गया-पटना रेलखंड पर बेलागंज थाना क्षेत्र के रीसौद गांव के पास शनिवार देर रात उर्दू शिक्षक मो. खैरुद्दीन (45 वर्ष) का शव बरामद हुआ। पुलिस इसे एक आम रेल हादसा (ट्रेन से गिरकर हुई मौत) मानकर चल रही है। हालांकि, मृतक की पत्नी की ओर से पुलिस को कुछ ऑडियो उपलब्ध कराए गए हैं। मृतक की पत्नी का दावा है कि उनके पति की हत्या की गई है। लेकिन हत्या के पीछे की वजह क्या है, हत्या किसने और क्यों की, इस बारे में मृतक की पत्नी या फिर परिजन कुछ भी बताने में असमर्थ हैं। मृतक की पत्नी की ओर से बेलागंज थाने में तहरीर देकर पूरा मामला बताया गया है। मृतक की पहचान 43 साल के मोहम्मद खैरुद्दीन के रूप में हुई है, जो मानपुर के पठान टोली स्थित प्राथमिक विद्यालय में उर्दू शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। मोहम्मद खैरुद्दीन दारुल उलूम देवबंद और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र रहे थे। मृतक की पत्नी का दावा है कि घर से निकलते वक्त पति ने मुझे गले से भी लगाया था, उर्दू टीचर की संदिग्ध मौत का मामला क्या है? उनकी पत्नी की ओर से क्या आरोप लगाए गए हैं? परिजन उर्दू टीचर की हत्या की आशंका क्यों जता रहे हैं? मृतक की पत्नी की ओर से दिए गए ऑडियो में क्या है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला मृतक खैरुद्दीन बुनियादगंज थाना क्षेत्र के अलीपुर गांव के वार्ड नंबर-47 के रहने वाले थे। मृतक की पत्नी नासरीन खातून ने बताया कि उनके पति मानपुर के पठानटोली उर्दू प्राइम स्कूल में टीचर थे। वे 6 जून यानी शनिवार को दोपहर लगभग 12 बजे घर से निकले थे। उन्होंने कहा था कि अपने दोस्त से मिलने जा रहा हूं। नासरीन ने बताया कि खैरुद्दीन अलीपुर बाजार से ऑटो बैठकर बुनियादगंज थाना से 100 मीटर आगे कुकरा आयुष हॉस्पिटल कुकरा बाईपास के पास उतरे थे, फिर वहां से एक बाइक पर बैठकर चले गए। नासरीन के मुताबिक, ऑटो ड्राइवर ने ये जानकारी दी है। नासरीन ने बताया कि दोपहर में खाना खाने के वक्त मैंने कॉल किया तो पति ने बताया कि मैं गयाजी के बाटा मोड़ पर हूं। फिर शाम को कॉल किया तो पति ने बताया कि मैं मखलौटगंज में पंखे के दुकान पर हूं। आखिरी बार शाम 6 बजे बात हुई, तब उन्होंने कहा था कि रात को खाना खाने के वक्त तक आ जाऊंगा। फिर रात 8 बजे मैंने कॉल किया तो उनका मोबाइल स्वीच ऑफ था। अब जानिए आखिर खैरुद्दीन की पत्नी ने क्यों किया हत्या का दावा खैरुद्दीन की पत्नी का दावा है कि जब-जब मैंने पति से बात की, उनकी कॉल रिकार्डिंग मेरे पास मौजूद है। आखिरी बार जब उनसे बात हुई तो उनकी आवाज में घबराहट थी और पीछे से फोन पटकने की आवाज आई। मोबाइल बंद आने के बाद घबराकर मैंने पति के टीचर साथियों से बात की तो सभी ने उनके संबंध में किसी तरह की जानकारी से इनकार किया। नासरीन ने दी गई तहरीर में बताया है कि रात करीब 1 बजे सोशल मीडिया के जरिए हम लोगों को पता चला कि पति की रेलवे लाइन के किनारे लाश मिली है। मुझे पूरी आशंका है कि मेरे पति को पहले अज्ञात लोगों ने अगवा किया, उनकी हत्या कर दी और दुर्घटना का रूप देने के लिए उनकी लाश को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया। ‘अपना मोबाइल घर में छोड़ा, पत्नी का साथ लेकर गए थे’ मृतक खैरुद्दीन के भाई इरशाद आलम का कहना है कि शनिवार को दोपहर घर से निकले थे। वे अपना मोबाइल छोड़ गए थे और अपनी पत्नी का मोबाइल अपने साथ ले गए थे। रात करीब साढ़े नो बजे उनसे अंतिम बात उनकी बेगम की हुई थी। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया था। रात 3 बजे भतीजी ने बताया कि अब्बू के साथ हादसा हो गया। ऊपर छत पर अम्मी के पास चलिए। वहां जाकर देखा तो मोबाइल पर कुछ तस्वीर थी, जिसे देख कर होश उड़ गए। इरशाद ने बताया कि पुलिस ने आसपास के इलाके से सम्पर्क कर घर तक मैसेज दिया था। इस बीच 3 बज गए थे। पुलिस से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस वजह से हमलोग सुबह सीधा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके बाद 11 बजे रेलवे ट्रैक हादसा वाली जगह पहुंचे। इरशाद से जब यह पूछा गया कि बेलागंज पुलिस को रात की घटना के बारे में कैसे जानकारी मिली तो उन्होंने बताया कि रात में गुजरने वाली ट्रेन के किसी पायलेट सूचना बेलागंज को दी थी। बेलागंज ने फिर चाकन्द पुलिस को दी और फिर चाकन्द व बेलागंज पुलिस छानबीन करते हुए घटना स्थल पहुंची। इरशाद से जब ये जानने की कोशिश की गई कि मास्टर खैरुद्दीन के बदन पर कितने जगह चोटें थी। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम लोग सीधे अस्पताल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। चोट हाथ व सिर के साइड में नजर आ रहा था। इसके अलावा, सिर पर गम्भीर जख्म था। ‘पटरी पर भाई के दिमाग का कुछ टुकड़ा गिरा था, खून बिखरा था’ इरशाद ने बताया कि रविवार सुबह करीब 11 बजे जब बेलागंज पुलिस हमें रीसौद गांव के पास उस रेल पटरी पर ले गई जहां भाई का शव मिला था, तो वहां का मंजर देखकर हमारा दिल दहल गया। पटरी पर भाई का ‘मगज’ (मस्तिष्क का हिस्सा) और खून की बूंदें किसी एक जगह नहीं, बल्कि तीन से चार अलग-अलग जगहों पर बिखरी हुई थीं। पुलिस वाले हमारे साथ थे। उन्होंने भी इसका वीडियो बनाया और हमने भी बनाया। इसके बाद पुलिस ने उन मानव अवशेषों को समेटना तक जरूरी नहीं समझा और उन्हें वहीं लावारिस छोड़ दिया। पैर में बंधे रहस्यमयी गमछे की ‘इनसाइड स्टोरी’ इरशाद ने बताया कि रात में जब भाई के शव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उनके पैर में गमछे बंधे हुए थे। जब हमने इस पर पुलिस से सवाल किया तो उन्होंने हमें बताया कि मुख्य सड़क से रेलवे ट्रैक की दूरी करीब 200-300 मीटर अंदर थी। जहां गाड़ी नहीं जा सकती थी। इसलिए शव को उठाकर टेम्पो तक लाने के लिए उन्होंने गमछा बांधा था। लेकिन जब पुलिस ने हमें मृत भाई की वह ओरिजिनल फोटो दिखाई जो वीडियो वायरल होने से ठीक पहले खींची गई थी। उसमें उनके पैरों में कोई गमछा नहीं था। उस फोटो में भाई बिल्कुल सीधे एक साइड गिरे हुए थे। आखिरी फोन कॉल और ‘बाटा मोड़’ व मखलोट गंज की मिस्ट्री इरशाद के मुताबिक, शनिवार दोपहर भाई खैरुद्दीन को अनजान कॉल आया था। इसके बाद खैरुद्दीन ने पहले बाटा मोड़ स्थित एक मित्र के साथ होने की बात कही। फिर खुद के मख्लोतगंज इलाके में होने की बात कही थी। दोपहर से लेकर रात तक खैरुद्दीन और नासरीन के बीच 4 बार बात हुई है। इरशाद ने बताया कि पत्नी व पति के बीच हुई बातचीत के दौरान खैरुद्दीन कुछ सहज नहीं दिख रहे थे। वे अनमने ढंग से जवाब दे रहे थे। ये बात आडियो में साफ पता चल रहा है। ऐसा क्यों? आखिर वो जहां बैठे थे वहां किस दवाब में थे? यह बड़ा सवाल है। क्योंकि जब घर से वे निकले थे तो अपनी बेगम नासरीन खातून से गले मिलकर निकले थे। ऐसा मृतक के भाई इरशाद का कहना है। अरबी में ऑनर्स करने के बाद सउदी में जॉब की, 2014 में सरकारी टीचर बने अलीपुर के रहने वाले मोहम्मद इनामुल हसन का कहना है कि खैरुद्दीन ने साल 2002 में दारुल उलूम देवबंद से आलिमियत की तालीम पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से अरबी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया। कुछ साल उन्होंने सऊदी अरब में भी काम किया। उन्होंने बताया कि खैरुद्दीन का एक तय रूटीन था। सुबह उठकर बाजार से सब्जी-दूध लाना और स्कूल जाना। छुट्टी के दिन भी वे सिर्फ अपने कुछ खास दोस्तों से मिलने टाउन या बाईपास जाते थे और शाम 7-8 बजे तक घर लौट आते थे। उनका स्कूल या मोहल्ले में कभी किसी से कोई विवाद या रंजिश नहीं रही। मोहम्मद फैजान मलिक का कहना है कि हमारे गांव अलीपुर में पिछले 3 साल में यह तीसरी बड़ी घटना है। पहले 22 साल के एक नौजवान लड़के अबुजर की बेरहमी से हत्या 2024 में कर दी गई, वो भी स्थानीय थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर। फिर 55 साल के हमारे एक बुजुर्ग चाचा का अलीपुर रोड पर एक्सीडेंट हो गया। जहां 100 की स्पीड में गाड़ी आई और उन्हें कुचलकर चली गई। न कैमरे खंगाले गए, न कार्रवाई हुई, सिर्फ आश्वासन दिया गया। अब हमारे गार्जियन मास्टर साहब के साथ यह हादसा हो गया। हम लोग पूरी तरह डर के साए में जी रहे हैं। मोहम्मद अरशद का कहना है कि हमारे यहां लगातार ऐसी वारदातें हो रही हैं और प्रशासन पूरी तरह मौन है। यहां करीब 50 घरों की अल्पसंख्यक आबादी है जो खौफ में जी रही है। हम लोगों ने पिछली घटनाओं में नामजद केस दर्ज कराया। न लेकिन पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। हमें पुलिस से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। डर है कि अगली घटना हमारे साथ न हो जाए। थानाध्यक्ष बोले- तहरीर मिली है, जांच पड़ताल जारी है बेलागंज इंस्पेक्टर सुनील कुमार द्विवेदी ने बताया कि मृतक की पत्नी की ओर से आवेदन आया है। आवेदन के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। मृतका की पत्नी ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस तकनीक व पारंपरिक तरीके से मामले की जांच में जुट गई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा। परिजन का दावा- पुलिस इन 3 प्वाइंट्स पर पड़ताल करे सीडीआर का विश्लेषण: खैरुद्दीन के मोबाइल की पूरी कॉल डिटेल और लोकेशन हिस्ट्री निकाली जाए। ताकि पता चले कि रात 9:50 से 10:30 के बीच वे किसके संपर्क में थे।
बाटा मोड़ व मख्लोटगंज का सीसीटीवी फुटेज: शनिवार दोपहर 2:30 बजे शिक्षक बाटा मोड़ पर थे। वहां के ट्रैफिक और दुकानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि पता चले कि वे किसके साथ थे।
फोरेंसिक जांच: पटरी पर 3-4 अलग जगहों पर मिले दिमाग के अवशेषों और पैर में गमछा बांधने की थ्योरी की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। मृतक मास्टर खैरुद्दीन का घर मानपुर प्रखण्ड के बुनियाद गंज थानाक्षेत्र के अलीपुर गांव में है। गांव से मख्लोटगंज व बाटा मोड़ की दूरी करीब दस किलोमीटर है। वहीं घटना स्थल जहां से शव बरामद किया गया वह अलीपुर गांव से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में अलीपुर के लोगों का कहना है कि इसके पीछे जरूर कोई साजिश है।


