
मुख्य बातें
Chandranath Rath: कोलकाता/नंदीग्राम: महज आठ साल पहले चंद्रनाथ अपनी सेना की नौकरी छोड़कर शुभेंदु अधिकारी के सहायक बने थे. आज की तारीख में चंद्रनाथ उन लोगों में से एक थे जिसे शुभेंदु की परछाई कहा जा सकता है. शुभेंदु की फाइलें ले जाना, शुभेंदु की सभाओं और जुलूसों की योजना बनाना हो, चंद्रनाथ ने यह सब किया था. बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण में महज 48 घंटे शेष थे, तभी चंद्रनाथ का शरीर गोलियों से छलनी हो गया. बुधवार को चंद्रनाथ की जिस तरह से हत्या हुई, उससे स्पष्ट है कि कोई व्यक्ति या कोई चीज लंबे समय से रेकी का अभ्यास कर रही थी. अस्पताल ले जाने के बाद भी चंद्रनाथ को बचाया नहीं जा सका.
शुभेंदु के साथ 8 साल का रिश्ता
यह सर्वविदित है कि शुभेंदु का चंद्रनाथ से पिछले 8 वर्षों से संबंध था. चंद्रनाथ रथ वायुसेना के पूर्व अधिकारी थे. उनका घर पूर्वी मेदिनीपुर के पुलुप क्षेत्र के ईश्वरपुर 5 ग्राम पंचायत में है. शुभेंदु अधिकारी के तृणमूल में रहने के समय से ही दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध थे. तब से चंद्रनाथ उनके विशेष विश्वासपात्र थे. चंद्रनाथ का मुख्य कार्य राजनीतिक गतिविधियों की निगरानी करना था. 26 के चुनाव के दौरान चंद्रनाथ नंदीग्राम गए थे. इसके अलावा, शुभेंदु के विपक्ष के नेता बनने के बाद, उन्होंने कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी के सभी कार्यों की देखरेख भी की. उनकी माता चंद्रनाथ के परिवार के साथ चांदीपुर स्थित उनके घर में रहती हैं.
पर्दे के पीछे की एक अनकही कहानी
चंद्रनाथ रथ का जन्म पूर्वी मेदिनीपुर के चांदीपुर में हुआ था. वे बचपन से ही एक मेधावी छात्र के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने 2000 में उत्तर 24 परगना के प्रसिद्ध राहरा रामकृष्ण मिशन से माध्यमिक विद्यालय की पढ़ाई विशिष्टता के साथ उत्तीर्ण की. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में भारतीय वायु सेना में भर्ती हुए. कई वर्षों तक सेवा करने के बाद वे वायु सेना से सेवानिवृत्त हो गए. वायुसेना से लौटने के बाद चंद्रनाथ रथ ने राजनीति में कदम रखा. उनका परिवार पहले से ही राजनीति से प्रभावित था. उनकी माता ने बड़ी कठिनाई और संघर्ष से उनका पालन-पोषण किया. चंद्रनाथ की माता चांदीपुर पंचायत समिति की सदस्य थीं. उन्हीं के माध्यम से चंद्रनाथ में राजनीतिक जागरूकता आई.
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चंद्रनाथ ही संभालते थे शुभेंदु का सारा काम
शुभेंदु अधिकारी के साथ उनका लंबे समय से संबंध था. उनके करीबी लोगों के अनुसार, यह संबंध अटूट भरोसे पर आधारित था. जब शुभेंदु अधिकारी 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हुए, तो चंद्रनाथ उनके मुख्य सहयोगी थे. भवानीपुर उपचुनाव से लेकर नंदीग्राम चुनाव तक, शुभेंदु के दैनिक कार्यक्रम, बैठकों और राजनीतिक रणनीति को तय करने में उनकी भूमिका पर्दे के पीछे के एक कुशल कारीगर जैसी थी. 26वें चुनाव के दौरान, वे नंदीग्राम में मौजूद थे. उन्होंने भवानीपुर में शुभेंदु के चुनाव प्रचार की रणनीति भी संभाली थी.
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