Friday, October 23, 2026
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रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी, बाहर से बुलाए जाएंगे विशेषज्ञ डॉक्टर


झारखंड में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। रिम्स में प्रत्यारोपण शुरू करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई जाएगी। इसके लिए राज्य के तीन से चार योग्य चिकित्सकों को चयनित करने के साथ बाहर से एक-दो विशेषज्ञों को बुलाने की संभावना पर भी विचार किया गया है। वेल्लोर के सीएमसी अस्पताल के विशेषज्ञों का सहयोग लेने की भी तैयारी है, ताकि रिम्स के डॉक्टरों को प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव मिल सके। इससे किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यह निर्णय गुरुवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई अंग प्रत्यारोपण सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया। इसमें रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधारभूत संरचना और जरूरी सुविधाओं की समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षित चिकित्सक उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक में रिम्स के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा घोष पंत से किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञों की जानकारी ली गई। अपर मुख्य सचिव ने अनुभवी सर्जनों को जोड़ने और जरूरत के अनुसार बाहर के विशेषज्ञों से सहयोग लेने पर जोर दिया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग और रिम्स के कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन और रिन्यूवल से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इसमें जमशेदपुर आई हॉस्पिटल, मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, पारस एचईसी हॉस्पिटल और ऑर्किड मेडिकल सेंटर के प्रस्ताव शामिल थे। इनमें मेदांता और पारस एचईसी के किडनी ट्रांसप्लांट संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। अन्य प्रस्तावों पर निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। राज्य में मस्तिष्क-मृत मरीजों के अंगदान और प्रत्यारोपण को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने संबंधित दिशा-निर्देशों को स्वीकृति दी है। इनमें ब्रेन डेथ की अनिवार्य घोषणा, गैर-प्रत्यारोपण केंद्रों से अंग प्राप्त करने, पोस्टमार्टम से जुड़े मामलों और अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की व्यवस्था शामिल है। सलाहकार समिति की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री व अन्य।

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