
TMC Symbol Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा की 2 सीटों पर हो रहे उपचुनाव में इस बार तृणमूल कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं होगा. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और चुनाव चिह्न (सिंबल) को फ्रीज कर दिया है. खबर बढ़ायी जा रही है.
निर्वाचन सदन में सुनवाई के बाद 14 पेज का अंतरिम आदेश
अंतिम आदेश से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी वर्चस्व की जंग पर बृहस्पतिवार (17 सितंबर 2026) को नयी दिल्ली में सुनवाई की. निर्वाचन सदन में करीब डेढ़ घंटे तक दोनों गुटों की दलीलें सुनने के बाद इलेक्शन कमीशन ने 14 पन्ने का अंतरिम आदेश जारी किया.
‘जिसके टिकट पर जीते, उसी पार्टी के अस्तित्व पर सवाल?’
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी गुट के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी गुट (रीतब्रत बनर्जी गुट) के दावों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उनके तर्कों को काटने की कोशिश की. कल्याण बनर्जी ने कहा कि जो बागी विधायक 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी द्वारा दिये गये पार्टी सिंबल पर जीतकर आये हैं, वे अचानक वर्ष 2025 में पार्टी के खत्म होने का दावा कैसे कर सकते हैं?
2025 में तृणमूल खत्म हो गयी, तो 2026 में किस सिंबल पर चुनाव जीते : कल्याण
कल्याण बनर्जी ने बाद में मीडिया से कहा कि बागी गुट चुनाव आयोग में दावा कर रहा है कि तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2025 में ही समाप्त हो गयी थी. अगर ऐसा है, तो 2026 के विधानसभा चुनाव में वे किस सिंबल पर चुनाव जीतकर आये? वह सिंबल खुद ममता बनर्जी ने जारी किया था. 3 जून तक उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के सामने खुद को AITC का विधायी ब्लॉक बताया. 3 जून तक पार्टी का अस्तित्व स्वीकार करने के बाद 22 जून 2026 को अचानक वे कहने लगे कि AITC बची ही नहीं है. आप एक ही चीज को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार और अस्वीकार नहीं कर सकते.
रीतब्रत की नेता प्रतिपक्ष न बनने की कसक : कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी ने कहा कि इस पूरे विवाद के पीछे बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में टीएमसी में शामिल हुए रीतब्रत बनर्जी केवल इसलिए यह सब कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पार्टी का मूल संस्थापक या पुराना कार्यकर्ता नहीं है, वह आज पूरी तृणमूल कांग्रेस को हड़पने का खेल खेल रहा है.
भाजपा ने कसा तंज : लड़ाई सिंबल की नहीं, बैंक खातों के कब्जे की है
पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा- भारत में अब ‘तृणमूल’ नाम की कोई पार्टी नहीं बची है. यह लड़ाई पार्टी के चुनाव चिह्न की है ही नहीं. पार्टी के दर्जनों बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपए पर कब्जा जमाने की यह जंग है. उन्होंने कहा कि यह पश्चिम बंगाल का दुर्भाग्य है कि राज्य में कोई ठोस विपक्ष नहीं बचा.
क्या है तृणमूल का अंदरूनी विवाद?
- अप्रैल 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस हार गयी.
- पार्टी के 80 में से लगभग 60 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से दूरी बना ली.
- बागी हुए 60 विधायकों का नेतृत्व रीतब्रत बनर्जी कर रहे हैं.
- रीतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी दोनों खुद को असली टीएमसी घोषित करने की मांग कर रहे हैं.
The post TMC का नाम-सिंबल फ्रीज, ममता-रीतब्रत गुट को चुनना होगा पार्टी का नया नाम और चुनाव चिह्न, EC ने मांगे 3 ऑप्शन appeared first on Prabhat Khabar.
