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भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद क्षेत्र में सोमवार सुबह पानी भरे गड्ढे में डूबने से छह बच्चों की मौत हो गई। एक बच्ची किसी तरह तैरकर बाहर निकल गई। सभी बच्चे करमा-धरमा पर्व लेकर करमी पौधे का झूर (झुरमुट) उखाड़ने दियारा क्षेत्र में गए थे। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मृतकों में पांच बच्चे नगर परिषद क्षेत्र के बिष्णुटोला के रहने वाले थे। जबकि एक बच्ची ज्योति कुमारी सबौर के रजंदीपुर की रहने वाली थी। जो अपने नाना बिष्णुटोला निवासी कारेलाल मंडल के यहां रह रही थी। घटना वार्ड संख्या 27 के विष्णु टोला से लगे तरैटा नारायणपुर दियारा की है। हादसे के बाद की 3 तस्वीरें… त्योहार की खुशियां मातम में बदली सोमवार सुबह तक विष्णुटोला गांव में करमा-धरमा पर्व की तैयारियां चल रही थी। बच्चों के चेहरों पर खुशी थी और घरों में उत्सव का माहौल था। लेकिन शाम होते-होते गांव में माहौल बदल गया। गलियों में बच्चों की हंसी की जगह अब सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। मोहल्ले से करीब 16 बच्चे सोमवार सुबह एकजुट होकर झूर उखाड़ने निकले थे। घर से ढाई किलोमीटर दूर सभी बच्चे दक्षिणी हिस्से में स्थित चौंकी बहियार पहुंचे थे। चारों ओर बाढ़ का पानी फैला थ। जलमग्न बहियार के बीचों-बीच खोदे गए गहरे गड्ढे की जानकारी किसी बच्चे को नहीं थी। खेतों की आड़ समझकर बच्चे गुजर रहे थे। तभी पानी से लबालब भरे गड्ढे में अचानक एक बच्चे के चले जाने और उसे डूबते देख एक-दूसरे को बचाने में सात बच्चे गहरे पानी में चले गए और सभी डूबने लगे। जबकि पांच अन्य बच्चे खेत की आड़ पर ही रह गए। छह बच्चे गहरे पानी में समा गए, जबकि एक बच्ची मनीषा कुमारी किसी तरह से तैरकर बाहर निकल गई। शव पहुंचते ही मचा कोहराम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही वहां सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिन बच्चों को कुछ घंटे पहले पर्व के लिए घर से भेजा गया था, वे अब मृत होकर लौटेंगे। शवों को देखते ही परिजनों का बुरा हाल हो गया। माता-पिता अपने बच्चों के शवों से लिपटकर रोने लगे। माताओं की चीखें और पिता की आवाजें पूरे इलाके में गूंज रही थीं। अब किसके सहारे जिएंगे- मृतक के पिता एक पिता की पुकार “कहां चली गेलो बेटा… तोरा बिना आबा कैसा रहभै हो…” सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। जिन बच्चों को माता-पिता ने गोद में खिलाया और पर्व के लिए तैयार किया था, उन्हें ही अंतिम बार देखना पड़ा। जिस दिन घरों में पूजा होनी थी, उसी दिन उठी अर्थी इस दर्दनाक हादसे में राहुल कुमार, विकास कुमार, पूजा कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, आयुष कुमार और ज्योति कुमारी की मौत हो गई। एक तरफ छह परिवारों के घरों में मातम पसरा है, दूसरी तरफ पूरे इलाके के लोग इस हादसे से स्तब्ध हैं। जिन घरों में पर्व की तैयारी होनी थी, वहां अब चूल्हे ठंडे हैं। जिन आंगनों में बच्चों की आवाजें गूंजनी थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। मासूमों की अर्थियां जब एक साथ उठी तो विष्णुटोला की गलियां करुण क्रंदन से भर गईं। अंतिम संस्कार सुल्तानगंज के मुक्तिधाम में किया गया। यह सिर्फ हादसा नहीं, छह परिवारों की जिंदगी का अंतहीन दर्द है विष्णुटोला में अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है, आखिर पर्व की खुशियों के बीच इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया? पानी में उतरे बच्चों को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ क्या होने वाला है। करमा-धरमा का पर्व, जो भाई-बहन के स्नेह, परिवार की खुशियों और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है, इस बार विष्णुटोला के लिए ऐसा जख्म छोड़ गया है जिसे भरना शायद आसान नहीं होगा। नेताओं और समाजसेवियों ने जताया गहरा दुख घटना पर भाजपा नेता रविसुमन उर्फ अरुण मंडल ने कहा कि सोमवार का दिन सुल्तानगंज के लिए काला दिन माना जाएगा। पर्व की खुशियां मनाने निकले मासूमों की इस तरह मौत बेहद दुखद और मर्माहत करने वाली है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आपदा प्रावधान के तहत जल्द से जल्द सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की। समाजसेवी जवाहर मंडल ने कहा कि इस दुख की घड़ी में वे पूरी तरह पीड़ित परिवारों के साथ हैं। उन्होंने परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। वहीं, पूर्व उपसभापति प्रतिनिधि मनोज यादव ने भी घटना पर गहरा दुख जताते हुए जिला प्रशासन से पीड़ित परिवारों को शीघ्र आपदा सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की।
'जिसे गोद में उठाया, अब अंतिम बार देख रहा हूं':सुल्तानगंज में पानी में डूबने से 6 बच्चों की मौत, एक साथ उठी अर्थियां; पिता का दर्द- अब कैसे जिएंगे
