सीतामढ़ी सदर अस्पताल ने नवजात शिशुओं के उपचार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) को मदर-न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) में बदल दिया गया है। इसके साथ ही, लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (LMU) की भी शुरुआत की गई
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नई व्यवस्था के तहत, गंभीर रूप से बीमार या कुपोषित नवजात शिशुओं के इलाज के दौरान उनकी मां भी उसी वार्ड में बच्चे के साथ रह सकेंगी। पहले नवजात को SNCU में भर्ती किया जाता था और मां को अलग वार्ड में रहना पड़ता था। अब प्रत्येक रेडियंट वॉर्मर के साथ मां के लिए भी बेड की व्यवस्था की गई है।

इससे कंगारू मदर केयर (KMC) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नवजात के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होगा और मां-बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होगा। सदर अस्पताल में शुरू की गई लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (LMU) में उन माताओं का दूध सुरक्षित रखा जाएगा, जिनके नवजात जन्म के तुरंत बाद स्तनपान करने में सक्षम नहीं होते।
इस यूनिट में मिल्क एक्सप्रेशन एरिया, मिल्क स्टोरेज, स्टरलाइजेशन और वॉश एरिया सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि जरूरतमंद नवजातों को सुरक्षित तरीके से मां का दूध उपलब्ध कराया जा सके।

इस पहल के साथ सीतामढ़ी सदर अस्पताल बिहार का पहला जिला अस्पताल बन गया है, जहाँ MNCU और LMU दोनों सुविधाएं एक साथ शुरू हुई हैं। इससे जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के नवजात शिशुओं और उनकी माताओं को बेहतर एवं आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।
MNCU के प्रभारी और नोडल पदाधिकारी डॉ. हिमांशु शेखर ने बताया कि यह उपलब्धि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में 12 बेड वाले MNCU का जल्द ही विस्तार कर इसे 20 बेड का किया जाएगा।

ताकि अधिक से अधिक नवजातों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके। उद्घाटन कार्यक्रम में यूनिसेफ बिहार के प्रतिनिधियों के अलावा सिविल सर्जन डॉ. रवींद्र कुमार यादव, उपाधीक्षक डॉ. मनोज कुमार, अस्पताल प्रबंधक विजय चंद्र झा सहित कई चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

