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गिरिडीह शहर के गांधी चौक के पास आईसीआर रोड पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं बड़की मैया और छोटकी मैया को भावुक माहौल में विदाई दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मां को विदा करते समय भक्तों की आंखें नम हो गईं। वहीं, अगले साल फिर से मां के आगमन की उम्मीद भी बनी रही। कई दिनों तक पूजा-अर्चना और उत्सव के बाद विदाई की घड़ी आई, तो श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर मां से सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों के बीच आस्था और भक्ति का माहौल रहा। जय माता दी के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। तस्वीरें देखें… महिलाओं ने निभाई कोइछा और सिंदूर खेला की रस्म प्रतिमाओं की विदाई से पहले महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मां दुर्गा को कोइछा दिया। इसके बाद सिंदूर खेला की रस्म निभाई गई। महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ाया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर परिवार की खुशहाली की कामना की। इस दौरान महिलाओं में खास उत्साह दिखा। धार्मिक परंपराओं के साथ मां को विदाई देने की तैयारियां पूरी की गईं। रस्मों के बाद प्रतिमाओं को विदाई देने का सिलसिला शुरू हुआ। बड़की मैया और छोटकी मैया की विदाई के दौरान श्रद्धालु भावुक नजर आए। भक्तों ने मां के सामने शीश झुकाकर अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना की। कंधों पर प्रतिमाएं लेकर निकले श्रद्धालु वर्षों पुरानी परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अपने कंधों पर उठाया। इसके बाद जय माता दी के जयकारों के साथ नगर भ्रमण कराया गया। इस परंपरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। नगर भ्रमण के बाद प्रतिमाओं को बरवाडीह स्थित मानसरोवर तालाब ले जाया गया। वहां विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। इसी के साथ गिरिडीह में दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हो गया। मां की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं के मन में जहां बिछड़ने का भाव था, वहीं अगले साल फिर से मां के आगमन की उम्मीद भी थी। नम आंखों और जयकारों के बीच भक्तों ने मां दुर्गा से परिवार और समाज पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।
गिरिडीह में बड़की मैया-छोटकी मैया की विदाई:कंधे पर प्रतिमा लेकर नगर भ्रमण, नम आंखों से भक्तों ने कहा- अगले बरस फिर आना

