![]()
कटिहार जिले का बरारी प्रखंड गंगा और कोसी नदियों के कहर से जूझ रहा है। प्रखंड की छह पंचायतों का अधिकांश क्षेत्र बाढ़ के पानी में डूब गया है। सड़कों से लेकर घरों तक पानी भर गया है, जिससे लोगों का आवागमन केवल नावों के सहारे हो रहा है। पिछले दो दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई है। दैनिक भास्कर रिपोर्टर रवि झा ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बरारी प्रखंड की सबसे प्रभावित मोहना चांदपुर पंचायत का दौरा किया। मोहना चांदपुर पंचायत के कुल 17 वार्डों में से 8 वार्ड (वार्ड 10 से 17) पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। घरों में पानी घुसने से लगभग 15,000 लोग प्रभावित हुए हैं। मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत पीने के चापाकल भी डूब गए हैं, जिससे शुद्ध पेयजल का संकट गहरा गया है। पंचायत समिति प्रतिनिधि गया राम ने बताया कि लगभग 15,000 की आबादी वाली यह पंचायत हर साल मध्य अगस्त से मध्य अक्टूबर तक करीब दो महीने बाढ़ से घिरी रहती है। उन्होंने बताया कि मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत हो गई है। गया राम ने यह भी बताया कि आजमपुर शंकरबांध और कुंडी धार के पास स्थित एच.के. उच्च विद्यालय जोतराम, समद प्राइमरी स्कूल और मध्य विद्यालय भवानीपुर के परिसरों में दो महीने तक पानी भरा रहने से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है। सांसद तारिक अनवर से स्थानीय लोग नाराज कुंडी घाट चौक के पास गैरेज संचालक मोहम्मद मासूम अंसारी ने बताया कि बाढ़ के साथ-साथ बिजली की समस्या ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, “24 घंटे में केवल 6 से 7 घंटे ही बिजली उपलब्ध रहती है। रात के अंधेरे में बिजली गुल होने पर बाढ़ के पानी में सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है, जिससे बच्चे और महिलाएं दहशत में रहते हैं।” सड़क किनारे स्थित कई घरों में पानी घुस चुका है। लगभग सभी चापाकल डूब जाने के कारण लोग पीने के शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सांसद तारिक अनवर को केवल चुनाव के समय ही उनकी याद आती है। विधायक ने 10 मिनट में कराई बिजली ठीक बाढ़ पीड़ितों में जनप्रतिनिधियों को लेकर भी आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने कहा, “सांसद तारिक अनवर हमारे पंचायत में पिछली बार हाल-चाल जानने कब आए थे, शायद याद नहीं। हां, जब चुनाव का वक्त आता है तो उन्हें हमारी याद आती है। लेकिन हमारे दुख-सुख में वह कभी नहीं पहुंचते। हां, गाहे-बगाहे उनके प्रतिनिधि झूठा आश्वासन देने कभी-कभार पहुंचते हैं।” वहीं लोगों ने स्थानीय बरारी विधायक विजय सिंह निषाद की सराहना की। स्थानीय युवा व्यवसायी जितेंद्र कुमार ने बताया, “एक तरफ बाढ़ की समस्या और दूसरी तरफ जल निकासी नहीं होने से जब पानी स्थिर हो जाता है तो महामारी जैसी स्थिति बन जाती है। छोटे-छोटे बच्चे बाढ़ के पानी में डुबकी लगा रहे हैं, डूबने का खतरा है। विधायक विजय सिंह निषाद हमारी समस्याओं को विधानसभा में उठाते रहते हैं। आज बिजली की समस्या को लेकर जैसे ही उनसे फोन पर बात कही, 10 मिनट बाद गांव में बिजली आ गई।” पानी में तैर कर महिलाएं जा रही मायके बाढ़ के बीच भी त्योहार की डोर नहीं टूटी। स्थानीय निवासी पुतुल देवी सहित अन्य महिलाएं पानी में किसी तरह तैर कर, कपड़े सिर पर रखकर अपने गांव से बाहर निकलकर रक्षाबंधन मनाने अपने मायके जा रही थीं। यह तस्वीर बरारी के दर्द और जज्बे दोनों को बयां करती है। सड़क किनारे झुग्गियों में रहने को मजबूर दर्जनों परिवार मो. मुस्ताक ने बताया कि दर्जनों परिवार अपना घर-बार छोड़कर बाल-बच्चों और पालतू मवेशियों के साथ कुंडी घाट पुल से कुंडी ढाला तक सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने को विवश हैं। “हर साल यही स्थिति से गुजरना पड़ता है।” लोग निजी छोटी नाव का सहारा लेकर 10-20 रुपये देकर प्रखंड मुख्यालय बाजार आ-जा रहे हैं। पंचायत समिति सदस्य नीलम देवी और गया राम ने विधायक विजय सिंह निषाद से बाढ़ के स्थायी समाधान, प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री और मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की है।
