Tuesday, September 22, 2026

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भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाली सच्चाई आई सामने:केस दर्ज होते ही पांच अंचल कार्यालयों से गायब हुए जमीन के रेकर्ड आज तक नहीं मिले


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को रांची सहित राज्यभर में जमीन के रिकॉर्ड में हो रहे फर्जीवाड़ा को रोकने और सुरक्षित रखने को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिया है। उन्होंने सभी दस्तावेजों को डिजिटल मोड में एक ही पोर्टल पर रखने का सुझाव दिया है, ताकि दस्तावेजों में हो रही छेड़छाड़ पर रोक लगाई जा सके। इधर, फर्जीवाड़ा से संबंधित मामला जैसे ही हाईकोर्ट या जांच एजेंसी के पास पहुंचता है, सरकारी कार्यालयों से उक्त जमीन के रेकर्ड ही गायब हो जा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों से गायब हुए जमीन के रेकर्ड की पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। सिर्फ नामकुम अंचल के विभिन्न मौजा में करीब 110 एकड़ जमीन के रेकर्ड गायब कर दिए गए हैं। वहीं, हेहल अंचल में 12 एकड़, अरगोड़ा अंचल में 1.55 एकड़ जमीन के अलावा खूंटी और अनगड़ा में भी पांच एकड़ से अधिक जमीन के दस्तावेज गायब हैं। सबसे बड़ी बात है जमीन का दस्तावेज गायब होने के बाद संबंधित कार्यालय के प्रधान द्वारा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई। प्राथमिकी भी रस्म अदायगी बनकर रह गई। इसका नतीजा है कि हाईकोर्ट ने नामकुम अंचल से रेकर्ड गायब होने के एक मामले में एसीबी को जांच का आदेश दे दिया है। अरबों की जमीन के रेकर्ड नहीं मिल रहे, जांच अभी भी अधूरी केस-1 : नामुकम चाय बागान की जमीन के दस्तावेज नहीं मिले नामकुम अंचल के बरगांवा मौजा की 100 एकड़ से अधिक जमीन का मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। इसी बीच अपर समाहर्त्ता भू-हदबंदी के कार्यालय से भू-हदबंदी वाद संख्या 144/73-74 का रेकर्ड गायब हो गया। इस मामले में अपर समाहर्त्ता भू-हदबंदी ने अज्ञात के विरुद्ध कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। यह चाय बागान की जमीन है। अभी इसकी कीमत 500 करोड़ से अधिक है। केस-2 : सेवन डे एडवेंटिस्ट स्कूल, खूंटी का मामला भी ठंडे बस्ते में… सेवन डे एडवेंटिस्ट सीनियर सेकेंड्री स्कूल, खूंटी से संबंधित एसएआर अपील वाद संख्या 154/ 2001-02 और वाद संख्या 155/2001-02 का मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। इसी बीच यह रेकर्ड गायब हो गया। कोर्ट ने दोनों रेकर्ड मांगा तो कार्यालय में नहीं मिला। तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी ब्रजलता ने कोतवाली थाना में अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। केस-3 : अनगड़ा अंचल से पंजी-2 ही गायब कर दी, ताकि पकड़े न जाएं जून 2015 में अनगड़ा अंचल की लिपिक मेरी प्रिस्का होरो ने तत्कालीन सीओ व राजस्व कर्मचारी पर पंजी टू गायब करने में शामिल होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अनगड़ा थाना में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि अनगड़ा के तुरूप- बुकी मौजा में दर्जनों लोगों के नाम पर जमीन का गलत तरीके से दाखिल-खारिज कर दिया गया है। आज तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। केस-4 : 27 अफसर-कर्मी अभियुक्त, 36 साल बाद भी जांच अधूरी हिनू मौजा के खाता संख्या- 328 के प्लॉट नं. 514 की 1.55 एकड़ जमीन का लगान निर्धारण गलत तरीके से 1989-90 में बिल्टु अली एवं करना भुइयां के नाम से कर दिया गया था। इसका रेकर्ड भी अंचल कार्यालय से गायब हो गया। कोतवाली थाने में दर्ज केस में रांची के तत्कालीन एसडीओ रामानंद प्रसाद सिंह समेत 27 अफसर-कर्मी अभियुक्त बनाए गए थे। हाईकोर्ट ने मांगा तो दस्तावेज नहीं मिले, अब एसीबी कर रही जांच जमीन के रेकर्ड गायब होने का ताजा मामला नामकुम अंचल से ही जुड़ा है। नामकुम के ग्राम डुंडू में खाता संख्या 32, प्लॉट 776, 820, 821, 822 की 5.93 एकड़ जमीन की खरीदारी जिस व्यक्ति के नाम पर हुई थी, उसकी दोहरी जमाबंदी खोल दी गई। यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो अदालत ने उक्त जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े दस्तावेज मांगे। अंचल कार्यालय ने दस्तावेज गायब होने का हवाला दिया। इसे अदालत ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह गंभीर लापरवाही या साजिश का संकेत देता है। कोर्ट ने एसीबी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। इस मामले में एसीबी ने तत्कालीन अंचल अधिकारी श्वेता वर्मा, हल्का कर्मचारी दीपक कुमार और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने के लिए मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग से औपचारिक अनुमति मांगी है। भास्कर एक्सपर्ट – संजय कुमार शर्मा, अधिवक्ता जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने पर ही दोषी पकड़ में आएंगे कोई भी दस्तावेज की चोरी होना आपराधिक मामला बनता है। रांची के विभिन्न अंचल, डीसीएलआर, एसी कार्यालय या रेकर्ड रूम से पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह जमीन के रेकर्ड गायब हुए हैं वह काफी गंभीर है। थानों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी अभी तक जांच पूरी नहीं होना बताता है कि पूरा सिस्टम इस सिंडिकेट का हिस्सा है। इसलिए जमीन के दस्तावेज के गायब होने से संबंधित मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की जरूरत है, ताकि दोषी पकड़े जा सकें।

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