रांची के गेतलसूद डैम में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बनकर तैयार हो गया है। 100 मेगावाट वाले इस पावर प्लांट का उद्घाटन 8 मई को होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्लांट से उत्पादित बिजली हटिया व नामकुम ग्रिड को मिलेगी। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) इसकी आपूर्ति करेगा। यह बिजली सस्ती होगी। इसके लिए जेबीवीएनएल विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर करेगी। जेबीवीएनएल सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ने करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण कराया है। इसलिए खास है तैरता हुआ प्लांट {172 हेक्टेयर में फैला यह प्लांट न केवल बिजली बनाएगा, बल्कि डैम के पानी को भाप बनकर उड़ने से भी रोकेगा। यानी बिजली भी मिलेगी और जल संरक्षण भी होगा। {जमीन के मुकाबले पानी की सतह पर सोलर पैनल ज्यादा ठंडे रहते हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। यह स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा उदाहरण होगा, जो कार्बन उत्सर्जन कम करेगा। आगे क्या…पांच साल में तीन दर्जन डैम और जलाशयों में लगेंगे प्लांट सरकार ने अगले पांच साल में तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। चांडिल डैम में 600 मेगावाट के प्लांट के लिए ज्रेडा ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। तेनुघाट डैम में भी 400 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगना है। इसके अलावा बोकारो और गुमला में ऊपरी शंख डैम में भी प्लांट लगाने की राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस पर भी इसी साल काम शुरू होने की उम्मीद है। रांची को मिलेगी ज्यादा बिजली
रांची के गेतलसूद में 100 मेगावाट का राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट तैयार, 8 मई से मिलेगी बिजली
रांची के गेतलसूद डैम में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बनकर तैयार हो गया है। 100 मेगावाट वाले इस पावर प्लांट का उद्घाटन 8 मई को होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्लांट से उत्पादित बिजली हटिया व नामकुम ग्रिड को मिलेगी। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) इसकी आपूर्ति करेगा। यह बिजली सस्ती होगी। इसके लिए जेबीवीएनएल विद्युत नियामक आयोग में पिटीशन दायर करेगी। जेबीवीएनएल सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) ने करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण कराया है। इसलिए खास है तैरता हुआ प्लांट {172 हेक्टेयर में फैला यह प्लांट न केवल बिजली बनाएगा, बल्कि डैम के पानी को भाप बनकर उड़ने से भी रोकेगा। यानी बिजली भी मिलेगी और जल संरक्षण भी होगा। {जमीन के मुकाबले पानी की सतह पर सोलर पैनल ज्यादा ठंडे रहते हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है। यह स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा उदाहरण होगा, जो कार्बन उत्सर्जन कम करेगा। आगे क्या…पांच साल में तीन दर्जन डैम और जलाशयों में लगेंगे प्लांट सरकार ने अगले पांच साल में तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। चांडिल डैम में 600 मेगावाट के प्लांट के लिए ज्रेडा ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। तेनुघाट डैम में भी 400 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगना है। इसके अलावा बोकारो और गुमला में ऊपरी शंख डैम में भी प्लांट लगाने की राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस पर भी इसी साल काम शुरू होने की उम्मीद है। रांची को मिलेगी ज्यादा बिजली


