Wednesday, September 23, 2026

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गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना:जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र दो साल में नहीं बनवाया तो कोर्ट से लेनी होगी अनुमति, 1 अक्टूबर से लागू होगी व्यवस्था


जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में अब लापरवाही भारी पड़ेगी। भारत सरकार के महारजिस्ट्रार के नए नियमों के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु के दो साल के भीतर प्रमाणपत्र नहीं बनवाया गया, तो इसके लिए कोर्ट की अनुमति अनिवार्य होगी। गृह मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। पूरे देश में यह व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू होगी। हालांकि, दो साल पुराने मामलों में किस स्तर के न्यायिक पदाधिकारी मंजूरी देंगे और क्या दस्तावेज लगेंगे, यह राज्य सरकार द्वारा एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी होने के बाद तय होगा। दो साल तक के मामलों की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अभी क्या है व्यवस्था?
30 दिन के अंदर: अस्पताल के कागजात के आधार पर नगर निगम या ग्राम पंचायत से सीधे प्रमाणपत्र मिल जाता है।
30 दिन से 1 वर्ष तक: नगर निगम/पंचायत में आवेदन के बाद शहरी क्षेत्र में सांख्यिकी विभाग और ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ की मंजूरी से जारी होता है।
1 से 2 वर्ष के बीच: नोटरी हलफनामा, स्थानीय जनप्रतिनिधि की संस्तुति और पड़ोसियों की गवाही के बाद कार्यपालक दंडाधिकारी (एसडीओ कोर्ट) के आदेश पर बनता है। हलफनामे के खेल व फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
अब तक लोग वर्षों बाद भी नोटरी शपथ पत्र देकर आसानी से बैकडेट या देर से प्रमाणपत्र बनवा लेते थे, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका रहती थी। नई व्यवस्था के तहत कोर्ट की जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। जन्म या मृत्यु की स्थिति में समय रहते प्रमाणपत्र बनवा लें। दो साल बीतने पर कोर्ट की अनुमति के बिना निगम या पंचायत से प्रमाणपत्र नहीं बन सकेगा। राज्य सरकार जल्द ही इसकी विस्तृत एसओपी जारी करेगी।” -राजीव कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी

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