रांची सहित राज्यभर में 10 जून से नदियों से बालू निकालने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक लग जाएगी। इससे पहले राज्य सरकार ने बालू की संभावित किल्लत को दूर करने की कवायद तेज कर दी है। नदियों से बालू उत्खनन और निकाले गए बालू के भंडारण के लिए पर्यावरण स्वीकृति, घाटों के संचालन के लिए कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) तथा स्टॉक यार्ड के लिए कंसेंट टू एस्टेब्लिशमेंट (सीटीई) जारी किए जा रहे हैं। शनिवार को रांची समेत चार जिलों के आठ बालू घाटों को सीटीओ जारी किया गया। इसके बाद इन घाटों से बालू उत्खनन शुरू हो गया है। इनमें हजारीबाग के पंडारिया, सिकरी, बड़कागांव, सिरमा और सोनपुरा बालू घाट, पूर्वी सिंहभूम के सुवर्णरेखा-कोरेयामोहनपाल बालू घाट, गोड्डा के जसमअटा, झिलुआ और सनातन बालू घाट तथा रांची के श्यामनगर बालू घाट शामिल हैं। वहीं, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 13 बालू स्टॉक यार्डों में बालू भंडारण की स्वीकृति दी है। इसके लिए सीटीई और सीटीओ जारी कर दिया गया है। इनमें पूर्वी सिंहभूम में दो, दुमका में चार, गोड्डा में दो, हजारीबाग में दो तथा रांची, खूंटी और बोकारो में एक-एक स्टॉक यार्ड शामिल हैं। राज्य में कुल 444 बालू घाट हैं, जिनमें से 299 घाटों की नीलामी हो चुकी है। हालांकि, इनमें से केवल 35 घाटों को ही पर्यावरण स्वीकृति मिली है। इसके बावजूद अभी तक सिर्फ आठ घाटों को ही बालू उत्खनन का लाइसेंस जारी किया गया है। 18 घाटों की लीज डीड पर हो चुके हैं हस्ताक्षर राज्यभर में अब तक 18 बालू घाटों की लीज डीड पर संबंधित जिलों के उपायुक्त हस्ताक्षर कर चुके हैं। इनमें रांची के श्यामनगर और चोकसेरेंग, गोड्डा के राहा और झिलुआ, जामताड़ा के असनचुआ, बोकारो के पिछरी-2 और खेतको-चालकारी, पूर्वी सिंहभूम के कोरेयामोहनपाल एवं कोरेयामोहनपाल-सुवर्णरेखा, लातेहार के टूबेड और बाजकुम, हजारीबाग के सांध-सोनपुरा एवं लंगातु-सिकरी-सिरमा, रामगढ़ के सिरका और पैंकी, दुमका के छोटाकामती (रानेश्वर) एवं हरिपुर (जरमुंडी) तथा खूंटी के पांडू और बुधीरोमा बालू घाट शामिल हैं। बालू उत्खनन और भंडारण का लाइसेंस जारी होने से घाटों का ठेका लेने वाले ठेकेदारों को एनजीटी की रोक लागू होने से पहले करीब 10 दिन तक बालू स्टॉक करने का अवसर मिलेगा। इस अवधि में नदियों से दिन-रात बालू का उत्खनन किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में बालू स्टॉक होने से जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर भी अंकुश लगेगा। ठेकेदारों को चालान के माध्यम से बालू बेचनी होगी, जिससे बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी।
चार जिले के 8 घाटों से बालू खनन शुरू, 13 स्टॉक यार्ड को मिली मंजूरी
रांची सहित राज्यभर में 10 जून से नदियों से बालू निकालने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक लग जाएगी। इससे पहले राज्य सरकार ने बालू की संभावित किल्लत को दूर करने की कवायद तेज कर दी है। नदियों से बालू उत्खनन और निकाले गए बालू के भंडारण के लिए पर्यावरण स्वीकृति, घाटों के संचालन के लिए कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) तथा स्टॉक यार्ड के लिए कंसेंट टू एस्टेब्लिशमेंट (सीटीई) जारी किए जा रहे हैं। शनिवार को रांची समेत चार जिलों के आठ बालू घाटों को सीटीओ जारी किया गया। इसके बाद इन घाटों से बालू उत्खनन शुरू हो गया है। इनमें हजारीबाग के पंडारिया, सिकरी, बड़कागांव, सिरमा और सोनपुरा बालू घाट, पूर्वी सिंहभूम के सुवर्णरेखा-कोरेयामोहनपाल बालू घाट, गोड्डा के जसमअटा, झिलुआ और सनातन बालू घाट तथा रांची के श्यामनगर बालू घाट शामिल हैं। वहीं, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 13 बालू स्टॉक यार्डों में बालू भंडारण की स्वीकृति दी है। इसके लिए सीटीई और सीटीओ जारी कर दिया गया है। इनमें पूर्वी सिंहभूम में दो, दुमका में चार, गोड्डा में दो, हजारीबाग में दो तथा रांची, खूंटी और बोकारो में एक-एक स्टॉक यार्ड शामिल हैं। राज्य में कुल 444 बालू घाट हैं, जिनमें से 299 घाटों की नीलामी हो चुकी है। हालांकि, इनमें से केवल 35 घाटों को ही पर्यावरण स्वीकृति मिली है। इसके बावजूद अभी तक सिर्फ आठ घाटों को ही बालू उत्खनन का लाइसेंस जारी किया गया है। 18 घाटों की लीज डीड पर हो चुके हैं हस्ताक्षर राज्यभर में अब तक 18 बालू घाटों की लीज डीड पर संबंधित जिलों के उपायुक्त हस्ताक्षर कर चुके हैं। इनमें रांची के श्यामनगर और चोकसेरेंग, गोड्डा के राहा और झिलुआ, जामताड़ा के असनचुआ, बोकारो के पिछरी-2 और खेतको-चालकारी, पूर्वी सिंहभूम के कोरेयामोहनपाल एवं कोरेयामोहनपाल-सुवर्णरेखा, लातेहार के टूबेड और बाजकुम, हजारीबाग के सांध-सोनपुरा एवं लंगातु-सिकरी-सिरमा, रामगढ़ के सिरका और पैंकी, दुमका के छोटाकामती (रानेश्वर) एवं हरिपुर (जरमुंडी) तथा खूंटी के पांडू और बुधीरोमा बालू घाट शामिल हैं। बालू उत्खनन और भंडारण का लाइसेंस जारी होने से घाटों का ठेका लेने वाले ठेकेदारों को एनजीटी की रोक लागू होने से पहले करीब 10 दिन तक बालू स्टॉक करने का अवसर मिलेगा। इस अवधि में नदियों से दिन-रात बालू का उत्खनन किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में बालू स्टॉक होने से जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर भी अंकुश लगेगा। ठेकेदारों को चालान के माध्यम से बालू बेचनी होगी, जिससे बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी।

