
पटना से मनोज कुमार की रिपोर्ट
बिहार की अर्थव्यवस्था में खेती की तुलना में उद्योग का योगदान बढ़ा है. राज्य के सकल मूल्य वर्धन (राज्य की कुल आय में योगदान-जीएसवीए) में खेती की हिस्सेदारी घटकर 22.37% रह गयी, जबकि उद्योग की हिस्सेदारी बढ़कर 23.57% हो गयी. सेवा क्षेत्र 54.07% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है. योजना एवं विकास विभाग के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय ने इस संबंध में आंकड़े जारी किये हैं.
खेती से इतर क्षेत्रों के बढ़ते योगदान के कारण आया बदलाव
जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था में यह बदलाव लंबे समय में खेती से इतर क्षेत्रों के बढ़ते योगदान के कारण हुआ है. अगस्त माह की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) चालू कीमतों पर 9.92 लाख करोड़ रुपये रहा. इसी वर्ष राज्य के सकल मूल्य वर्धन में खेती, उद्योग और सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी क्रमश: 22.37%, 23.57% और 54.07% रही.
अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों की हिस्सेदारी (2024-25)
| क्षेत्र | GSVA में हिस्सेदारी |
| खेती, वानिकी और मछलीपालन | 22.37% |
| उद्योग (द्वितीयक क्षेत्र) | 23.57% |
| सेवा क्षेत्र | 54.07% |
| कुल GSVA | 100% |
बिहार की अर्थव्यवस्था का आकार (2024-25)
| संकेतक | आंकड़ा |
| सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP), चालू कीमतों पर | ₹9.92 लाख करोड़ |
स्रोत: योजना एवं विकास विभाग, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, अगस्त 2025 की रिपोर्ट.
मुख्य बात: वर्ष 2024-25 में बिहार के GSVA में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी (23.57%) खेती, वानिकी और मछलीपालन (22.37%) से अधिक रही. सेवा क्षेत्र 54.07% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा क्षेत्र बना रहा.
इन तीन क्षेत्रों का योगदान करीब 2.15 लाख करोड़
खेती, वानिकी और मछलीपालन का कुल योगदान करीब 2.15 लाख करोड़ रुपये रहा. वहीं, निर्माण, विनिर्माण, बिजली और पानी की आपूर्ति जैसी गतिविधियों को शामिल करने वाले द्वितीयक क्षेत्र का योगदान करीब 2.23 लाख करोड़ रुपये था.
बिहार की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
व्यापार व मरम्मत का योगदान 1.28 लाख करोड़
सेवा क्षेत्र में व्यापार और मरम्मत, होटल, परिवहन, भंडारण, संचार, बैंकिंग, मकान-जमीन से जुड़ी गतिविधियां, लोक प्रशासन और अन्य सेवाएं शामिल हैं. इसमें व्यापार और मरम्मत का योगदान करीब 1.28 लाख करोड़ रुपये, परिवहन-भंडारण-संचार का करीब 93 हजार करोड़ रुपये और वित्तीय सेवाओं का करीब 43 हजार करोड़ रुपये रहा.
1. बिहार में क्षेत्रवार सकल मूल्य वर्धन (GVA), वर्ष 2011-12
| क्षेत्र | हिस्सेदारी (%) | अनुमानित योगदान |
| खेती, वानिकी और मछलीपालन | 25.7% | ₹62,000 करोड़ |
| उद्योग (द्वितीयक क्षेत्र) | 18.8% | ₹45,000 करोड़ |
| सेवा क्षेत्र | 55.5% | ₹1.34 लाख करोड़ |
| कुल GVA | 100% | ₹2.41 लाख करोड़ |
2. क्षेत्रवार हिस्सेदारी में बदलाव (2011-12 से 2024-25 तक)
| क्षेत्र | 2011-12 में हिस्सेदारी | 2024-25 में हिस्सेदारी | बदलाव |
| खेती, वानिकी और मछलीपालन | 25.7% | 22.3% | −3.4 प्रतिशत अंक |
| उद्योग (द्वितीयक क्षेत्र) | 18.8% | 23.6% | +4.8 प्रतिशत अंक |
| सेवा क्षेत्र | 55.5% | 54.1% | −1.4 प्रतिशत अंक |
मुख्य निष्कर्ष: 2011-12 से 2024-25 के बीच बिहार की अर्थव्यवस्था में खेती, वानिकी और मछलीपालन की हिस्सेदारी 3.4 प्रतिशत अंक घटी, जबकि उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 4.8 प्रतिशत अंक बढ़ी। सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी में 1.4 प्रतिशत अंक की कमी आई।
नोट: आंकड़े अनुमानित हैं। समाचार या शोध में इस्तेमाल करने से पहले दोनों वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों और समान मूल्य-आधार की पुष्टि कर लें।
13 साल पहले क्या थी स्थिति
वर्ष 2011-12 में बिहार के सकल मूल्य वर्धन में खेती, वानिकी और मछलीपालन की हिस्सेदारी करीब 25.7% थी. उद्योग से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 18.8% और सेवा क्षेत्र की करीब 55.5% थी. उस समय खेती, वानिकी और मछलीपालन का योगदान करीब 62 हजार करोड़ रुपये था. उद्योग से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र का योगदान करीब 45 हजार करोड़ रुपये और सेवा क्षेत्र का करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये था. वर्ष 2024-25 तक आते-आते खेती की हिस्सेदारी करीब 3.4 प्रतिशत अंक घट गयी, जबकि उद्योग की हिस्सेदारी करीब 4.8 प्रतिशत अंक बढ़ गयी.
The post GSDP आंकड़े जारी : बिहार में कृषि का घटा योगदान, उद्योग और सेवा क्षेत्र ने मारी बाजी appeared first on Prabhat Khabar.
