भागलपुर जिला विधिज्ञ संघ के वर्ष 2026–28 के चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में सोमवार को भागलपुर कचहरी परिसर में विभिन्न पदों के प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के साथ नामांकन पत्र दाखिल किया। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मुक्ति प्रसाद सिंह, उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी भोला कुमार मंडल और संयुक्त सचिव पद के प्रत्याशी जयप्रकाश यादव व्यास ने विधिवत अपना नामांकन दाखिल कर चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी मजबूत की। बड़ी संख्या में अधिवक्ता अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में मौजूद रहे। समर्थकों के साथ निकाले गए जुलूस और नारेबाजी से पूरा परिसर चुनावी रंग में रंगा नजर आया। बताया गया कि नामांकन की प्रक्रिया 25 तारीख तक जारी रहेगी। इसके बाद चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। कचहरी परिसर में चुनाव को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है और विभिन्न पदों के प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। जिला विधिज्ञ संघ का यह चुनाव अधिवक्ता समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे आगामी दो वर्षों के लिए संघ की नई कार्यकारिणी का गठन होगा। प्रत्याशियों का हौसला बढ़ाया सैकड़ों अधिवक्ताओं ने उपस्थित होकर प्रत्याशियों का उत्साहवर्धन किया और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। अधिवक्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने यह संकेत दिया कि इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है। नामांकन के बाद प्रत्याशियों ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उन्हें अधिवक्ता समुदाय का विश्वास और आशीर्वाद प्राप्त होता है तो वे संघ की गरिमा और प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
अधिवक्ताओं की आवाज बनने के उद्देश्य से चुनाव लड़ने का निर्णय उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी भोला कुमार मंडल ने नामांकन के बाद कहा कि मैंने समाज के उन अधिवक्ताओं की आवाज बनने के उद्देश्य से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जो स्वयं को उपेक्षित और वंचित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि जिला विधिज्ञ संघ में उपाध्यक्ष का कार्यकाल 2 साल का होता है और कई अधिवक्ताओं ने उन्हें चुनाव मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया। भोला कुमार मंडल ने कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर कुछ अधिवक्ताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था, जबकि कई ऐसे अधिवक्ता भी थे जिन्हें सम्मान नहीं मिल सका। ऐसे लोगों ने अपनी पीड़ा और भावनाएं उनके समक्ष रखीं। इसी के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि वंचित और उपेक्षित अधिवक्ताओं की आवाज को मंच देने तथा सभी को साथ लेकर चलने के लिए चुनाव लड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हम सबका साथ और सबका विकास की भावना के साथ कार्य करना चाहते हैं।


