कटिहार जिले के बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र की किरोड़ा पंचायत में लगभग 300 परिवारों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत के कोलटोला बालूगंज, वार्ड नंबर 10 में, ये परिवार बरसात के मौसम में महानंदा नदी की उपधारा पर बने बांस के चचरी पुल के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच से गुजरने वाली बरसाती नदी पर स्थायी पुल न होने के कारण हर साल भारी परेशानी होती है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को जान जोखिम में डालकर इस अस्थायी पुल से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फिसलकर नदी में गिर भी चुके हैं। कई बार आवेदन के माध्यम से गुहार लगाई गई
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए पूर्व सांसद दुलालचंद गोस्वामी, पूर्व विधायक कामरेड महबूब आलम और वर्तमान सांसद तारिक अनवर से कई बार आवेदन के माध्यम से गुहार लगाई गई है। हालांकि, अब तक पक्के पुल के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है और यह मांग फाइलों में ही दबी रह गई है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “आखिर कब तक सीमांचल के प्रमुख जिले कटिहार के लोगों के साथ नाइंसाफी की जाएगी? बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का हक हैं।” आदिल हसन ने दैनिक भास्कर डिजिटल के माध्यम से बलरामपुर विधायक संगीता देवी और कटिहार सांसद तारिक अनवर से अपील की कि क्षेत्र की जनता की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना उनकी जवाबदेही है। जल्द से जल्द पुल का निर्माण शुरू करने की मांग
उन्होंने इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में त्वरित कार्रवाई की मांग की। हसन ने उम्मीद जताई कि सांसद और विधायक इस मामले को सदन में उठाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से भी जल्द से जल्द पुल का निर्माण शुरू करने की मांग की। स्थानीय निवासी मो. शमीम ने बताया कि पुल न होने से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भी दिक्कत होती है, जिससे गांव विकास से कोसों दूर है। बरसात में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। खेती-किसानी का सामान भी सिर पर लादकर लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। किरोड़ा पंचायत के लोग अब भी सरकारी पहल की राह देख रहे हैं।

