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सदर अस्पताल, बोकारो में करीब तीन वर्ष पहले 40 लाख रुपए की लागत से मिल्क बैंक बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जो अब ठंडे बस्ते में चला गया है। विदित हो कि सदर अस्पताल के एसएनसीयू के समीप एक कमरे में मिल्क बैंक खोलने का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने जांच में कमरे को छोटा पाया, तो अस्पताल प्रबंधन को दूसरी जगह तलाश करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दूसरी बार भी प्रस्ताव भेजने के लिए कहा, तो अस्पताल प्रबंधन जगह उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए। इससे योजना पूरी तरह अधर में लटक गई। इस वजह से यहां मिल्क बैंक का निर्माण कार्य आज तक चालू नहीं हो पाया है। सदर अस्पताल में इस मिल्क बैंक के खुलने से जिन महिलाओं में बच्चों को दूध पिलाने के बाद जो सरप्लस दूध बच जाता है। उस दूध को मिल्क बैंक में स्टोर करके रखने का प्रस्ताव था। ताकि जिन महिलाओं को दूध नहीं होता है, उनके नवजात बच्चों को दूध देकर उनकी जान बचाई जा सके।
रजिस्ट्रेशन काउंटर के ऊपर लगाए गए स्क्रीन डिस्प्ले बोर्ड बंद रहने के कारण मरीजों को चिकित्सकों से जुड़ी जानकारी का पता नहीं चलता है। इस कारण मरीज परेशान रहते हैं। मरीज व परिजन अस्पताल के अंदर भटकते रह जाते हैं। जब चिकित्सक का पता नहीं चल पाता है, तो थककर मरीज निजी अस्पतालों में इलाज के लिए चले जा रहे हैं। ऐसे प्रत्येक दिन 10 से 12 मरीज आते हैं, जिनको चिकित्सकों के बारे में सही जानकारी ही नहीं मिल पाती है। इस वजह से उनका इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आने वाले मरीजों को होती है, जिन्हें महज चिकित्सक की सही जानकारी नहीं मिलने के कारण लौटना पड़ रहा है।
जो सुविधा लंबित है, शीघ्र ही चालू कराई जाएगी
डिस्प्ले बोर्ड शीघ्र चालू कर दिया जाएगा। मिल्क बैंक के लिए अभी कोई स्थान नहीं मांगा गया है। अगर मांगा जाएगा तो अवश्य स्थान दिया जाएगा और जो-जो जांच की सुविधा नहीं है, उसकी मशीन भी शीघ्र ही मंगाई जा रही है। – डॉ. एनपी सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल बोकारो।
चिकित्सकों के रोस्टर की नहीं मिलती जानकारी
जांच केंद्र बंद होने से मरीजों की बढ़ी परेशानियां
करार खत्म होने के कारण सदर अस्पताल में 2017 से जांच कर रही एजेंसी एसआरएल का जांच केंद्र बंद हो गया। इससे आम मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों को जांच के बिना लौटना पड़ रहा है। जबकि यहां करोड़ों रुपए खर्च कर अत्याधुनिक लैब तो बना दिया गया है, पर उसमें महत्वपूर्ण जांच की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है, सिर्फ नॉर्मल जांच हो रही है। विदित हो कि एसआरएल में गंभीर से गंभीर बीमारियों के मरीजों की जांच जहां सस्ते दरों पर ही हो जाती थी, अब इसके लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसमें तो कई ऐसी बीमारी है, जिनकी जांच एसआरएल में होती थी, पर सदर अस्पताल में उन जांच की कोई सुविधा ही नहीं है। जैसे थायराइड, विटामिन डी, हॉर्ट से जुड़ा एचसीवी, विटामिन बी12, एचबीसी-1, बायप्सी टेस्ट सहित हारमोनल के लगभग 50 तरह के जांच बंद हो गए हैं। सबसे बड़ी परेशानी की वजह वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को हो रही है।


