रांची1 घंटे पहले
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झारखंड सरकार ने विधानसभा में 18 फरवरी से 18 मार्च 2026 की अवधि की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) पेश करते हुए भर्ती, किसानों, ग्रामीण विकास, पेयजल और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में हुई कार्रवाई का ब्योरा दिया। सरकार ने दावा किया कि जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से अब तक 43 हजार से अधिक नियुक्तियों की अनुशंसा की जा चुकी है, जबकि 22 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। रिपोर्ट में किसानों को एमएसपी के साथ बोनस, ग्रामीण सड़कों के टेंडर, नए चापाकलों की योजना और पुराने भ्रष्टाचार मामलों में हुई कार्रवाई का भी विवरण दिया गया है।
वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 43,510 चापाकलों में से 37,896 का अधिष्ठापन पूरा हो चुका है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के 263 प्रखंडों में 7,890 नए चापाकल लगाने का प्रस्ताव राज्य योजना प्राधिकृत समिति को भेजा गया है।मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 794 योजनाओं में से 753 योजनाओं की निविदा पूरी हो चुकी है।
जेएसएससी-जेपीएससी से 43 हजार से ज्यादा नियुक्तियों की अनुशंसा
एटीआर के मुताबिक, वर्ष 2020 से अब तक जेपीएससी ने 3,377 पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा की है। वर्तमान में 798 पदों के लिए विज्ञापन जारी हैं, जबकि 847 पदों पर विज्ञापन प्रकाशित करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, वर्ष 2019 से अब तक जेएसएससी ने 39,687 पदों पर नियुक्तियों की अनुशंसा की है। फिलहाल 20,206 पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित हैं और 1,759 पदों के लिए विज्ञापन निकालने की तैयारी चल रही है।
किसानों को एमएसपी के साथ बोनस भी दिया गया
सरकार ने बताया कि खरीफ विपणन मौसम में सामान्य धान पर 2,369 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी के साथ 81 रुपए बोनस दिया जा रहा है। यानी किसानों को कुल 2,450 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। 31 मार्च 2026 तक राज्य के 850 धान क्रय केंद्रों के माध्यम से 49,25,005 क्विंटल से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है।
भ्रष्टाचार के पुराने मामलों में कार्रवाई
एटीआर में बताया गया कि तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड (जेएसईबी) के पांच अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई। तत्कालीन मुख्य अभियंता (उत्पादन) डी.एन. राम के निधन के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई। बी.के. चौधरी की पेंशन कटौती से जुड़ी अपील पर कार्रवाई जारी है, गोपीनाथ सिंह मुंडा के मामले में अंतिम निर्णय लंबित है, जबकि प्रवीण कुमार और प्रमोद कुमार को समीक्षा के बाद आरोपमुक्त कर दिया गया है। न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही के आरोप में छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी है।

