Sunday, October 11, 2026
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यू​रेनियम उत्पादन में झारखंड की 24 फीसदी हिस्सेदारी:देश में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य का मजबूत आधार है प्रदेश


परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती से विशेष बातचीत परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने कहा कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि देश का सबसे मजबूत आधार स्तंभ है। विकसित भारत 2047 के तहत परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता 100 गीगावाट करने का लक्ष्य है। वर्ष 2031 तक देश में 21 नए रिएक्टर तैयार करना है। ​इससे परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़कर 22.36 गीगावाट हो जाएगी। परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल यूरेनियम है। भारत के ​कुल यू​रेनियम उत्पादन में झारखंड की हिस्सेदारी करीब 24% है। बीआईटी मेसरा के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. मोहंती शनिवार को दैनिक भास्कर से बात कर रहे थे। पेश है मुख्य अंश… झारखंड में न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में कितनी संभावनाएं हैं? क्या यहां परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा सकता है?
-परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन, भूकंपीय दृष्टि से सुरक्षित स्थान और पर्याप्त जल उपलब्धता जरूरी है। इन मानकों के आधार पर ही किसी जगह पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की संभावना का आकलन किया जा सकता है। झारखंड में भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। हमारी भी इसमें रुचि है, लेकिन अभी तक झारखंड में इस तरह का कोई संयंत्र स्थापित नहीं हुआ है। जादूगोड़ा में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उठती रही हैं। क्या आयोग ने कोई अध्ययन कराया है?
-इस विषय पर काफी अध्ययन हो चुका है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को केवल खनन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। दूसरे खनन क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आती हैं। सामान्य और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझने और उनका उचित तरीके से समाधान करने की जरूरत है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में स्टार्टअप की क्या संभावनाएं हैं?
-परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में स्टार्टअप के लिए संभावनाएं उभर रही हैं। पारंपरिक रूप से सरकारी नियंत्रण में रहने वाले इस सेक्टर को अब डीप-टेक नवाचार, नेट-जीरो और नीतिगत बदलावों के कारण निजी उद्यमियों के लिए खोल दिया गया है। पारंपरिक बड़े पावर प्लांट के बजाय, स्टार्टअप अब छोटे, सुरक्षित मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित कर रहे हैं। ये डेटा सेंटरों और औद्योगिक संयंत्रों को चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली दे सकते हैं।
बीआईटी मेसरा के साथ किसी तरह के सहयोग या रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने की योजना है?
-बीआईटी मेसरा के साथ हमारा कोई प्रत्यक्ष सहयोग नहीं है। हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंसेज विभिन्न क्षेत्रों में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए फंडिंग करता है। इसके तहत शोधकर्ता और संस्थान अपने प्रस्ताव जमा करते हैं।

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