
Indian Railways News: पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल ने गैर-किराया राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. परिचालन अवधि पूरी कर चुकी रेलवे की पुरानी पटरियों, अनुपयोगी कल-पुर्जों और अन्य अप्रचलित धातु सामग्रियों का सुव्यवस्थित व वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करके और उसे बेचकर मंडल ने भारी-भरकम राजस्व अर्जित किया है.
पहली छमाही में ही 50% लक्ष्य पूरा
चालू वित्तीय वर्ष 2026–27 की प्रथम छमाही (अप्रैल से सितंबर 2026) के दौरान आसनसोल मंडल ने स्क्रैप की बिक्री से 36.19 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है. यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि (21.05 करोड़ रुपए) की तुलना में 71.92 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है. वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए निर्धारित 69 करोड़ रुपए के वार्षिक आंतरिक लक्ष्य के मुकाबले मंडल ने शुरुआती छह महीनों में ही 52.45 प्रतिशत की सफलता हासिल कर ली है.
समन्वय और सटीक प्रबंधन का मिला परिणाम
इस वित्तीय सफलता के पीछे रेलवे के विभिन्न विभागों का बेहतर तालमेल रहा है. भंडार विभाग के नेतृत्व में लोको अनुरक्षण शेडों, वैगन अनुरक्षण एवं ओवरहॉलिंग शेडों तथा इंजीनियरिंग विभाग की स्थायी पथ इकाइयों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया.
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रेलवे ने क्या-क्या किया
- अनुपयोगी सामग्रियों की पहचान
- अनुपयोगी सामग्रियों का पृथक्करण
- अनुपयोगी सामग्रियों का लेखांकन
- अनुपयोगी सामग्रियों का परिवहन
- पारदर्शी नीलामी की समयबद्ध प्रक्रिया पूरी की.
4550 मीट्रिक टन स्क्रैप की बिक्री
अप्रैल-सितंबर 2026 में कुल 4,550.063 मीट्रिक टन स्क्रैप की बिक्री की गयी, जो पिछले साल की इसी अवधि से 91.43% अधिक है. पिछले साल लोहे 935.792 मीट्रिक टन के स्क्रैप का निस्तारण हुआ था. इस साल यह बढ़कर 3,788.095 मीट्रिक टन हो गया.
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खाली हो रही जगह, बेहतर हो रहा संसाधन प्रबंधन : रेलवे
समयबद्ध स्क्रैप निस्तारण केवल कमाई तक सीमित नहीं है. इससे रेलवे के कैंपस, वर्कशॉप और शेडों में काफी जगह खाली हुई है, जिसका उपयोग अब रेलवे प्रॉपर्टी के रख-रखाव के लिए किया जा सकेगा. रेलवे ने कहा है कि कल तक जो सामग्री परिचालन के लिहाज से अनुपयोगी हो चुकी थी, वह आज सुव्यवस्थित संसाधन प्रबंधन के जरिये गैर-किराया राजस्व का एक प्रमुख जरिया बन गयी हैं.
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