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42वीं सब जूनियर और 52वीं जूनियर राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता-2026 में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले श्रेष्ठ तैराकों की तलाश अब पूरी हो गई है। 25-26 जुलाई को बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के तैराकी परिसर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय चयन परीक्षण संपन्न हो गया। ट्रायल में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 123 युवा तैराकों ने पानी में अपना दम-खम दिखाया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा की। इसके अलावा 23 और 24 जुलाई को राज्य खेल अकादमी, राजगीर में एक विशेष ‘तकनीकी निर्णायक फाउंडेशन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम’ का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य तैराकी खेल के तकनीकी मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना है। पहली बार आधुनिक टच पैड का इस्तेमाल चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए इस बार एक बड़ा बदलाव किया गया। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि राज्य के इतिहास में पहली बार किसी स्टेट ट्रायल्स में अत्याधुनिक ‘टच पैड’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इससे ट्रायल्स पूरी तरह से फेयर और ट्रांसपेरेंट रहे, जिससे हर खिलाड़ी को उसकी वास्तविक क्षमता के अनुसार ही आंका गया।
उन्होंने बताया कि यह चयन परीक्षण बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और बिहार तैराकी संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त महानिदेशक श्री शंकरण ने प्रतिभागियों की तारीफ करते हुए कहा कि सभी 123 तैराकों ने बेहतरीन अनुशासन, बेहतर प्रदर्शन किया। भारतीय तैराकी महासंघ की ओर से इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए श्री सुंदरेश एस. और श्री मयंक कीर्तिभाई पटेल को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। इस दौरान बिहार तैराकी संघ के 40 तकनीकी अधिकारियों ने भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी। श्री शंकरण ने कहा कि यह आयोजन महासंघ, खेल प्राधिकरण और तैराकी संघ की उस साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसके तहत हम बिहार में प्रतिस्पर्धी तैराकी को मजबूत बनाने और प्रतिभाओं को निष्पक्ष अवसर देने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी अधिकारियों को भी मिला राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण खिलाड़ियों के चयन के अलावा, खेल के तकनीकी पक्ष को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। श्री शंकरण ने जानकारी दी कि राज्य खेल अकादमी, राजगीर में दो दिवसीय (23 और 24 जुलाई) आवासीय तकनीकी निर्णायक फाउंडेशन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इस प्रशिक्षण का संचालन SFI के विशेषज्ञ सुंदरेश एस. और मयंक कीर्तिभाई पटेल ने किया। प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में निर्णायक (जज) की भूमिका, खेल संचालन के नियम, तकनीकी प्रक्रियाएं और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों की बारीकियां सिखाई गईं। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने इस आवासीय कार्यक्रम के लिए आवास, भोजन और परिवहन सहित सभी उत्कृष्ट व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई थीं।
भविष्य के लिए तैयार हो रहा है मजबूत तंत्र महानिदेशक ने विश्वास जताया कि इस विशेष प्रमाण-पत्र प्रशिक्षण से बिहार के तकनीकी अधिकारियों की कार्यकुशलता और दक्षता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में तैराकी प्रतियोगिताओं के संचालन के लिए एक बेहद सशक्त और प्रशिक्षित तकनीकी तंत्र विकसित होगा।

