Tuesday, September 15, 2026

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सरकारी अस्पतालों के इलाज पर भरोसा नहीं:चौंकाने वाला सच आया सामने; 73 फीसदी विधायक निजी अस्पताल में करा रहे जांच व इलाज


झारखंड के सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में बेड न मिलने पर न्यूरो सर्जरी तक के मरीजों का फर्श पर लिटाकर इलाज किया जाता है। वेंटिलेटर के अभाव में रोज 8 से 10 गंभीर मरीज तड़पते रहते हैं। पेट के सीटी स्कैन तक के लिए निजी सेंटरों का मुंह ताकते हैं। आम जनता इस लाचारी को झेलने को विवश है, लेकिन इस लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी जिन माननीयों पर है, उन्हें खुद अपने ही बनाए सरकारी तंत्र पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। उच्च शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के कार्डियक अरेस्ट से हुए आकस्मिक निधन के बाद दैनिक भास्कर ने राज्य के 7 मंत्रियों और 26 विधायकों यानी कुल 33 माननीयों से जाना कि वे अपना स्वास्थ्य जांच कहां कराते हैं। बातचीत में चौंकाने वाला सच सामने आया कि जनता को सरकारी अस्पतालों के भरोसे छोड़ने वाले माननीय खुद अपनी जान बचाने के लिए निजी और दूसरे राज्यों के बड़े अस्पतालों को चुनते हैं। 26 में से 19 विधायक (73 प्रतिशत) इलाज व विशेष जांच के लिए रांची के निजी या दिल्ली, वेल्लोर और हैदराबाद जैसे बाहरी शहरों के बड़े अस्पतालों में जाते हैं। वहीं, मात्र 7 विधायक (27 प्रतिशत) ही रांची, बोकारो, धनबाद या जमशेदपुर के सरकारी या स्थानीय निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। यानी स्थानीय व्यवस्था पर भरोसा करने वालों से बाहर जाने वाले माननीयों की संख्या करीब तीन गुना अधिक है। कौन विधायक कहां कराते हैं इलाज राज्य से बाहर: सीपी सिंह (गुरुग्राम, दिल्ली, चेन्नई), सरयू राय (हैदराबाद), रामचंद्र सिंह (हैदराबाद), सत्येन्द्र तिवारी (वेल्लोर), विक्सल कोंगाड़ी (वेल्लोर), सुदीप गुड़िया (वेल्लोर), रौशनलाल चौधरी (दिल्ली)। स्थानीय निजी अस्पताल में: सुरेश बैठा (निजी, रांची), विकास सिंह मुंडा (निजी, रांची), राजेश कच्छप (निजी, रांची), मनोज कुमार यादव (निजी, रांची), भूषण तिर्की (निजी, रांची), राम सूर्या मुंडा (निजी, रांची), चन्द्रदेव महतो (निजी, सिंदरी), रागिनी सिंह (निजी, झरिया), मंगल कालिंदी (निजी, जमशेदपुर), प्रदीप प्रसाद (निजी, हजारीबाग)। सरकारी व निजी दोनों पर निर्भर: ममता देवी (निजी व सरकारी, रांची), उमाकांत रजक (सरकारी व निजी, बोकारो), संजीव सरदार (सरकारी व निजी, जमशेदपुर)। सरकारी अस्पताल पर निर्भर:अमित महतो (रिम्स, रांची), पूर्णिमा साहू (सरकारी, जमशेदपुर), जयमंगल सिंह (सरकारी, बेरमो), समीर मोहंती (सरकारी, घाटशिला), प्रकाश राम (सरकारी, लातेहार), जनार्दन पासवान (सरकारी, रांची)। ये बदहाली आप झेलिए… हमारे माननीय यहां नहीं आते जानिए…रिम्स-सदर का हाल 1. रिम्स में जमीन पर इलाज: रिम्स में कुल 2200 बेड हैं। फिर भी ये कम हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को बेड नहीं मिलता। जमीन पर ही इलाज कराना पड़ता है। डॉक्टर भी पर्याप्त नहीं हैं।
2. वेंटिलेटर तक नहीं: रिम्स में वेंटिलेटर की भारी कमी है। रोजाना 8-10 मरीजों को इसलिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है कि यहां उन्हें वेंटिलेटर नहीं मिल पाता।
3. सीटी स्कैन, कैंसर इलाज का भी टोटा: रिम्स में पेट का सीटी स्कैन मशीन नहीं है। कैंसर के इलाज की पूरी शृंखला, हेमेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, लेजर और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव है।
4. सदर अस्पताल में घंटों नहीं देखते डॉक्टर: परिजनों की शिकायत है कि डॉक्टर घंटों तक मरीजों को नहीं देखते। विशेषज्ञ डॉक्टर का भी काफी अभाव है। सीधी बात अजय कु. सिंह, एसीएस, स्वास्थ्य विभाग रिम्स में सुविधाएं बढ़ा रहे, एक हजार विशेषज्ञ डॉक्टर लाएंगे 26 में 19 विधायक निजी अस्पताल या राज्य से बाहर इलाज करा रहे हैं। क्या यह व्यवस्था की खामी है?
-स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और कई नई सुविधाएं शुरू हुई हैं। गंभीर और विशिष्ट इलाज की पूरी व्यवस्था विकसित करने में समय लगता है। सरकार का प्रयास है कि लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर बढ़े और बाहर जाने की जरूरत कम हो। रिम्स में रोज 8-10 गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिलता और न्यूरो सर्जरी के मरीज फर्श पर इलाज करा रहे हैं?
-रिम्स में बेड, वेंटिलेटर और दूसरी जरूरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। मरम्मत और नए निर्माण का काम भी चल रहा है। क्षमता बढ़ने के साथ ऐसी परिस्थितियां खत्म होंगी। मंत्री… सामान्य जांच रांची में, लेकिन इलाज और फुल बॉडी चेकअप के लिए दिल्ली-वेल्लोर पहली पसंद ऑडिट में शामिल 7 में से 4 मंत्रियों ने रांची के सरकारी या निजी अस्पतालों में जांच की बात कही, लेकिन इलाज और फुल बॉडी चेकअप के लिए निजी और बाहरी संस्थान ही उनकी प्राथमिकता है… राधाकृष्ण किशोर (वित्त मंत्री): रिम्स में नियमित जांच कराते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर निजी अस्पताल के डॉक्टरों से परामर्श लेते हैं। योगेंद्र प्रसाद (पेयजल व मद्य निषेध मंत्री): रिम्स में दिखाते हैं, लेकिन पूरे परिवार के साथ हर साल फुल बॉडी चेकअप के लिए वेल्लोर जाते हैं। शिल्पी नेहा तिर्की (कृषि एवं पशुपालन और सहकारिता मंत्री) : जरूरत के अनुसार रांची के सरकारी और निजी अस्पताल में ही जांच कराती हैं। हफीजुल हसन (जल संसाधन मंत्री): रांची के अलावा दिल्ली में इलाज कराते हैं। परिवार की जांच भी वहीं कराते हैं। दीपिका पांडे सिंह नियमित जांच रांची के निजी अस्पताल में ही कराती हैं। बाहर होने पर जरूरत पड़ी तो वहां भी जांच करा लेती हैं। संजय प्रसाद यादव (उद्योग मंत्री): राज्य के निजी या सरकारी अस्पताल में इलाज कराते हैं, जरूरत पड़ने पर हैदराबाद जाते हैं। डॉ. इरफान अंसारी (स्वास्थ्य मंत्री): सामान्य जांच रांची के सरकारी अस्पताल में ही कराते हैं। बाहर जरूरत नहीं पड़ी।

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