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जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षा में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को 14 दिन भी जारी है। सरकार की ओर से वार्ता के लिए पांच छात्रों के नाम मांगे गए थे। छात्रों की ओर से गुरुवार को 11 सदस्य प्रतिनिधिमंडल के नाम एसडीओ को भेजा गया। इस पर विवाद हो गया। दिनभर छात्र वार्ता के आमंत्रण का इंतजार करते रहे पर सरकार की ओर से बुलावा नहीं आया। रात करीब 10:45 एसडीओ और एसडीम लॉ एंड ऑर्डर छात्रों के पास पहुंचे। अधिकारियों ने साफ कर दिया कि सरकार सिर्फ छात्रों से बात करना चाहती है, लेकिन छात्र अपनी 11 सदस्य पुरानी सूची पर अड़े रहे। इसमें दो पत्रकार और एक पूर्व महाधिवक्ता है। करीब 45 मिनट तक चली बैठक आखिरकार बेनतीजा रही और अधिकारी वापस लौट गए। शुक्रवार को एक बार फिर इस गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। संभव है कि कुछ शर्तों पर बात बन जाए। आईसा का आज विधानसभा मार्च
आईसा सहित विभिन्न संगठनों की ओर से 7 अगस्त को विधानसभा मार्च किया जाएगा। शुक्रवार दोपहर 1 बजे छात्र बिरसा चौक से विधानसभा तक जाएंगे। इस दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर चले आंदोलन का प्रमुख चेहरा रही आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल होंगी। राहुल गांधी ने आंदोलनरत छात्रों से की बात
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार रात अनशन पर बैठे छात्र नेता रविंद्र पासवान से फोन पर बात की। उन्होंने आंदोलन को समर्थन देने की बात की। इससे पहले उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से छात्रों का सपोर्ट करने की अपील की है। उन्होंने कहा देश में जो स्टूडेंट प्रोटेस्ट हो रहे हैं, वह एजुकेशन सिस्टम के खिलाफ हो रहे हैं। हमारा एजुकेशन सिस्टम कोलेप्स हो गया है। हर सरकार को छात्रों की बात सुनाई चाहिए और एजुकेशन सिस्टम को बदलना चाहिए। चाहे वह कांग्रेस की सरकार हो या झारखंड सरकार हो। मास्टरमाइंड से लगातार 10 दिनों तक पूछताछ इधर, जेपीएससी परीक्षा में हुई गंभीर और अनियमितताा की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। सीआईडी के सामने फर्जीवाड़े के बड़े सिंडिकेट की परतें खुलती जा रही है। मामले में सीआईडी अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच के दौरान मास्टरमाइंड अभय तिवारी से लगातार 10 दिनों तक पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों के अनुसार, अभय तिवारी ने बताया कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 40 से 60 लाख रुपए तक की डील होती थी। इस रकम में ऊपर से नीचे तक जुड़े लोगों का हिस्सा पहले से तय रहता था। छात्रों की यह है प्रमुख मांगें


