Tuesday, May 19, 2026

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IGIMS Patna Student Assault | Guard Suspended Over Patient Wait

अस्पताल में मारपीट के दौरान की तस्वीर।

पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में सोमवार को इलाज में देरी को लेकर हंगामा हो गया।

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न्यूरो सर्जरी ओपीडी के बाहर एक एमबीबीएस छात्र और मेडिकल अटेंडेंट के बीच मारपीट हुई। घटना के बाद 150 से अधिक मेडिकल छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के अनुसार, 2022 बैच के एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र सुधीर कुमार अपने एक परिजन को न्यूरो सर्जरी ओपीडी (वार्ड 15) में दिखाने पहुंचे थे।

छात्र का आरोप है कि परिजन की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्होंने ओपीडी में मौजूद मेडिकल अटेंडेंट सुरेंद्र कुमार दास से जल्द अपॉइंटमेंट दिलाने का आग्रह किया।

छात्र ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वह संस्थान का ही मेडिकल छात्र है, लेकिन इसके बावजूद उनके परिजन का नंबर काफी देर तक नहीं आया। इसी बात को लेकर छात्र और कर्मचारी के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई।

देखें मौके की तस्वीरें…

अस्पताल में काउंटर पर विवाद हुआ था।

अस्पताल में काउंटर पर विवाद हुआ था।

आपस में मारपीट करते लोग।

आपस में मारपीट करते लोग।

छात्र बोला- उसे लात घूंसे से पीटा गया

पीड़ित छात्र सुधीर कुमार का आरोप है कि बहस के बाद ओपीडी कर्मियों और सिक्योरिटी गार्डों ने मिलकर उसके साथ मारपीट की। उसे लात-घूंसों से पीटा गया और बाल पकड़कर खींचा गया। छात्र का यह भी आरोप है कि गार्ड उसे घसीटते हुए गार्ड रूम तक ले गए, जहां उसे दीवार से धक्का देकर पटक दिया गया।

इस घटना के बाद अन्य मेडिकल छात्र भड़क गए और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। करीब दो घंटे तक संस्थान में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। छात्रों ने संस्थान प्रशासन को हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान निदेशक के निर्देश पर एक सिक्योरिटी गार्ड को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, घटना की जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया है।

आरोप है कि जमीन पर गिरने के बाद भी कई गार्ड लगातार मारपीट करते रहे। छात्र ने यह भी बताया कि शुरुआती विवाद शांत होने के बाद वह खुद पाइल्स की समस्या के लिए प्राथमिक उपचार कराने गया था, लेकिन वहां भी गार्डों के साथ उसकी दोबारा बहस हो गई और स्थिति बिगड़ती चली गई।

सूचना मिलते ही एकजुट हुए छात्र

घटना की जानकारी मिलते ही मेडिकल कॉलेज के छात्र बड़ी संख्या में एकजुट हो गए। देखते ही देखते करीब 150 से अधिक एमबीबीएस छात्र ओपीडी परिसर पहुंच गए। छात्रों ने आरोपित कर्मियों और गार्डों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरे ओपीडी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मरीज और उनके परिजन भी डर गए। कुछ देर के लिए ओपीडी की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि संस्थान प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी।

मौके पर पहुंची पुलिस, छात्रों को कराया शांत

घटना की सूचना मिलने के बाद IGIMS थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों और कर्मचारियों को समझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने भी हस्तक्षेप किया।

एमबीबीएस छात्रों ने संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार से मुलाकात कर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। छात्रों ने मांग की कि मारपीट में शामिल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे।

गार्ड सस्पेंड, जांच टीम गठित

घटना के बाद संस्थान प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सिक्योरिटी गार्ड को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

संस्थान प्रशासन ने यह भी कहा है कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा स्वीकार्य नहीं है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

RDA ने छात्रों का किया समर्थन

रीजनल डॉक्टर एसोसिएशन (RDA) ने भी इस मामले में एमबीबीएस छात्रों का समर्थन किया है। आरडीए अध्यक्ष डॉ. रजत कुमार ने कहा कि जिस छात्र के साथ मारपीट हुई, वह संस्थान का वैध छात्र है और घटना के समय उसने आईकार्ड व एप्रेन पहन रखा था।

डॉ. रजत ने कहा कि छात्र लगातार अपने परिजन की गंभीर स्थिति और खुद की तबीयत खराब होने की बात कह रहा था, लेकिन ओपीडी के बाहर तैनात कर्मचारी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल छात्र के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और बाद में मारपीट की गई।

उन्होंने कहा कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। आरडीए ने मांग की है कि दोषी कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतार, ओपीडी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज में देरी और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर अक्सर मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, इस बार मामला मेडिकल छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़प तक पहुंच गया।

फिलहाल संस्थान प्रशासन पूरे मामले को शांत कराने में जुटा है, लेकिन छात्रों की ओर से दी गई हड़ताल की चेतावनी के बाद आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है।

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