सीतामढ़ी जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) जैसी गंभीर बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति, सीतामढ़ी के सभागार में आयुष चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को एईएस और जेई की समय पर पहचान, त्वरित उपचार और प्रभावी रेफरल प्रणाली के प्रति जागरूक करना था। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर.के. यादव ने दृश्य-श्रव्य माध्यम से प्रशिक्षण का संचालन किया। उन्होंने बताया कि एईएस मस्तिष्क में सूजन पैदा करने वाली गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी और दौरे शामिल हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक वायरल संक्रमण है, जो बच्चों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकता है। रेफरल और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया डॉ. यादव ने एईएस/जेई मामलों में “गोल्डन ऑवर” के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखने पर यदि मरीज को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाए और इलाज शुरू हो जाए, तो मृत्यु और स्थायी विकलांगता के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकों को संदिग्ध मामलों की तत्काल पहचान कर रेफरल और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण में केस मैनेजमेंट, मच्छर नियंत्रण, टीकाकरण, स्क्रीनिंग, रेफरल प्रोटोकॉल, निगरानी व्यवस्था और सामुदायिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी और कर्मी भी उपस्थित रहे। तत्काल इलाज कराने की सलाह देने का आग्रह किया सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने एईएस और जेई की रोकथाम में चिकित्सकों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिकित्सकों से ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक करने और बच्चों में बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखने पर तत्काल इलाज कराने की सलाह देने का आग्रह किया।
AES-JE को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट:सीतामढ़ी में आयुर्वेदिक डॉक्टर्स को दिया गया स्पेशल ट्रेनिंग
सीतामढ़ी जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) जैसी गंभीर बीमारियों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति, सीतामढ़ी के सभागार में आयुष चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को एईएस और जेई की समय पर पहचान, त्वरित उपचार और प्रभावी रेफरल प्रणाली के प्रति जागरूक करना था। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर.के. यादव ने दृश्य-श्रव्य माध्यम से प्रशिक्षण का संचालन किया। उन्होंने बताया कि एईएस मस्तिष्क में सूजन पैदा करने वाली गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी और दौरे शामिल हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक वायरल संक्रमण है, जो बच्चों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकता है। रेफरल और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया डॉ. यादव ने एईएस/जेई मामलों में “गोल्डन ऑवर” के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखने पर यदि मरीज को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाए और इलाज शुरू हो जाए, तो मृत्यु और स्थायी विकलांगता के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकों को संदिग्ध मामलों की तत्काल पहचान कर रेफरल और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण में केस मैनेजमेंट, मच्छर नियंत्रण, टीकाकरण, स्क्रीनिंग, रेफरल प्रोटोकॉल, निगरानी व्यवस्था और सामुदायिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी और कर्मी भी उपस्थित रहे। तत्काल इलाज कराने की सलाह देने का आग्रह किया सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने एईएस और जेई की रोकथाम में चिकित्सकों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिकित्सकों से ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक करने और बच्चों में बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखने पर तत्काल इलाज कराने की सलाह देने का आग्रह किया।

