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जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषाहार का बजट पिछले आठ वर्षों से पुराने दर पर ही अटका हुआ है। जबकि पुरानी दरों और अब की वास्तविक बाजार कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर होने के कारण केंद्रों में बच्चों को निर्धारित मात्रा में पौष्टिक आहार देना असंभव हो गया है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को मिलने वाले आवश्यक प्रोटीन और कैलोरी की मात्रा पर पड़ रहा है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि वर्ष 2018-19 के आस-पास तय की गई विभागीय दरों पर 2026 में राशन खरीदना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वर्तमान में गुमला जिले के 1696 आंगनबाड़ी केंद्रों में 37774 बच्चे नामांकित हैं। सेविकाओं का कहना है कि जब एक किलो सूजी या तेल खरीदने के लिए बाजार में दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है, तो विभाग से मिलने वाली सीमित राशि में पूरे बच्चों के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन कैसे तैयार किया जाए। नतीजा यह हो रहा है कि या तो सेविकाएं अपनी जेब से पैसे लगा रही हैं या फिर न चाहते हुए भी बच्चों की थाली में भोजन की मात्रा को कम करना पड़ रहा है। {आंगनबाड़ी केंद्रों में खाद्य सामग्री का भुगतान सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार ही किया जाता है। बाजार मूल्य के आधार पर भुगतान करने का फिलहाल कोई प्रावधान नहीं है। डीएसडब्लूओ, आरती कुमारी आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्रतिदिन 12 से 15 ग्राम प्रोटीन और 500 कैलोरी युक्त ऊर्जा देने का नियम है। इसके लिए साप्ताहिक मेनू के तहत बच्चों को खिचड़ी, सूजी का हलवा, गुड़-चना और मूंगफली आदि निर्धारित ग्राम में परोसा जाना है। लेकिन महंगाई के कारण इसे जारी रखना मुश्किल हो रहा है। खाद्य सामग्री तय मूल्य प्रति किलो बाजार का वर्तमान दर आगनबाड़ी के पोषाहार की दरों में वृद्धि को लेकर विभागीय स्तर पर समीक्षा और दरों के पुनर्निर्धारण की प्रकिया चल रही है। हालांकि अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही नई दरें लागू की जाएगी। सूजी 25 56 चीनी 39 66 अरहर दाल 89 125 सरसो तेल 100 182 घी 400- 800 1000 आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार व महिला बाल विकास विभाग से मांग की है कि मौजूदा बाजार मूल्य को देखते हुए पोषाहार के बजट में संशोधन किया जाए। यदि समय रहते आवंटन की दरें नहीं बढ़ाई गईं, तो नौनिहालों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना पूरी तरह ठप हो जाएगा। जिसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ेगा।
गुमला के आंगनबाड़ी केंद्रों में 2018 की दर से मिल रही पोषाहार की रािश
