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झारखंड में हाथियों का आतंक अब जंगल और गांवों तक सीमित नहीं रहा। शहर से गांव तक हाथियों की मौजूदगी लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। गढ़वा में हाथियों का झुंड नेशनल हाईवे पर पहुंचने से वाहनों की लंबी कतार लग गई, जबकि हजारीबाग में पिछले सात दिनों से घूम रहे हाथियों के दल ने दो लोगों की जान ले ली। गिरिडीह में 32 हाथियों के झुंड ने स्कूल में तोड़फोड़ कर मध्याह्न भोजन का अनाज खा लिया। वहीं, घाटशिला में हाथी घर के पास लगे पेड़ से कटहल तोड़ता नजर आया। कई इलाकों में लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। पिछले 4 साल में 424 लोगों की जान गई
वर्ष मौत
2022-23 97
2023-24 87
2024-25 81
2025-26 159
कुल 424 हाथी के हमले में मौत पर अब ₹10 लाख मुआवजा
मृत्यु: 10 लाख रुपए (पहले 4 लाख रुपए)
गंभीर चोट: 2 लाख रुपए (पहले 1.5 लाख रुपए)
सामान्य चोट: 35 हजार रुपए (पहले 25 हजार रुपए)
स्थायी विकलांगता: 3.5 लाख रु. (पहले 3.25 लाख रु.)
फसल-मकान का नुकसान: आकलन के अनुसार मुआवजा बारिश और प्रजनन काल में आक्रामक हो जाते हैं हाथी
पीसीसीएफ (वन्यजीव) रवि रंजन के अनुसार, बरसात और प्रजनन काल में हाथी अधिक आक्रामक हो जाते हैं। मानसून के दौरान उनका मूवमेंट बढ़ जाता है। इस समय यदि उनके रास्ते में कोई बाधा आती है या उन्हें खतरा महसूस होता है तो वे हमला कर देते हैं। प्रजनन काल में हथिनी भी ज्यादा संवेदनशील रहती है और किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करती। इसलिए इस मौसम में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

