झारखंड-बिहार की जानी-मानी कंपनी मेसर्स रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी 10 से अधिक कंपनियों के खिलाफ आयकर विभाग ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई शुरू की।
.
टैक्स चोरी, अघोषित आय और बेनामी संपत्तियों की पुख्ता सूचना के आधार पर विभाग की टीमों ने झारखंड, बिहार और हरियाणा (गुरुग्राम) के पांच ठिकानों पर लगभग 20 घंटे से रेड जारी है।
कभी सीमित संसाधनों के दम पर ठेकेदारी शुरू करने वाले रामकृपाल सिंह की कंपनी आज सलाना 5000 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाली कंपनी बन गई है।
कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत सड़क और हाईवे, पुल-पुलिया, स्टेडियम, बड़े आवासीय कॉम्प्लेक्स और माइनिंग प्रोजेक्ट्स पर काम करती है।
बेगूसराय के रहने वाले रामकृपाल सिंह ने कैसे शुरू की थी कंपनी, इनके निधन के बाद कंपनी को कौन चला रहा, कंपनी पर पहले कब हुई थी छापेमारी, पढ़ें रिपोर्ट….
पहले देखें छापेमारी की कुछ तस्वीरें…

बेगूसराय स्थित राम कृपाल सिंह का आवास, जहां आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की।

आवास के अंदर बाहर कड़ी नजर रखी गई।
1970 में राम कृपाल ने ठेकेदारी शुरू की थी
ग्रामीण राम विनय बताते हैं कि 1937 में बेगूसराय जिले के गंगा किनारे बसे रामदीरी रामनगर में रामकृपाल साधारण परिवार में जन्म लिए थे। न कोई पुश्तैनी संपत्ति और न व्यवसायिक विरासत। परिवार में ठेकेदारी का भी नामो निशान नहीं था।
1970 के दशक की शुरुआत में जब बिहार में बुनियादी ढांचे का विकास बेहद सीमित था और निर्माण क्षेत्र पर कुछ गिने-चुने बड़े ठेकेदारों का वर्चस्व हुआ करता था, तब रामकृपाल सिंह ने इस क्षेत्र में कदम रखा।
1973 में उन्होंने एक छोटी प्रोपराइटरशिप फर्म के रूप में ठेकेदारी का काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में पूंजी का भारी अभाव था। मशीनरी, उपकरण और तकनीकी संसाधन जुटाना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।
3 दशक तक छोटे-बड़े ठेकों के बाद बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड में बदला
ग्रामीण राम विनय के अनुसार कई बार वित्तीय संकट और काम न मिलने के कारण रामकृपाल परेशान हो चुके थे। स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ अच्छी थी, लिहाजा धंधा उनका बढ़ता गया। इनके 2 बेटे सुधीर कुमार सिंह और रंजन कुमार हैं। दोनों को बाहर उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया। जब इनकी पढ़ाई पूरी हुई तो इन्होंने भी पिता का काम संभाल लिया।
रामकृपाल तीन दशक तक छोटे-बड़े सरकारी-निजी ठेकों में अपनी साख मजबूत करते रहे। इसके बाद रामकृपाल सिंह ने 13 अक्टूबर 2003 को फर्म को रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (RKSCPL) के रूप में रजिस्टर करवाया। देखते ही देखते कंपनी Engineering और Construction क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने लगी।

राम कृपाल सिंह के आवास पर आयकर विभाग की टीम 8 गाड़ियों से पहुंची थी।
पिता के निधन के बाद बेटे कंपनी के डायरेक्टर हैं
करीबी बताते हैं कि रामकृपाल का 2025 में निधन हो गया। जिसके बाद बेटे सुधीर कुमार और रंजन कुमार वर्तमान में RKSCPL के प्रमुख निदेशक (Directors) के रूप में व्यवसाय संभाल रहे हैं।
कंपनी में 4 हजार कर्मचारी काम करते हैं
रजिस्टर्ड ऑफिस बेगूसराय के श्रीकृष्ण नगर में है। प्रमुख कॉर्पोरेट का संचालन रांची से होता है। इसके साथ ही नई दिल्ली के कनॉट प्लेस, गुरुग्राम के डीएलएफ फेज- 3 और अगरतला (त्रिपुरा) में भी कार्यालय है। कंपनी में करीब 4000 कर्मचारी कार्यरत हैं।
रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों में कई ऐतिहासिक और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टस का निर्माण किया।

अब सिलसिलेवार पढ़िए RKSCPL के बड़े कानूनी विवाद…
कंपनी का कर्मचारी 6 लाख रुपयों के साथ धराया था
RKSCPL की सफलता की रफ्तार जितनी तेज रही, पिछले कुछ वर्षों में कंपनी उतने ही बड़े कानूनी विवादों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर भी आई। पुलिस सूत्रों के अनुसार 21 जनवरी 2018 को झारखंड के गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र से कंपनी के कर्मचारी मनोज कुमार को 6 लाख रुपए नकद और संदिग्ध दस्तावेजों के साथ पकड़ा गया।
जांच में सामने आया कि यह राशि माओवादियों के रीजनल कमेटी सदस्य कृष्णा हांसदा उर्फ अविनाश के लिए लेवी की थी। मनोज का काम ठेकेदारों और नक्सलियों के बीच समन्वय बनाना था।

रामकृपाल सिंह के आवास के अंदर जाती आयकर विभाग की टीम के सदस्य और पुलिसकर्मी।
कंपनी के महाप्रबंधक को रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया था
पुलिस सूत्रों के अनुसार 9 जुलाई 2018 को एनआईए (NIA) ने केस टेकओवर किया। जून 2020 में एनआईए ने रांची के कचहरी रोड स्थित कंपनी के कार्यालय पंचवटी प्लाजा पर छापेमारी की थी। इसके बाद 26 मार्च 2025 को सीबीआई ने NHAI पटना के क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक राम प्रीत पासवान को 15 लाख रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
यह रिश्वत RKSCPL के महाप्रबंधक सुरेश महापात्र दे रहे थे। सीबीआई ने सुरेश महापात्र समेत कंपनी के 2 अन्य कर्मचारियों वरुण कुमार और चेतन कुमार को भी गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान सीबीआई की टीम ने कुल 1.18 करोड़ रुपए नकद जब्त किए थे।
अब 2026 में कंपनी के ऑफिस पर आयकर विभाग की छापेमारी
अब 30 जुलाई को आयकर विभाग की टीम ने टैक्स चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के संदेह में बेगूसराय वाले ऑफिस, रांची कॉर्पोरेट ऑफिस समेत देश भर के कई ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की।
छापेमारी आयकर विभाग की डिप्टी डायरेक्टर नेहा सिंह के नेतृत्व में चल रही है। जिसमें पटना, झारखंड और बेगूसराय के आयकर अधिकारी शामिल हैं। टीम में पटना से एडिशनल डायरेक्टर अंगद कुमार, सुमनदेव, राज गौरव, बेगूसराय के राजकुमार भारती, सत्यव्रत और नीरज कुमार सहित अन्य अधिकारी हैं।

