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राज्य में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों को समय पर खून नहीं मिलने की खबर छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। मंगलवार को दैनिक भास्कर में इस समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई, जिसमें ब्लड कलेक्शन बढ़ाने के लिए नई रणनीति पर निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि अब राज्यभर में नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने के लिए एक एजेंसी नियुक्त की जाएगी। इसके लिए आरएफपी तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्तावित एजेंसी न केवल कैंप लगाएगी, बल्कि ब्लड बैंक संचालन और रक्त संग्रह प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करेगी। राज्य में हर साल करीब 1.5 से 2 लाख यूनिट रक्त की जरूरत होती है। 100 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य
प्रत्येक रक्तदान शिविर में कम से कम 100 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य है। इसके लिए कालेज, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों और अर्धसैनिक बलों के कैंपों में भी बड़े पैमाने पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिलों में विशेष ब्लड कलेक्शन वाहन की भी व्यवस्था होगी। डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता पर जोर
बैठक में रक्त संग्रह प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया गया कि हर डोनर की फोटो लेकर उसे बारकोड से जोड़ा जाए और जांच रिपोर्ट सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाए। इसके लिए एक अलग पोर्टल विकसित करने की योजना है। बैठक में सिकल सेल बीमारी और थैलेसीमिया के मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रक्त प्रबंधन को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

