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कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत डगरनवां पंचायत के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों में लगभग 100 लोग पिछले 20 वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इन घने जंगलों के बीच बसे 10 परिवारों को पीने के पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पानी के लिए उन्हें घर से करीब आधा किलोमीटर दूर सोती नाला तक चढ़ाई-उतराई वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। वहां पहुंचकर वे पहले गंदे पानी से ही अपने बर्तन साफ करती हैं। गंदा पानी पीने को विवश
इसके बाद, महिलाएं छोटे गड्ढे (चुआं) खोदकर उसमें जमा हुए पानी को छोटे कटोरे से बड़े बर्तन में डालती हैं। यह पानी काफी गंदा होता है, लेकिन ग्रामीण इसे पीने के लिए विवश हैं। गांव की महिला कुफरा मुर्मू ने बताया कि वे 20 साल पहले सिमरकुंडी गांव छोड़कर यहां आकर बसे थे। तब से वे लगातार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और कई बार जिला प्रशासन से इस संबंध में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। बरसात के दिनों में स्थिति और विकराल
कुफरा मुर्मू के अनुसार, गर्मियों में पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। बरसात के दिनों में स्थिति और विकराल हो जाती है, क्योंकि तब चुआं खोदने की जगह भी नहीं बचती। ऐसे में उन्हें नदी के गंदे पानी को छानकर पीना पड़ता है। दूषित पानी पीने से लोग हो रहे बीमार
इधर गांव की महिला शकुंतला मुर्मू ने बताया कि दूषित पानी पीने से कई बार इस गांव के बच्चे और बड़े लोग बीमार पड़ जाते हैं। इसकी वजह से वे कई प्रकार की बीमारियों से जूझते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में यह पानी और भी दूषित हो जाता है, जिसके कारण कई बार तो लोग लंबे समय तक बीमार रहते हैं। ऐसे में गांव में स्वास्थ्य संबंधित व्यवस्था नहीं होने के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मजदूरी और खेती कर करते हैं लोग
ग्रामीण लखन मुर्मू ने बताया कि इस गांव के लोग मुख्य रूप से मजदूरी और थोड़ी बहुत खेती भी करते हैं। उन्होंने बताया कि इस गांव में आने के लिए ना तो पक्की सड़क है और न ही अन्य कोई मूलभूत सुविधाएं। जिस पनसोता में चुआं खोदकर वे लोग पानी भरते हैं, उसी पनसोता में जानवर भी पानी पिया करते हैं। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं से ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को कई बार अवगत कराया है। किंतु आजतक जिला प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आजादी के 75 वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज भी इस गांव के लोग ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं। इस संबंध में पीएचडी के अधिकारियों से वार्ता हुई है। वन क्षेत्र होने के कारण ट्यूबवेल या बोरिंग करने के लिए वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पा रही है। हालांकि मेरे द्वारा वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी जा रही है। जल्द ही कोई समाधान निकाला जाएगा। -हुलास महतो, बीडीओ, मरकच्चो

