दरभंगा शहर के वीआईपी रोड स्थित बलभद्रपुर लहेरियासराय के पचाढ़ी मठ परिसर में तीन दिवसीय ऐतिहासिक सामूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार कार्यक्रम आज खत्म हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अभिभावक और सनातन धर्मावलंबी उपस्थित रहे। पूरे मठ परिसर में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। मिथिला की पुरानी धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में विद्वान आचार्यों और पंडितों की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया गया। संस्कार के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। नैतिक मूल्यों से जोड़ने का काम करता पचाढ़ी मठ के महंथ रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा ने बताया कि 17 जून 2026 से शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन के तहत पहले दिन बासकट्टी, दूसरे दिन कुमारम और अंतिम दिन आज मुख्य यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्म के प्रमुख संस्कारों में से एक है, जो बच्चों को धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का काम करता है। महंथ ने बताया कि इस वर्ष कुल 15 बरूआ (बटुकों) का उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में दरभंगा सहित विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म फायदा हासिल किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मठ परिसर में भव्य पंडाल, भोजन, प्रसाद वितरण, पेयजल तथा बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। अंतिम दिन पूरे मठ परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्तिमय वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने क्षेत्र को पूरी तरह धर्ममय बना दिया।
दरभंगा में तीन दिवसीय यज्ञ खत्म:श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, भक्तों की उमड़ी भीड़
दरभंगा शहर के वीआईपी रोड स्थित बलभद्रपुर लहेरियासराय के पचाढ़ी मठ परिसर में तीन दिवसीय ऐतिहासिक सामूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार कार्यक्रम आज खत्म हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अभिभावक और सनातन धर्मावलंबी उपस्थित रहे। पूरे मठ परिसर में धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। मिथिला की पुरानी धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में विद्वान आचार्यों और पंडितों की ओर से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया गया। संस्कार के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। नैतिक मूल्यों से जोड़ने का काम करता पचाढ़ी मठ के महंथ रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा ने बताया कि 17 जून 2026 से शुरू हुए इस तीन दिवसीय आयोजन के तहत पहले दिन बासकट्टी, दूसरे दिन कुमारम और अंतिम दिन आज मुख्य यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्म के प्रमुख संस्कारों में से एक है, जो बच्चों को धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का काम करता है। महंथ ने बताया कि इस वर्ष कुल 15 बरूआ (बटुकों) का उपनयन संस्कार संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में दरभंगा सहित विभिन्न जिलों और क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म फायदा हासिल किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मठ परिसर में भव्य पंडाल, भोजन, प्रसाद वितरण, पेयजल तथा बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। अंतिम दिन पूरे मठ परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और भक्तिमय वातावरण के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने क्षेत्र को पूरी तरह धर्ममय बना दिया।


