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सीआईडी ने कोर्ट में खोला एजेंट का कच्चा चिट्ठा
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे है। सीआईडी ने कोर्ट में जो केस डायरी और साक्ष्य पेश किए हैं, उससे साफ हो गया है कि यह मामला कुछ अभ्यर्थियों द्वारा की गई नकल का नहीं है। इसके पीछे कई राज्यों और नेपाल तक फैला संगठित और पेशेवर सिंडिकेट काम कर रहा था। सीआईडी ने इस सिंडिकेट के दो प्रमुख एजेंट संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव के बारे में भी कोर्ट को अहम जानकारी दी है। केस डायरी के मुताबिक संदीप और राजेश खुद को एलआईसी एजेंट बताते थे, लेकिन पर्दे के पीछे वे प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को फांसने वाले एजेंट का काम कर रहे थे। एक ब्लैंक चेक और 18.30 लाख के दो बियरर चेक मिले थे जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि संदीप ने किशोर के साथ मिलकर दोनों अभ्यर्थियों को सेट किया। उन्हें निर्धारित स्थान पर ले जाकर रटने के लिए लीक पेपर दिए गए। इनके पास से धर्मराज के हस्ताक्षर वाला एक ब्लैंक चेक मिला। वहीं राजेश प्रसाद यादव के नाम पर 9.90 लाख और नौखिलाल दास के नाम पर 8.40 लाख रुपए के दो बियरर चेक भी मिले थे। जांच में यह भी पता चला है कि संदीप ने सफल अभ्यर्थियों, उनके रिश्तेदारों और परीक्षा नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ वित्तीय लेनदेन किए थे। राजेश ने सेटिंग कराने वालों से अभ्यर्थियों का संपर्क कराया, मोटी रकम वसूली सीआईडी के अनुसार राजेश प्रसाद यादव पेपर लीक नेटवर्क में बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था। उसने सेटिंग कराने वालों से अभ्यर्थियों का संपर्क कराया। धर्मराज और राकेश को नेटवर्क से जोड़ने में उसकी भी भूमिका था। इसके बदले अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई। जांच एजेंसी ने लेनदेन से जुड़े कई साक्ष्य बरामद किए हैं। सिंडिकेट ने उत्तर रटवाने के लिए नेपाल से बोकारो तक बनाए थे पांच ठिकाने जांच एजेंसी ने बताया कि सिंडिकेट ने उत्तर रटवाने के लिए पांच ठिकाने बना रखे थे। अभ्यर्थियों को नेपाल के बीरगंज में इकट्ठा कर पेपर रटवाया। दुर्गापुर के सितुलपुर भी एक ठिकाना था। बंगाल के आसनसोल के नियामतपुर में भी अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाए गए। बोकारो का दुग्धा और पटना भी सवाल-जवाब रटवाने का ठिकाना था।
पेपर लीक का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन:सीजीएल : एलआईसी एजेंट बनकर घूम रहे थे संदीप और राजेश, पर्दे के पीछे चला रहे थे पेपर लीक का सिंडिकेट
