क्या-क्या कार्रवाई हो सकती है, नई पोस्टिंग के मायने क्या है, समझेंगे बूझे की नाही में…। सवाल-1ः भरत तिवारी एनकाउंटर में किन अफसरों पर केस दर्ज है। क्या आरोप है? जवाबः 17 जून को भोजपुर (आरा) के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर हुआ। भरत की मां आशा देवी के लिखित आवेदन पर 22 जून को पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। शाहपुर थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, जगदीशपुर के तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) राजेश मालाकार सहित घटना स्थल पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। सवाल-2ः क्या नामजद अफसर तुरंत गिरफ्तार होंगे? जवाबः नहीं, तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। अदालती फैसलों और कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, सिर्फ FIR में नामजद होने या आरोपी बनाए जाने मात्र से किसी व्यक्ति (विशेषकर ऑन-ड्यूटी सरकारी अधिकारी) को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। तत्कालीन SDPO और SHO की गिरफ्तारी तभी होगी जब न्यायिक आयोग अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया फर्जी एनकाउंटर या हत्या के पुख्ता सबूत पाएगी। इसे ऐसे समझिए 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) बनाम महाराष्ट्र के मामले में पुलिस एनकाउंटर की जांच के लिए 16 दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक… चूंकि भरत तिवारी की घटना पुलिस के ऑन-ड्यूटी ऑपरेशन के दौरान हुई है। जहां पुलिस का दावा है कि उन्होंने सेल्फ डिफेंस में गोली चलाई और परिजनों का दावा है कि यह हत्या है, ऐसे मामलों में संविधान अफसरों को एक सुरक्षा प्रदान करता है। संविधान के ऑर्टिकल-311 के मुताबिक, किसी भी सिविल सर्वेंट को जांच का अवसर दिए बिना दंडित नहीं किया जा सकता। वहीं, CRPC की धारा 197 के मुताबिक, अदालतें या जांच एजेंसियां ऑन-ड्यूटी लोक सेवकों के खिलाफ तब तक कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकतीं, जब तक कि सरकार/गृह विभाग से अनुमति न मिल जाए। हालांकि, अगर जांच में यह साफ हो जाए कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फर्जी एनकाउंटर (क्राइम) किया है, तो यह संरक्षण समाप्त हो जाएगा। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। आयोग की रिपोर्ट के बाद अफसरों पर आगे कोई कार्रवाई हो सकती है। सवाल-3ः अफसरों पर आगे क्या-क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाबः सरकार ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है और तत्कालीन जगदीशपुर SDPO को उनके पद से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत आगे इन पर कार्रवाई होगी… सवाल-4ः आरोपी राजेश शर्मा मद्य निषेध विभाग में DSP बने। इसके क्या मायने हैं? जवाबः 1 जुलाई को नामजद तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को मद्य निषेध विभाग में DSP बना दिया गया। उनकी नई नियुक्ति पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक हलके में अफसरों का ट्रांसफर आम बात है। सामान्य नियम है कि सीनियर अफसरों जैसे DSP/SDPO को सीधे सस्पेंड करने के बजाय सरकार कम प्रभाव वाले पदों पर भेज देती है। मद्य निषेध विभाग में की गई यह नियुक्ति इसी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे ऐसे समझिए… मद्य निषेध विभाग में ट्रांसफर होने का बिल्कुल मतलब नहीं है कि वे कानूनी कार्रवाई से बच गए हैं। यदि जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के न्यायिक आयोग की चार्जशीट में उनके खिलाफ फर्जी एनकाउंटर के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो सरकार नई पोस्टिंग के बावजूद उन्हें तुरंत सस्पेंड करेगी। उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।

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