सहरसा व्यवहार न्यायालय के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) राकेश कुमार की अदालत ने शनिवार को पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता (BNS) से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने अभियुक्त मो० सिराज को दोषी करार देते हुए सश्
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न्यायालय के आदेशानुसार, दोषी को अधिकतम 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत ने दोषी मो सिराज को विभिन्न धाराओं के तहत सजा और आर्थिक दंड सुनाया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा-75 के तहत उसे 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 5,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया है। जुर्माना अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

पॉक्सो एक्ट की धारा-8 के तहत, मो० सिराज को 4 वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है। जुर्माना जमा न करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास होगा।
इसी प्रकार, पॉक्सो एक्ट की धारा-12 के अंतर्गत, दोषी को 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 5,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास होगा।
यह मामला सहरसा सदर थाना क्षेत्र से संबंधित है। बिहरा थाना क्षेत्र के सतरकटैता (वार्ड नंबर-04) निवासी मो यूनूस के पुत्र मो सिराज के खिलाफ बीते 17 सितंबर 2024 को सदर थाना कांड संख्या-982/24 (Spl.pocso-94/24) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियुक्त पर नए कानून (BNS) और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत की
पुलिस अनुसंधानकर्ता, सब-इंस्पेक्टर पूनम कुमारी ने मामले की वैज्ञानिक जांच करते हुए अदालत में पुख्ता साक्ष्य और समय पर चार्जशीट प्रस्तुत की। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) शिवेन्द्र प्रसाद ने न्यायालय में प्रभावी तरीके से पक्ष रखा।
पुलिस के ठोस अनुसंधान और अभियोजन की मजबूत दलीलों के कारण घटना के दो वर्षों के भीतर दोषी को सजा दिलाई जा सकी।


