खास बातें
Who is Kakoli Ghosh Dastidar: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी के इतिहास का सबसे बड़ा और आत्मघाती विभाजन (Vertical Split) हो चुका है. कोलकाता में विधानसभा के भीतर 80 में से 58 विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया, तो दिल्ली में टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने एनडीए (NDA) को समर्थन देकर ममता बनर्जी के राष्ट्रीय वजूद पर आखिरी चोट की है.
काकोली और रीतब्रत का ‘ऑपरेशन तख्तापलट’
इस पूरे तख्तापलट के पीछे 2 ही नाम गूंज रहे हैं- डॉ काकोली घोष दस्तीदार और रीतब्रत बनर्जी. ये दोनों कोई साधारण नेता या कल के आये हुए पैराशूट चेहरे नहीं हैं. ममता बनर्जी के वो सबसे भरोसेमंद इनसाइडर और रणनीतिकार रहे हैं, जो कभी टीएमसी का ऑक्सीजन हुआ करते थे. आज इन्हीं दोनों ने मिलकर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ‘ऑपरेशन तख्तापलट’ को अंजाम दिया.
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डॉ काकोली घोष दस्तीदार : ममता की ‘फायरब्रांड कमांडर’ ने कर दिया खेल
लोकसभा में टीएमसी कुनबे को ताश के पत्तों की तरह बिखेरने वाली डॉ काकोली घोष दस्तीदार की प्रोफाइल बेहद रसूखदार और चौंकाने वाली है.
- पारिवारिक राजनीतिक रसूख : 23 नवंबर 1959 को जन्मीं डॉ काकोली घोष दस्तीदार के परिवार का बंगाल की राजनीति में 3 पीढ़ियों का इतिहास है. उनके चाचा अरुण मोईत्रा स्वतंत्रता सेनानी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे, जबकि उनके मामा गुरुदास दासगुप्ता देश के जाने-माने सांसद थे. उनके पति डॉ सुदर्शन घोष दस्तीदार देश के प्रसिद्ध आईवीएफ (IVF) स्पेशलिस्ट और बंगाल के पूर्व मंत्री हैं.
- ममता की कोर टीम और 4 बार की सांसद : काकोली घोष दस्तीदार वर्ष 2009 से लगातार बारासात लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीतती आ रही हैं. वे अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (Chief Whip) जैसी बेहद ताकतवर कुर्सियों पर काबिज रही हैं.
- बगावत की इनसाइड स्टोरी (कल्याण बनर्जी और आई-पैक पर गुस्सा): काकोली घोष की बगावत की शुरुआत 27 मई 2026 को हुई, जब उन्होंने टीएमसी के सभी सांगठनिक पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर गंभीर दुर्व्यवहार और महिला विरोधी (Misogynist) रवैये का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड, तृणमूल के भीतर बढ़ते भ्रष्टाचार और चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी आई-पैक (I-PAC) और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते दखल को हार की मुख्य वजह बताते हुए बगावत का रास्ता चुन लिया.
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रीतब्रत बनर्जी : छात्र राजनीति के ‘चाणक्य’ ने कोलकाता में पलटी बाजी
कोलकाता विधानसभा के भीतर ममता बनर्जी को ‘कैच-22’ (सशक्त धर्मसंकट) की स्थिति में लाकर खड़ा करने वाले रीतब्रत बनर्जी बागी विधायक दल के नये नेता बनकर उभरे.
- वामपंथ से तृणमूल और अब बागी किंग : रीतब्रत बनर्जी कभी माकपा (CPIM) के छात्र संगठन एसएफआई (SFI) के अखिल भारतीय महासचिव और राज्यसभा सांसद थे. वामपंथ छोड़ने के बाद ममता बनर्जी उन्हें टीएमसी में लेकर आयीं और उन्हें पार्टी की श्रमिक शाखा (Trade Union Wing) का राष्ट्रीय प्रमुख बनाया. वे संगठन और युवाओं को लामबंद करने की कला में माहिर माने जाते हैं.
- 58 विधायकों के साथ ‘आसोल टीएमसी’ का दावा : 1 जून 2026 को टीएमसी ने रीतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में निष्कासित कर दिया. रीतब्रत ने इसका ऐसा तगड़ा जवाब दिया, जिसकी उम्मीद ममता बनर्जी को भी नहीं थी. उन्होंने महज 3 दिनों के भीतर टीएमसी के 80 में से 58 असंतुष्ट विधायकों के हस्ताक्षर जुटाये और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के समक्ष ‘असली टीएमसी विधायक दल’ का दावा ठोंक दिया.
- बन गये लीडर ऑफ ऑपोजीशन : संख्या बल के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने रीतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता की मान्यता देते हुए उनके हाथ में ‘नेता प्रतिपक्ष’ के चैंबर की चाबी सौंप दी. रीतब्रत का सबसे बड़ा दांव यह है कि वे खुद को आज भी ममता बनर्जी का सिपाही बताते हैं, लेकिन वे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं.
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Who is Kakoli Ghosh Dastidar: बुआ-भतीजे की जंग और आई-पैक (I-PAC) का सिंडिकेट बना विनाश की वजह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार और रीतब्रत बनर्जी की जुगलबंदी ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे उस सबसे बड़े असंतोष को आवाज दी है, जो पिछले 2 सालों से नबान्न (सचिवालय) और कालीघाट में घुट रहा था. इन दोनों नेताओं का आरोप है कि ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी का पूरा नियंत्रण अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और कॉरपोरेट एजेंसी आई-पैक के हाथों में सौंप दिया था.
ममता बनर्जी के राजनीतिक वजूद को मिटाने के मिशन पर रीतब्रत
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अभिषेक बनर्जी के कहने पर टीएमसी के कई पुराने और जमीनी नेताओं के टिकट काट दिये गये. इसके चलते पार्टी के भीतर ओल्ड गार्ड बनाम न्यू ब्लड (पुराने वफादार बनाम नये चेहरे) की एक ऐसी खूनी जंग छिड़ गयी, जिसका फायदा उठाकर इन दोनों महारथियों ने पूरी पार्टी को ही दोफाड़ कर दिया. अब स्थिति यह है कि काकोली घोष दिल्ली संभाल रही हैं और रीतब्रत कोलकाता की विधानसभा में ममता बनर्जी के राजनीतिक वजूद को समाप्त करने के अंतिम मिशन पर बढ़ रहे हैं.
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