Sunday, September 6, 2026

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यूजीसी नियमों के विरोध में भाजपा नेताओं का प्रदर्शन:राकेश राय बोले- जिस पार्टी को 20 साल दिए, उसने हमें 'यूजीसी' थमाया


गोपालगंज में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और एससी-एसटी कानून में हुए संशोधनों के विरोध में सवर्ण समाज से जुड़े भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए यूजीसी के नए प्रावधानों को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता राकेश राय ने पार्टी और सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने जीवन के 20 साल दिए, उसी सरकार ने सवर्ण समाज को यूजीसी के रूप में ‘काला कानून’ दिया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सवर्ण समाज में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। ‘सवर्ण समाज अलग हुआ तो भाजपा का नुकसान’ राकेश राय ने दावा किया कि देश की आबादी में सवर्ण समाज की बड़ी हिस्सेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सवर्ण समाज भाजपा से अलग हुआ तो इसका राजनीतिक नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि वोट प्रतिशत में मामूली गिरावट भी भाजपा की सीटों पर बड़ा असर डाल सकती है। नए नियमों से भेदभाव बढ़ने का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियमों से सवर्ण समाज के छात्रों के साथ भेदभाव और छुआछूत को बढ़ावा मिल सकता है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों में ऐसा माहौल बनने की आशंका है, जिससे छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा और वे अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ सकते हैं। पुराने प्रावधान बहाल करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने और 2013/2020 की पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने एससी-एसटी कानून में विशेष क्षतिपूर्ति से जुड़े प्रावधानों को खत्म करने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को फंसाया जाता है और इसे ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ‘बच्चों के भविष्य के लिए सड़क पर उतरा हूं’ राकेश राय ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने इसे बच्चों के भविष्य, सम्मान और संस्कारों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों के भविष्य की चिंता को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।

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