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धनबाद में वन्यजीव अंगों की तस्करी का खुलासा, 3 गिरफ्तार:40 लाख के नाखून-दांत और खाल जब्त, तंत्र-मंत्र के नाम पर करते से सप्लाई


धनबाद में वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों की तस्करी का खुलासा किया है। मेमको मोड़ स्थित एक निजी होटल में छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 35 प्रतिबंधित आर्टिकल जब्त किए गए, जिनकी कीमत 35 से 40 लाख रुपए बताई जा रही है। इनमें तेंदुए के नाखून, दांत, रीढ़ की हड्डी और खाल शामिल हैं। पेंगोलिन से संबंधित सामग्री होने की भी आशंका है। वन विभाग की टीम ने करीब सात दिनों तक संदिग्धों पर नजर रखी। ग्राहक बनकर होटल पहुंची टीम ने सबूतों के साथ तीनों आरोपियों को पकड़ा। तंत्र-मंत्र के लिए इन अंगों की सप्लाई करने की आशंका है। फिलहाल, वन विभाग पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झरिया निवासी मोहम्मद शाहबाज खान, बरवाअड्डा निवासी वसीम असगर खान और भूली निवासी शहजादा खुर्रम के रूप में हुई है। वन विभाग के मुताबिक, मौके से कुल 35 संदिग्ध प्रतिबंधित आर्टिकल जब्त किए गए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 35 से 40 लाख रुपये बताई जा रही है। बरामद सामग्री में तेंदुए के नाखून, दांत, रीढ़ की हड्डी और खाल से संबंधित आर्टिकल होने की बात कही गई है। हालांकि, सामग्री की वास्तविक पहचान और उसके स्रोत की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में पेंगोलिन से जुड़े आर्टिकल होने की आशंका की भी जांच की जा रही है। किन्हें बेचने की थी तैयारी, पुलिस कर रही जांच
वन विभाग ने आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किया हैं। अब इन मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वन्यजीवों से जुड़े ये आर्टिकल कहां से लाए जाते थे और इन्हें किन लोगों को बेचा जाना था। विभाग संभावित बड़े तस्करी नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की आशंका को भी ध्यान में रखकर जांच कर रहा है। वन विभाग के अनुसार, आरोपियों को जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है और आगे कोर्ट से रिमांड लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि इस कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके। वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल के मुताबिक, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर ऐसे वन्यजीव आर्टिकल की मांग बढ़ने की आशंका रहती है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के अंधविश्वास में न पड़ें और वन्यजीवों के अंगों की खरीद-बिक्री से दूर रहें। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें। फिलहाल, इस मामले में फॉरेंसिक जांच और पूछताछ के बाद ही वन्यजीव तस्करी के पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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