मजबूत लोकतंत्र का निर्माण तभी संभव है, जब राजनीति में स्वच्छता आएगी। यह तब संभवहोगा जब नेताओं को टिकट देने काम पैमाना धनबल, बाहुबल नहीं बल्कि शिक्षा और योग्यता बनेगी। जिस दिन योग्यता देख कर…
मजबूत लोकतंत्र का निर्माण तभी संभव है, जब राजनीति में स्वच्छता आएगी। यह तब संभवहोगा जब नेताओं को टिकट देने काम पैमाना धनबल, बाहुबल नहीं बल्कि शिक्षा और योग्यता बनेगी। जिस दिन योग्यता देख कर टिकट मिलने लगेगा, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ जाएगी। कोई भी नहीं चाहता कि उसके घर की महिला राजनीति में प्रवेश करे। इस छवि को बदलने के लिए राजनीतिक दलों को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा। उन्हें राजनीति में ईमानदारी और पारदर्शिता दिखानी होगी।
ये विचार बुधवार को सुंदरपुर स्थित विभूति इनक्लेव अपार्टमेंट में हिन्दुस्तान के ‘आओ राजनीति करें’ अभियान के तहत ‘चाय चौपाल’ कार्यक्रम में महिलाओं से साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा का वादा तो सभी करते हैं लेकिन पूरा कोई नहीं करता। जब बात आधी आबादी की होती है तो सभी क्षेत्रों में आधे का मौका दिया जाए। रात में पुलिस पेट्रोलिंग दल में महिला सिपाहियों को भी शामिल किया जाए ताकि रात के वक्त महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। चाय चौपाल में मांग यह भी उठी कि महिला थानों की संख्या बढ़ाई जाए।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को शिक्षा से जोड़ा जाय। प्रतिभागियों का स्पष्ट मानना था कि गांवों को शहर से जोड़ने पर ही महिलाओं को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। महिलाओं ने कहा कि असुरक्षा का भाव समाप्त करने के लिए इसकी शुरूआत खुद से करनी होगी। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए।
समानता का अवसर मिले तो महिलाएं आगे बढ़ेंगी। इससे सामाजिक विषमता दूर होगी, राजनीति के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
किरन गोरे
समानता का अधिकार मिलेगा तो आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी। आरक्षण योग्यता को समाप्त कर रही है। यह गंभीर विषय है।
डॉ. रीता भट्ट
नेता वही जिसकी छवि साफ हो, देश के लिए कुछ करने की सोच रखता हो। ईमानदारी होगी तो महिला और पुरुष, दोनों का विकास होगा।
नूतन रंजन
शहरी सुविधाओं का गांव तक पहुंचना जरूरी है। शिक्षा के अभाव में महिलाओं तक योजनाएं नहीं पहुंच पातीं।
अर्चना सिंह
वोट देने से पहले नेताओं की योग्यता का मूल्यांकन जरूरी है। महिलाओं के लिए काम हुए हैं, उन्हें और बढ़ाने की जरूरत है।
वाणी भारद्वाज
जनता को लालच नहीं रोजगार दिया जाए। घर बैठे पैसे देने जैसी योजना लोगों को विकलांग बना देगी।
डॉ. सरोजा
देश का विकास वही करेगा जो चरित्रवान होगा। महिला हितों की बात करेगा। महिला सुरक्षा को लेकर जिसकी सोच स्पष्ट होगी।
डॉ. ममता तिवारी
वोट देने के पहले एक बार नेताओं के कार्यों की जांच जरूरी है। देश की बागडोर उसी के हाथों में दें जो विकास की बात करे।
पल्लवी केशरी
जाति धर्म की राजनीति करने वाले देश को आगे नहीं ले जा सकतें। बात रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की होनी चाहिए।
मधुलिका सिंह
महिलाओं को उनके अधिकार की जानकारी तभी होगी जब वे शिक्षित होंगी। सरकार कोई भी हो, इस दिशा में काम करना पड़ेगा।
भाविनी


