Tuesday, July 7, 2026

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निजी वेंडर से छपवाए होलोग्राम, जीपीएस बंद कर 20 हजार करोड़ रुपए की चपत


पीएजी की 2021-25 अवधि की परफॉर्मेंस ऑडिट में कई और गड़बड़ियां उजागर हुईं; ऑडिट रिपोर्ट पर 3 महीने से कुंडली मारकर बैठे हैं अफसर, जवाब नहीं दे रहे… सीएजी की स्वीकृति के बाद प्रधान महालेखाकार (पीएजी) की 2021 से 2025 तक की परफॉर्मेंस ऑडिट में झारखंड के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में नीतिगत गड़बड़ियों का बड़ा खुलासा हुआ है। ऑडिट में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व नुकसान और शराब की अवैध खरीद-बिक्री की आशंका जताई गई है। अप्रैल में उत्पाद सचिव को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट पर तीन महीने बाद भी विभाग ने अपना पक्ष नहीं दिया है। पीएजी ने परफॉर्मेंस ऑडिट के आधार पर तैयार यह गोपनीय रिपोर्ट इसी साल अप्रैल में राज्य सरकार के उत्पाद सचिव को भेजी थी। रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताओं पर विभाग का पक्ष और मंतव्य मांगा गया था, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही कोई अधिकारी इस पर औपचारिक रूप से बोलने को तैयार है। ऑडिट के दौरान विभाग से पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बावजूद पीएजी की टीम ने जांच नहीं रोकी। टीम ने रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, देवघर और दुमका में जमीनी पड़ताल कर गड़बड़ियों से जुड़े पुख्ता साक्ष्य जुटाए। रिपोर्ट के मुताबिक मामला केवल फाइलों की अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राज्य के खजाने को सीधे नुकसान पहुंचने की आशंका है। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि गड़बड़ियों की जड़ें काफी गहरी हैं। राजस्व का ‘ब्लैक होल’: ऐसे खाली होता गया सरकारी खजाना
1 होलोग्राम का खेल… शराब की बोतलों पर लगने वाले सुरक्षा होलोग्राम का काम सरकारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस (नासिक) के बजाय प्रिज्म नामक निजी वेंडर को सौंप दिया गया। ऑडिट में इसे वित्तीय नियमों के उल्लंघन का मामला बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इससे नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब की बिक्री और राजस्व चोरी का रास्ता खुला।
2 जीपीएस निगरानी बंद… डिस्टलरी से गोदाम और दुकानों तक शराब ले जाने वाले ट्रकों की जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं की गई। इससे यह निगरानी संभव नहीं रही कि शराब तय गंतव्य तक पहुंची या रास्ते में ही उसकी हेराफेरी हुई।
3 वैट वसूली में बड़ी चूक…नियम के मुताबिक मूल्य वर्धित कर (वैट) की वसूली आपूर्ति के हर चरण में होनी थी, लेकिन विभाग ने केवल शुरुआती स्तर पर ही कर लिया। ऑडिट के मुताबिक इससे सिंडिकेट को मनमाने तरीके से शराब बेचने और उत्पाद शुल्क व वैट के अंतर का फायदा उठाने का अवसर मिला, जिससे बड़े राजस्व नुकसान की आशंका बनी। गड़बड़ियों के दौरान विभाग की कमान किसके पास रही
सचिव: विनय कुमार चौबे
मई 2020 से जनवरी 2024 तक उत्पाद सचिव रहे। कुछ अवधि तक उत्पाद आयुक्त और जेएसबीसीएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। उनके कार्यकाल में 2022 की नई उत्पाद नीति लागू हुई। 2025 में नीति में बदलाव के बाद खुदरा शराब दुकानें निजी हाथों में दी गईं, जबकि थोक कारोबार जेएसबीसीएल के पास रखा गया। मंत्री
जगरनाथ महतो: जनवरी 2020-अप्रैल 2023
बेबी देवी: जुलाई 2023-नवंबर 2024
योगेंद्र प्रसाद: दिसंबर 2024 से वर्तमान ऑडिट टीम को नहीं मिले जरूरी दस्तावेज
जून 2025: सीएजी ने झारखंड की उत्पाद नीति, उसके क्रियान्वयन और राजस्व वसूली की परफॉर्मेंस ऑडिट को मंजूरी दी।
जुलाई की जगह सितंबर: उत्पाद सचिव और पीएजी के बीच प्रस्तावित एंट्री कॉन्फ्रेंस दो महीने टालकर सितंबर में कराई गई।
एसीबी का हवाला: ऑडिट टीम ने 2014-22 के रिकॉर्ड मांगे तो विभाग ने कहा कि सभी दस्तावेज एसीबी के पास हैं।
फाइलें नहीं मिलीं: नवंबर के तीसरे सप्ताह में एसीबी पहुंची ऑडिट टीम को जांच लंबित होने का हवाला देकर रिकॉर्ड देने से मना किया।
अनुमति का पेंच: एसीबी ने विभाग को बताया कि दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं और मंत्रिमंडल निगरानी विभाग की अनुमति के बिना नहीं दिए जा सकते। इसके बाद विभाग ने अनुमति लेने की पहल ही नहीं की।
जांच जारी रही: जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर भी पीएजी टीम ने छह जिलों में जमीनी जांच कर साक्ष्य जुटाए। चुनिंदा कंपनियों और व्यक्तियों को फायदा पहुंचाने के लिए बार-बार बदली गईं नीतियां
रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्षों में शराब नीति और उसके क्रियान्वयन में कई ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ चुनिंदा कंपनियों और व्यक्तियों को सीधा लाभ पहुंचाने के आरोप लगे हैं। टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के साथ ठेकों के आवंटन में भी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। इन्हीं गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में पहले कई अधिकारी जेल जा चुके हैं, जबकि मामले की जांच अभी एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं। सीधी बात- – योगेंद्र प्रसाद, उत्पाद मंत्री
मंत्री बनने के पहले के फैसले पर टिप्पणी नहीं करूंगा
उत्पाद विभाग में एक बार फिर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है?
-मुझे कोई जानकारी नहीं है।
ऑडिट रिपोर्ट में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान की बात है। तीन महीने पहले पक्ष मांगा गया था। जवाब क्यों नहीं दिया गया?
-विभागीय सचिव से पक्ष मांगा गया होगा। मैं जानकारी लेता हूं। अनियमितता सामने आने पर उचित कार्रवाई होगी।
निजी वेंडर को होलोग्राम छापने का काम क्यों दिया गया?
-अभी सरकारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस, नासिक से ही होलोग्राम लिया जा रहा है। मेरे मंत्री बनने से पहले की अवधि के फैसलों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

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