Thursday, June 25, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

नीतीश कुमार चुने गए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष:5 दिन पहले किया था नॉमिनेशन, दोपहर 2.30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर जारी करेंगे प्रमाण पत्र


नीतीश कुमार चौथी बार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। सुबह 11 बजे नाम वापसी का समय खत्म हो गया। नीतीश अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुने गए। 2.30 बजे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के सीनियर नेता मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 19 मार्च को जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। नामांकन शाम में नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय, जंतर मंतर रोड पर हुआ था। नीतीश कुमार की ओर से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने नामांकन पार्टी नेता और चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अनिल हेगड़े को सौंपा था। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। उनके बेटे निशांत भी राजनीति में एंट्री ले चुके हैं। जानिए कि आखिर क्यों नीतीश पार्टी की कमान खुद संभाले रखना चाहते हैं। जदयू की रणनीति क्या है। आखिर क्यों नीतीश बिना पार्टी फेसलेस है? पार्टी की मजबूरी क्या है…। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चौथा कार्यकाल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में यह नीतीश कुमार का चौथा कार्यकाल होगा। इससे पहले उन्होंने 2016 में शरद यादव की जगह पार्टी की कमान संभाली थी। इसके बाद 2019 में भी वे निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। 2020 में उन्होंने अपनी जगह आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बनाया था। बाद में उन्होंने ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। साल 2023 में जब ललन सिंह ने पद से इस्तीफा दिया, तो एक बार फिर नीतीश खुद इस पद पर लौटे और तब से अब तक अध्यक्ष बने हुए हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला जदयू की राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पटना में होना है। बैठक को लेकर तैयारी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, यह बैठक 29 मार्च को पटना में होगी। इस बैठक में देशभर से पार्टी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस बैठक में संगठनात्मक फैसलों पर विस्तार से चर्चा होगी। नीतीश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने के पीछे क्या है वजह, इन 5 प्वाइंट में समझिए 1. जदयू में बड़े और प्रभावशाली चेहरे की कमी जदयू के अंदर कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो पार्टी को बड़ी पहचान दिला सके। मजबूती से पार्टी को आगे बढ़ा सके। जर्नलिस्ट प्रवीण बागी की मानें तो नीतीश कुमार ने पार्टी के अंदर अपने से बड़ा चेहरा पनपने ही नहीं दिया। इसी वजह से नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। हालांकि, नीतीश के बड़ा चेहरा होने का फायदा जदयू को मिलता रहा है। 2. नीतीश कुमार को है कुर्सी प्रेम नीतीश कुमार कुर्सी के प्रेमी कहे जाते हैं। माना जाता है कि वह बिना कुर्सी के नहीं रह सकते हैं। प्रवीण बागी कहते हैं कि नीतीश कुमार को कुर्सी से लस्ट है। वह सीएम पद से हटने जा रहे हैं। ऐसे में यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नहीं रहेंगे तो उन्हें बड़ा झटका लगेगा। पार्टी के नेता चाहते है कि वह विद्रोह नहीं करें। लिहाजा,उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा रही है। प्रवीण बागी आगे कहते हैं कि वह मानसिक तौर पर सबल नहीं है। बिना कार्यकारी अध्यक्ष वह पार्टी नहीं चला पाएंगे। 3. पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण और एकजुटता जदयू के मौजूदा स्थिति में पार्टी के भीतर हलचल है। पार्टी के भीतर गुटबाजी और विद्रोह की खबरें है। नीतीश कुमार के नाम पर पार्टी को बिखरने से बचाया जा सकता है। लिहाजा नीतीश को आगे कर सभी विधायकों और नेताओं को एकजुट रखने का प्रयास किया जा रहा है। 4. राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विस्तार नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाकर जेडीयू उन्हें एक राष्ट्रीय चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है। उनका लक्ष्य बिहार के बाहर भी अन्य राज्यों में पार्टी के आधार को मजबूत करना और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को प्रभावी बनाना है। 5. नीतीश का चेहरा, बीजेपी की चाहत जदयू में भारतीय जनता पार्टी की भी चल रही है। इसके पीछे वोट बैंक की कहानी है। राजनीतिक विश्लेषक कुमार प्रबोध कहते है कि बिहार में नीतीश के साथ 15 फीसदी एकमुश्त वोट जुड़ा है। नीतीश के चेहरे पर यह वोट हर हाल में जदयू के साथ जाता रहा है। अब भाजपा नहीं चाहती है कि यह इस वोट बैंक में बिखराव हो। नीतीश के चेहरा नहीं होने पर वोट बैंक का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय जनता दल की ओर शिफ्ट कर जाएगा। इसलिए भाजपा चाहती है कि जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश ही बने रहें। सीएम की कुर्सी तो छोड़ रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं होने की स्थिति में जदयू-भाजपा गठबंधन को दोहरी मार पड़ जाएगी। नीतीश कुमार के दलीय स्तर पर बड़े फैसले 1.संजय झा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया नीतीश साल 2024 में राज्यसभा सांसद और अपने करीबी संजय कुमार झा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंकाया। दरसअल, नीतीश ने यह फैसला मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने के लिए लिया था। 2. नई राष्ट्रीय टीम का गठन किया
साल 2024 में अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद नीतीश ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ा फेरबदल किया। पदाधिकारियों की संख्या सीमित की। राष्ट्रीय महासचिवों की संख्या 22 से घटाकर 11 कर दी, ताकि संगठन को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाया जा सके। 3. नई टीम के जरिए जातीय संतुलन सोशल इंजीनियरिंग के माहिर खिलाड़ी रहे नीतीश ने तब नई टीम में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अल्पसंख्यकों को विशेष प्रतिनिधित्व दिया था। पार्टी के कोर वोट बैंक को मजबूत किया जा सके। 4. अनुशासनात्मक कार्रवाई नीतीश कुमार कार्रवाई करने से चुकते नहीं हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर गुटबाजी रोकने के लिए कड़े रुख अपनाए हैं। मार्च 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण कुछ सदस्यों की सदस्यता रद्द करने जैसे कठोर कदम भी उठाए गए हैं। 5. पुराने और वफ़ादार को साथ रखना नीतीश पुराने साथियों को साथ रखते रहे हैं। नाराज पुराने साथी को हर हाल में जोड़कर रखते आए हैं। पार्टी के वफ़ादार को अपने आस-पास रखते हैं। उन्हें पार्टी के अंदर महत्वपूर्ण दायित्व सौंपते हैं।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles