Friday, July 17, 2026

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पर्यटन-शिक्षा सहित व्यापार का हब बनेगा नालंदा:सरकार ने जारी किया मास्टर प्लान-2045, 200 बेड वाले अत्याधुनिक अस्पताल बनेंगे


भगवान बुद्ध की तपोस्थली, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली और विश्व प्रसिद्ध नालंदा महाविहार की धरती अब एक नए और आधुनिक युग में प्रवेश करने को तैयार है। बिहार सरकार ने अगले बीस वर्षों के भीतर इस संपूर्ण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन, शिक्षा और ज्ञान केंद्र बनाने के लिए ‘राजगीर रीजनल प्लानिंग एरिया (आरआरपीए) मास्टर प्लान-2045’ का विस्तृत मसौदा तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया के तहत नालंदा कलेक्ट्रेट स्थित हरदेव भवन सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने की। इस बैठक में जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नीति-निर्माताओं ने मास्टर प्लान के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया, ताकि विकास की राह में आने वाली चुनौतियों का समय रहते समाधान निकाला जा सके। सुनियोजित विकास का रोडमैप इस मास्टर प्लान की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत विकास मॉडल है, जिसके तहत पांच अलग-अलग नगरों को उनकी विशिष्टता के आधार पर विकसित किया जाएगा। योजना के अनुसार, राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और संस्थागत हब के रूप में स्थापित किया जाएगा, जबकि नालंदा को विश्व धरोहर और वेलनेस टूरिज्म के मुख्य केंद्र के रूप में संवारा जाएगा। सिलाव को क्षेत्रीय व्यापार और थोक वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। वहीं, पावापुरी को शिक्षा और उच्च स्तरीय सेवाओं का हब बनाया जाएगा और गिरियक को इको-टूरिज्म के आकर्षण केंद्र के रूप में पहचान दी जाएगी। इस योजना में न केवल ये शहर, बल्कि इनके आसपास के सौ से अधिक गांवों को भी शामिल किया गया है, ताकि पूरे क्षेत्र का समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और भविष्य की जरूरतें आने वाले दो दशकों में आबादी के दोगुने होने के अनुमान को देखते हुए, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तृत खाका खींचा गया है। क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को 45 मीटर तक चौड़ा करने के साथ ही राजगीर, सिलाव और नालंदा रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जाएगा। यातायात के दबाव को कम करने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बाईपास के पास एक नया अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और सिलाव में ट्रांसपोर्ट नगर के साथ ट्रक टर्मिनल का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही, राजगीर और पावापुरी जैसे प्रमुख स्थलों पर मल्टीलेवल पार्किंग और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए ई-बस सेवा, गोल्फ कार्ट और डिजिटल गाइड सिस्टम जैसे नवाचारों को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर आर्थिक प्रगति के लिए इस मास्टर प्लान में पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। घोसरावां और सैदी जैसे क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और कोल्ड चेन हब स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 500 और 200 बेड वाले कई अत्याधुनिक अस्पतालों व ट्रॉमा सेंटरों के निर्माण का प्रस्ताव है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अनुसंधान और नवाचार संस्थानों की स्थापना पर ध्यान दिया गया है, ताकि नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके। पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों का संतुलन विकास की इस दौड़ में प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार ने विकास का आधार माना है। कुल भूमि का लगभग 46.7 प्रतिशत हिस्सा कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है, ताकि अनियंत्रित शहरीकरण से खेती की जमीन को बचाया जा सके। आहर-पईन प्रणाली के पुनर्जीवन, भूजल पुनर्भरण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के जरिए क्षेत्र को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी इस योजना में दिखाई गई है। राजगीर वन क्षेत्र और जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण कार्यों को कड़े पर्यावरणीय नियमों के दायरे में रखा जाएगा। जनभागीदारी से तैयार होगा अंतिम खाका बैठक के दौरान प्रमंडलीय आयुक्त मयंक वरवड़े ने स्पष्ट किया कि फंडिंग इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए अंतिम मसौदे को व्यावहारिक बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने मसौदे में हवाई अड्डे के प्रावधान पर जोर दिया, जबकि स्थानीय प्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों की समस्याओं और पहाड़ों से पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित न करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव रखे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभी एक प्रारूप है और अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे, ताकि एक सर्वमान्य और प्रभावी मास्टर प्लान लागू किया जा सके। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी उदिता सिंह, पुलिस अधीक्षक भारत सोनी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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