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कभी विकास की रफ्तार बढ़ाने और लोगों को आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई कल्याण विभाग की बसें आज इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गई हैं। वर्ष 2004-05 में राज्य सरकार के कल्याण विभाग की ओर से मनोहरपुर की चार लाभुक समितियों को बसें उपलब्ध कराई गई थीं। लेकिन उचित देखरेख और संचालन के अभाव में ये बसें धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो गईं। जिस योजना से लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद थी, उसका वर्तमान स्वरूप सरकारी संसाधनों के उपयोग और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहा है। करीब डेढ़ दशक बीतने के बाद भी इन बसों की स्थिति का कोई स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं है। चार में से तीन बसें कहां हैं, इसकी जानकारी नहीं मिल रही है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वे किस हालत में हैं। अपुष्ट खबरों की मानें तो तीन बसें कबाड़ियों के हत्थे चढ़ गईं। वहीं, एक बस मनोहरपुर की फॉरेस्ट कॉलोनी में कबाड़ के रूप में खड़ी है। जर्जर हालत में खड़ी यह बस कभी सड़क पर दौड़ती रही होगी। अब इसकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। सरकारी योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी : ज्ञात हो कि सरकारी योजनाओं के तहत संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका नियमित संचालन और रख-रखाव सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते इन बसों के संचालन और रख-रखाव पर ध्यान दिया जाता तो संभव है कि इनका लाभ लंबे समय तक लोगों को मिलता। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग चारों बसों की वर्तमान स्थिति का पता लगाए। यह भी सामने आना चाहिए कि सरकारी संसाधनों की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन है।
विकास की रफ्तार बढ़ाने को मिली थीं बसें, धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील
