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जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला पंचक में खरीद सकते हैं? कान्हा की तैयारी से पहले जान लें नियम

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Panchak Rules: जन्माष्टमी आने वाली है और घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारी शुरू हो चुकी है. कोई कान्हा की नई पोशाक खरीद रहा है तो कोई मुकुट, बांसुरी और झूला. लेकिन इस बार खरीदारी के बीच पंचक ने लोगों को उलझन में डाल दिया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंचक के दौरान जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला खरीदा जा सकता है?

पंचांग के अनुसार मौजूदा पंचक 27 अगस्त 2026 की दोपहर से शुरू हुआ है और 1 सितंबर की तड़के समाप्त होगा. वहीं जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. इसलिए झूला खरीदने के लिए पंचक समाप्त होने के बाद भी पर्याप्त समय मिलेगा. फिर भी अगर झूला पहले बुक कर दिया है या पंचक में उसकी डिलीवरी आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है.

पंचक में लकड़ी खरीदने की मनाही क्यों?

पंचक उस अवधि को कहा जाता है, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम भाग से गुजरते हुए शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है. यह समय लगभग पांच दिन का होता है.

लोक परंपराओं और मुहूर्त संबंधी मान्यताओं में पंचक के दौरान लकड़ी, घास, उपले और दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं का बड़ा भंडार जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है. घर की छत डलवाना, चारपाई बुनना या नया पलंग तैयार करवाना भी इस अवधि में उचित नहीं माना जाता.

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लेकिन यहीं एक जरूरी अंतर समझना होगा. यह मनाही मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में लकड़ी जमा करने, निर्माण शुरू करने और सोने के लिए नई शय्या तैयार करने से जुड़ी है. भगवान की पूजा के लिए खरीदा जाने वाला छोटा लकड़ी का झूला न तो ईंधन का भंडार है और न ही मनुष्य के सोने के लिए तैयार की गई शय्या.

क्या कान्हा का झूला खरीद सकते हैं?

धार्मिक उपयोग के लिए लाया गया छोटा झूला सामान्य फर्नीचर से अलग माना जा सकता है. इसलिए यदि किसी कारण से जन्माष्टमी का झूला पंचक में खरीदना जरूरी हो तो इसे बड़ा दोष मानकर डरने की आवश्यकता नहीं है.

फिर भी परिवार की परंपरा में पंचक के दौरान लकड़ी की कोई वस्तु न खरीदने का नियम माना जाता है तो 1 सितंबर की सुबह के बाद खरीदारी करना बेहतर रहेगा. इससे मन में कोई संदेह भी नहीं रहेगा और जन्माष्टमी की तैयारी के लिए समय भी मिल जाएगा.

ध्यान रहे, श्रद्धा से की जाने वाली पूजा में भय की जगह नहीं होनी चाहिए. केवल सोशल मीडिया पर चल रही “पंचक में लकड़ी आई तो पांच संकट आएंगे” जैसी बातों को शास्त्र का अंतिम निर्णय नहीं मानना चाहिए.

पहले ऑर्डर किया था, डिलीवरी अब आई तो क्या करें?

आज अधिकतर लोग पूजा का सामान ऑनलाइन खरीदते हैं. हो सकता है कि झूला पंचक शुरू होने से पहले ऑर्डर और भुगतान किया गया हो, लेकिन उसकी डिलीवरी पंचक के बीच हो. ऐसी स्थिति में पार्सल लेने से मना करना जरूरी नहीं है.

आप झूले को घर में सुरक्षित रख सकते हैं. यदि मन में संकोच हो तो पंचक समाप्त होने तक उसे पैक ही रहने दें. 1 सितंबर को स्नान के बाद पूजा स्थान साफ करें. फिर झूले को गंगाजल से शुद्ध करके उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और लड्डू गोपाल को विराजमान करें.

झूला पहले से घर में मौजूद है और केवल उसकी सफाई या सजावट करनी है तो इसे नई लकड़ी खरीदने या नया निर्माण शुरू करने जैसा नहीं माना जाएगा. पुराने झूले को साफ करना, कपड़ा बदलना, फूल लगाना या उसकी मामूली मरम्मत कराना सामान्य तैयारी है.

बढ़ई से नया झूला बनवाना हो तो क्या करें?

तैयार झूला खरीदने और कच्ची लकड़ी मंगाकर नया झूला बनवाने में अंतर है. यदि बढ़ई से बिल्कुल नया झूला बनवाना है और काम टाला जा सकता है तो पंचक समाप्त होने के बाद शुरू करवाना बेहतर होगा. यदि काम पहले ही शुरू हो चुका है तो उसे बीच में रुकवाने की जरूरत नहीं है. पंचक में नया आरंभ करने और पहले से चल रहे काम को पूरा करने के नियम अलग माने जाते हैं.

प्लास्टिक या धातु के झूले पर भी लागू होगा नियम?

लकड़ी इकट्ठा करने वाली परंपरागत मनाही धातु, चांदी, पीतल या प्लास्टिक के छोटे पूजन-झूले पर सीधे लागू नहीं होती. फिर भी झूला खरीदते समय केवल सुंदरता न देखें. उसका आकार लड्डू गोपाल के विग्रह के अनुसार हो, किनारे नुकीले न हों और वह हिलाते समय असंतुलित न हो.

अंतिम बात साफ है. पंचक में जन्माष्टमी के लिए छोटा लकड़ी का झूला खरीदना कोई ऐसा अपराध नहीं है जिससे पूजा निष्फल हो जाए. समय उपलब्ध हो तो पंचक समाप्त होने के बाद खरीदें. पहले से मंगाया झूला आ जाए तो उसे रख लें और बाद में शुद्ध करके इस्तेमाल करें. कान्हा के जन्मोत्सव में सबसे महत्वपूर्ण महंगा झूला नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वच्छता और सेवा का भाव है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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