बोरिंग रोड स्थित सुकृष्णा कॉमर्स एकेडमी, 5 मंजिला बिल्डिंग में 2 हजार बच्चे पढ़ते हैं। बिल्डिंग चारों तरफ से पूरी पैक है। बाहर निकलने का एक ही रास्ता, वह भी पीछे की तरफ खुलता है। सड़क इतनी पतली कि दमकल की गाड़ी का जाना मुश्किल। अगर आग लग जाए तो बच्चो
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मुसल्लहपुर में खान सर की खान ग्लोबल स्टडीज और रौशन आनंद की ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी, आने-जाने का तंग रास्ता। रोज हजारों बच्चे पढ़ने आते हैं। आग लगने जैसा हादसा हो जाए तो बचकर निकलना मुश्किल। भीड़ इतनी कि भगदड़ का खतरा। ऊपर से कोचिंग में आग से बचाव के आधे-अधूरे इंतजाम।
यह स्थिति पटना के एक या दो कोचिंग सेंटर की नहीं। 100 से ज्यादा संस्थानों में हालत खराब है।
22 जून को लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 लोगों की मौत हुई। ऐसे में भास्कर रिपोर्टर ने पटना के कोचिंग संस्थानों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की पड़ताल की। पढ़िए, ग्राउंड रिपोर्ट…।
बोरिंग रोड के तपस्या परिसर में 2 कोचिंग संस्थान, गेट एक
1- करियर क्लासेज: फायर सेफ्टी मेजर्स न के बराबर
बोरिंग रोड स्थित तपस्या परिसर में चलने वाली करियर क्लासेज प्रतियोगिता परीक्षा, BPSC समेत अन्य एग्जाम की तैयारी कराती है। यहां हर रोज 200 से 250 बच्चे पढ़ने आते हैं। काफी भीड़-भाड़ वाली स्थिति रहती है।
भास्कर रिपोर्टर जब कोचिंग में पहुंचे तो फायर सेफ्टी मेजर्स न के बराबर दिखीं। कोचिंग में एंट्री और एग्जिट गेट, सीढ़ी एक ही है। आपात स्थिति में बचाव के कोई उपाय नहीं।
करियर क्लासेज के ऑनर विजेंद्र कुमार सिंह से जब फायर सेफ्टी को लेकर सवाल पूछा तो वह गुस्से से लाल हो गए। कहने लगे, बोरिंग रोड में ऐसी घटना नहीं होती है। अनहोनी होनी होगी तो कभी भी हो जाएगी। मुसल्लहपुर इलाके में जाकर देखिए, वहां इससे भी बुरी स्थिति है। भेड़ बकरी की तरह बच्चे हैं।

लखनऊ हादसे के बाद मन में डर बैठा है
हमने वहां मौजूद छात्रों से बात करने की कोशिश की। मुश्किल से एक छात्रा प्रिया बात करने के लिए तैयार हुई। कहा, लखनऊ की घटना को लेकर मन में डर है। इन सब चीजों का संस्थानों को ख्याल रखना चाहिए। समय-समय पर अपने MCB और फायर सेफ्टी मानकों का जायजा लेते रहना चाहिए।
2- डी रॉयज स्मार्ट एकेडमी: आने-जाने का रास्ता एक, सीढ़ी भी पतली
बोरिंग रोड स्थित तपस्या परिसर में चलने वाली कोचिंग डी रॉयज स्मार्ट एकेडमी (D ROY’S SMART ACADEMY) JEE, NEET, बोर्ड जैसे कंपीटिटिव एग्जाम की तैयारी कराती है। करीब 250 बच्चे पढ़ने आते हैं। काफी भीड़ रहती है, लेकिन इसके हिसाब से व्यवस्था नहीं है।
भास्कर रिपोर्टर जब कोचिंग इंस्टीट्यूट पहुंचे तो वहां फायर सेफ्टी के इंतजाम सही नहीं दिखे। एंट्री और एग्जिट गेट एक है। सीढ़ी भी एक है, वह भी बहुत पतली। अगर आपात स्थिति बनती है तो बचाव का कोई उपाय नहीं होगा।
रिपोर्टर ने जब एकेडमी के ऑनर दिलीप रॉय से सवाल पूछा तो वह कैमरा से छिपते हुए ऑफिस में चले गए। कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

डी रॉयज स्मार्ट एकेडमी की बिल्डिंग की सीढ़ी पतली है। इस रास्ते एक साथ अधिक बच्चे नहीं निकल सकते।
3- कौटिल्य जीएस टीचिंग सेंटर: अग्निशमन विभाग ने दूसरी बार दिया नोटिस
कौटिल्य जीएस कोचिंग पटना के स्टूडेंट हब मुसल्लहपुर में स्थित है। यहां भी रोज सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं। यह कोचिग संस्थान बीपीएससी, रेलवे, एसएससी सहित कई परीक्षा की तैयारी कराता है।
कौटिल्य के अंदर भी फायर सेफ्टी मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। एक सीढ़ी है। इस कोचिंग को अग्निशमन विभाग की ओर से दूसरी बार नोटिस दिया गया है। समय सीमा के अंदर सेफ्टी मानकों का ख्याल नहीं रखा गया तो सील किया जा सकता है।
4- खान ग्लोबल स्टडीज: आग से बचाव के इंतजाम नहीं
खान ग्लोबल स्टडीज बोरिंग रोड, मुसल्लहपुर सहित कई जगह है। यह बिहार के प्रसिद्ध टीचर खान सर का कोचिंग इंस्टीट्यूट है। यहां यूपीएससी, पीसीएस, डिफेंस और पुलिस भर्ती सहित कई परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। 15 हजार से ज्यादा बच्चे खान सर की कोचिंग में पढ़ते हैं। फिर भी ये कोचिंग फायर सेफ्टी मेजर्स में फिसड्डी है।
हाल ही में हुए ऑडिट में बोरिंग रोड चौराहा स्थित खान ग्लोबल स्टडीज में पोर्टेबल अग्निशमन उपकरण छोड़कर कुछ भी नहीं पाया गया। जबकि जरूरत के मुताबिक डाउन कॉमर सिस्टम, चौड़ा गेट, फायर अलार्म सिस्टम, ओवर हेड टैंक और एग्जिट साइन का होना अनिवार्य है। सुरक्षा मानकों के हिसाब से इसे असुरक्षित कोचिंग की श्रेणी में रखा गया है।

कोचिंग में लगे फायर सेफ्टी सिस्टम को आग से चेक किया गया।
4- PW ओनली IAS कोचिंग: आपात स्थिति के लिए पर्याप्त सेफ्टी उपकरण नहीं
बोरिंग रोड के PW ओनली IAS कोचिंग की हालत भी खस्ता है। यहां IAS, IPS, UPSC की तैयारी करने वाले छात्र पढ़ते हैं। सेफ्टी उपकरण लगे हैं, लेकिन आपात स्थिति के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसे भी सेफ्टी मानकों का पालन करने के लिए निर्देश दिया गया है।
5- ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी: आने-जाने का एक पतला रास्ता
रौशन आनंद की ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी भीड़भाड़ वाले इलाके मुसल्लहपुर में है। इसे दारोगा फैक्ट्री भी कहा जाता है। यहां जनरल कंपटीशन, बिहार पुलिस सहित कई कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कराई जाती है।
करीब 10 हजार छात्र पढ़ने आते हैं। यहां के हालात भी कुछ ठीक नहीं हैं। आने जाने का गेट एक है। छोटा सा रास्ता और पतली सीढ़ी है। फायर सेफ्टी उपकरण भी कुछ खास नहीं हैं। सुरक्षा मानकों के हिसाब से इसे असुरक्षित कोचिंग की श्रेणी में रखा गया है।

मुसल्लहपुर में रौशन आनंद की ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी और खान सर की कोचिंग एक ही परिसर में है।
7- सुकृष्णा कॉमर्स एकेडमी: 5 मंजिला बिल्डिंग से निकलने का रास्ता एक
बोरिंग रोड का यह कोचिंग जी-प्लस फोर भवन में चल रहा है, जहां 1500 से 2000 छात्र पढ़ते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा की भारी अनदेखी की गई है।
पूरी बिल्डिंग चारों तरफ से पैक है और बाहर निकलने का एक ही गेट है, जो पीछे की तरफ खुलता है। सड़क इतनी संकरी है कि दमकल की गाड़ी मुड़ भी नहीं सकती।
8- क्वॉड एआई, राजीव नगर रोड नं-19: कोचिंग के पास बिजली के तार
यह कोचिंग महज 10 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित है। कोचिंग के ठीक पास बिजली के तारों का खतरनाक मकड़जाल है। बिजली का पोल सीधे बाउंड्री वॉल से सटा है। यहां फायर एसओपी का पालन नहीं हो रहा है और जरूरी उपकरण भी नहीं हैं।
9- फिजिक्स वाला, बुद्ध मार्ग: फायर सेफ्टी उपकरण ठीक नहीं
संस्थान के पास फायर एनओसी तो है, लेकिन जांच के दौरान डीजल पंप बंद मिला। इनके एग्जीबिशन रोड वाले सेंटर के पास भी एनओसी है, लेकिन दोनों जगहों पर हर फ्लोर पर मानक के अनुरूप फायर सेफ्टी उपकरण नहीं रखे गए हैं।
अब तक 284 संस्थानों का हो चुका ऑडिट
बता दें कि फायर सेफ्टी को लेकर पटना में लगभग 529 संस्थाओं को नोटिफाई किया गया था, जिसमें से सिर्फ 284 का ऑडिट हुआ है।
अग्निशमन विभाग की ओर से 9 फायर स्टेशन को मिलाकर 21 टीम बनाई गई है। टीम कोचिंग हब वाले इलाके खासकर मुसल्लहपुर हाट, बोरिंग रोड, नया टोला, कंकड़बाग, भिखना पहाड़ी में रोज ऑडिट कर रही है।

धुआं से कोचिंग सेंटर में लगे स्मोक डिटेक्टर की जांच करते अग्निशमन विभाग के अधिकारी।
65 संस्थानों में आने-जाने का एक ही रास्ता
ऑडिट किए गए 80 कोचिंग संस्थानों में से 65 में एंट्री और एग्जिट का एक ही रास्ता है। कोई हादसा हो जाए तो भगदड़ मच सकती है। अधिकतर संस्थानों में इलेक्ट्रिक पैनल की हालत बेहद जर्जर है। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सबसे अधिक आशंका होती है।
हजारों छात्रों की क्षमता वाले ये कोचिंग सेंटर ऐसी तंग गलियों में चल रहे हैं, जहां आग लगने की स्थिति में दमकल गाड़ी का पहुंचना भी मुश्किल है। हजारों छात्रों की जान हर वक्त दांव पर है।
कोचिंग गढ़ मुसल्लहपुर में हालत गंभीर, छात्रों के निकलने की व्यवस्था नहीं
अग्निशमन विभाग की ऑडिट में खान ग्लोबल स्टडीज, महिंद्रा कोचिंग, मेंटर्स, ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी और ओनली IAS समेत 106 कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों पर फिसड्डी पाए गए।
इतना ही नहीं, करीब 300 कोचिंग संस्थान बिना किसी मानक के अवैध तरीके से संचालित होते मिले। सबसे गंभीर स्थिति मुसल्लहपुर इलाके की है। यहां आग जैसी आपात स्थिति में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
अब अग्निशमन विभाग ने ऐसे संस्थानों को नोटिस जारी कर तय समय में सुरक्षा मानकों को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
पटना में चल रहे 1,256 कोचिंग संस्थान
पटना में करीब 1,256 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं। इनमें से 529 रजिस्टर्ड हैं। इनमें लाखों बच्चे अपना भविष्य बनाने आते हैं। बड़े से लेकर छोटे कंपटीशन की तैयारी करते हैं।
पटना के पॉश इलाके बोरिंग रोड, किदवईपुरी, कंकड़बाग, मुसल्लहपुर, बुद्धा कॉलोनी सहित कई इलाके में बड़े कोचिंग संचालित होते हैं। एक फ्लोर पर कई क्लास चलते हैं। क्लास रूम छोटा हो तो 35 बच्चे बैठते हैं। हॉल या बड़े आकार के क्लास रूम में बच्चों की संख्या ज्यादा रहती है।

मुसल्लहपुर पटना का कोचिंग हब है।
15 हजार करोड़ रुपए का है कोचिंग बाजार
पटना का कोचिंग बाजार करीब 15 हजार करोड़ रुपए का है। हर महीने 80 से 120 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट होता है। इसमें कोचिंग फीस, बुक्स, हॉस्टल फी सहित अन्य चीजें शामिल हैं। हॉस्टल और पीजी कारोबार को जोड़ दें तो पैसे और बढ़ जाते हैं।
मेडिकल, इंजीनियरिंग, सिविल सर्विस, बीपीएससी, बिहार पुलिस, डिफेंस, एसएससी सहित कई जनरल कंपटीशन की तैयारी करने के लिए हर साल 2 से 3 लाख छात्र पटना आते हैं।
10 लाख से ज्यादा बच्चे यहां पढ़ते हैं। पटना के 100 से ज्यादा कोचिंग सेंटर की हालत बेहद खराब है। कोई भी आपात घटना होने पर भगदड़ मच सकती है। फायर सेफ्टी से लेकर एंट्रेंस-एग्जिट तक की हालत सही नहीं है।
कई संस्थानों में फायर सेफ्टी को लेकर बड़ी लापरवाही
राज्य अग्निशमन अधिकारी मनोज कुमार नट ने बताया, ‘कई संस्थानों में अनिवार्य तौर पर क्षेत्रफल के हिसाब से हौज पाइप, हौज रील स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर, इलेक्ट्रिक पैनल, सर्वर रूम पर अग्नि रोधी दीवार बनाना, ओवरहेड वाटर टैंक, अंडर ग्राउंड वाटर टैंक, एंट्री और एग्जिट होना चाहिए, जो नहीं है।
‘निकासी मार्ग जिस संस्थान में है, उसमें से अधिकतर के यहां रास्ता कूड़ा से बाधित पाया गया है।’

कोचिंग संस्थानों को दिए गए थे 7 दिन
बोरिंग रोड, कंकड़बाग और लोद्दीपुर अग्निशमन क्षेत्र में 15 और कंकड़बाग में 10 कोचिंग संस्थानों का ऑडिट किया गया है।
- बोरिंग रोड चौराहा स्थित खान ग्लोबल स्टडीज, बोरिंग रोड में मेंटर्स, EDUSERVE सहित कई कोचिंग खतरनाक श्रेणी में हैं।
- इन्हें नोटिस देकर 7 दिनों का समय दिया गया है। कंकड़बाग में 10 में से 5 असुरक्षित कोचिंग हैं। इन्हें भी नोटिस दिया गया है।
- महिंद्रा कोचिंग, चाणक्य IAS बोरिंग रोड भी मानकों में फिसड्डी पाए गए हैं। इन्हें भी अग्निशमन विभाग की ओर से सुझाव दिए गए हैं।
संस्थानों को 10 दिनों का समय मिला
अग्निशमन विभाग की ओर से मानकों को पूरा नहीं करने पर संस्थानों को सील करने की भी प्रक्रिया है। सील करने से पहले तीन प्रक्रिया से गुजरनी पड़ती है।
पहले C 1, D 1 और तीसरा E 1 का नोटिस देने के बाद भी सुधार नहीं किया जाता है, तो ऐसे संस्थानों को डिफॉल्टर की श्रेणी में रखकर E 1 नोटिस जारी करते हुए 7 से 10 दिनों का समय दिया जाता है। इसके बाद उस संस्थान को सील किया जाता है।
अधिकांश संस्थानों में ट्रेनिंग की कमी
अग्निशमन विभाग की ओर से ऑडिट किए कोचिंग संस्थानों में यह पाया गया है कि अधिकांश संस्थानों में वहां के कर्मियों को फायर फाइटिंग सिस्टम को ऑपरेट करने नहीं आ रहा है।
प्रॉपर वे में उपकरण काम नहीं कर रहे हैं। निकासी साइनेज नहीं हैं। ABC टाइप, CO 2 टाइप, फोन टाइप की भारी कमी है। प्रशिक्षण का अभाव है।

लखनऊ की कोचिंग में आग लगने से 15 लोगों की गई थी जान
बता दें कि 22 जून को लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। बेसमेंट में लगे एसी में ब्लास्ट से धुआं फैला और लोगों का दम घुट गया।
मरने वालों में 5 महिलाएं और 10 पुरुष थे। ज्यादातर 20 से 30 साल के स्टूडेंट्स थे। इस हादसे के बाद सभी राज्यों की फायर टीम एक्टिव हो गई है। लगातार सभी कोचिंग संस्थान के ऑडिट कर रही है।

