कभी नौकरी की तलाश में बड़े शहरों का रुख करने वाले झारखंड के युवाओं में अब अपना उद्योग स्थापित करने का भरोसा बढ़ा है। इस बदलाव के केंद्र में राज्य का तेजी से बढ़ता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियां, आसान ऋण, पूंजी सब्सिडी, ऑनलाइन पंजीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में युवा स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। रांची में एमएसएमई सेक्टर का विस्तार लगातार हो रहा है। केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच जिले में 1,17,063 नए एमएसएमई पंजीकृत हुए। यानी छह वर्षों में एक लाख से अधिक उद्यमियों ने उद्योग या सेवा क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू किया। वर्तमान में रांची में उद्यम पोर्टल पर करीब 1.36 लाख एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं, जबकि पूरे झारखंड में इनकी संख्या लगभग 17.50 लाख है। झारखंड चैंबर के सब-कमेटी चेयरमैन मुकेश अग्रवाल ने बताया कि बेहतर बाजार, बैंकिंग सुविधाएं, परिवहन नेटवर्क और सरकारी सहायता के कारण युवाओं का रुझान तेजी से उद्यमिता की ओर बढ़ा है। इन योजनाओं का मिल रहा लाभ 1. पीएमएफएमई: यह योजना छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप से विकसित करने के लिए है। इसमें 15-35% तक अनुदान, तकनीकी सहायता और ब्रांडिंग सहयोग मिलता है। 2. पीएमईजीपी: इसमें नए सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए बैंक ऋण पर 15 से 35% तक सब्सिडी मिलती है। 3. सीजीटीएमएसई (सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना): इस योजना के तहत बिना किसी जमानत के बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। छोटे व्यवसायों के लिए प्रमुख है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना झारखंड में उद्यमियों के लिए कई सरकारी और बैंक लोन योजनाएं उपलब्ध हैं। इनमें सबसे प्रमुख प्रधानमंत्री मुद्रा योजना है, जिसके तहत ₹50,000 से ₹10 लाख रु. तक का बिना गारंटी लोन मिलता है। नए उद्योग और स्वरोजगार के लिए पीएम रोजगार सृजन योजना के तहत बैंक लोन के साथ सब्सिडी दी जाती है, जिसमें एससी/एसटी, ओबीसी और महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है। बड़े उद्योगों के लिए झारखंड एमएसएमई पॉलिसी 2023 के तहत ब्याज सब्सिडी, टैक्स छूट और बिना गारंटी लोन की सुविधा मिलती है।
एमएसएमई डे आज:रांची में उद्यमिता की रफ्तार तेज: 2025-26 में 31,774 नए उद्यम हुए रजिस्टर, युवाओं का बढ़ा स्वरोजगार की ओर रुझान
कभी नौकरी की तलाश में बड़े शहरों का रुख करने वाले झारखंड के युवाओं में अब अपना उद्योग स्थापित करने का भरोसा बढ़ा है। इस बदलाव के केंद्र में राज्य का तेजी से बढ़ता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियां, आसान ऋण, पूंजी सब्सिडी, ऑनलाइन पंजीकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में युवा स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। रांची में एमएसएमई सेक्टर का विस्तार लगातार हो रहा है। केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच जिले में 1,17,063 नए एमएसएमई पंजीकृत हुए। यानी छह वर्षों में एक लाख से अधिक उद्यमियों ने उद्योग या सेवा क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू किया। वर्तमान में रांची में उद्यम पोर्टल पर करीब 1.36 लाख एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं, जबकि पूरे झारखंड में इनकी संख्या लगभग 17.50 लाख है। झारखंड चैंबर के सब-कमेटी चेयरमैन मुकेश अग्रवाल ने बताया कि बेहतर बाजार, बैंकिंग सुविधाएं, परिवहन नेटवर्क और सरकारी सहायता के कारण युवाओं का रुझान तेजी से उद्यमिता की ओर बढ़ा है। इन योजनाओं का मिल रहा लाभ 1. पीएमएफएमई: यह योजना छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप से विकसित करने के लिए है। इसमें 15-35% तक अनुदान, तकनीकी सहायता और ब्रांडिंग सहयोग मिलता है। 2. पीएमईजीपी: इसमें नए सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए बैंक ऋण पर 15 से 35% तक सब्सिडी मिलती है। 3. सीजीटीएमएसई (सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना): इस योजना के तहत बिना किसी जमानत के बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। छोटे व्यवसायों के लिए प्रमुख है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना झारखंड में उद्यमियों के लिए कई सरकारी और बैंक लोन योजनाएं उपलब्ध हैं। इनमें सबसे प्रमुख प्रधानमंत्री मुद्रा योजना है, जिसके तहत ₹50,000 से ₹10 लाख रु. तक का बिना गारंटी लोन मिलता है। नए उद्योग और स्वरोजगार के लिए पीएम रोजगार सृजन योजना के तहत बैंक लोन के साथ सब्सिडी दी जाती है, जिसमें एससी/एसटी, ओबीसी और महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है। बड़े उद्योगों के लिए झारखंड एमएसएमई पॉलिसी 2023 के तहत ब्याज सब्सिडी, टैक्स छूट और बिना गारंटी लोन की सुविधा मिलती है।

