झारखंड में एटीएंडसी लॉस 24 प्रतिशत, केंद्रीय विद्युत मंत्री ने जताई चिंता; अर्बन चैलेंज फंड के तहत मिलेंगे 7600 करोड़ रुपये केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को रांची में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि देश में औसत एटीएंडसी (ATC) लॉस करीब 15 प्रतिशत है, जबकि झारखंड में यह 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे कम किए बिना बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने शहरी विकास के लिए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड को 7600 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस), डिस्कॉम के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन, भविष्य की बिजली मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री ने सरकारी विभागों और संस्थानों पर लंबित बिजली बिलों के समयबद्ध निपटारे पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि 31 अगस्त तक सभी सरकारी उपभोक्ताओं और संस्थानों के पारंपरिक बिजली मीटरों को अनिवार्य रूप से प्रीपेड मीटर में बदला जाए। इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी के. श्रीनिवासन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की धीमी प्रगति पर केंद्र ने जताई नाराजगी झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने राज्य में मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए विभिन्न योजनाओं में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मिशन के तहत अपेक्षाकृत कम व्यय (खर्च) होने पर भी चिंता जताई। बैठक में उपयोग किए गए जल के प्रबंधन (वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट), शौचालय एवं मूत्रालय निर्माण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और कचरे से कम्पोस्ट तैयार करने जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में हो रही देरी के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई। जनजातीय क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क विस्तार और रूफटॉप सोलर पर जोर ग्रिड बिजली की समीक्षा: बैठक में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (डीए-जेजीयूए) के तहत जनजातीय परिवारों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। केंद्र सरकार ने लक्ष्य वाले गांवों और घरों में समयबद्ध तरीके से नए विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता देने की बात कही गई। डीवीसी इंफ्रास्ट्रक्चर: बैठक में दामोदर वैली निगम (डीवीसी) के अधीन आने वाले छह जिलों में ट्रांसमिशन और विद्युत अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती मांग के बीच निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। रूफटॉप सोलर से घटेगा बिजली खरीद का बोझ: केंद्रीय मंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ व ‘प्रधानमंत्री कुसुम योजना’ के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने छतों पर बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की सलाह दी, ताकि बिजली खरीद का वित्तीय बोझ कम हो सके।
झारखंड को 7600 करोड़ मिले, 31 अगस्त तक सरकारी मीटरों को प्रीपेड करने का निर्देश मिला
झारखंड में एटीएंडसी लॉस 24 प्रतिशत, केंद्रीय विद्युत मंत्री ने जताई चिंता; अर्बन चैलेंज फंड के तहत मिलेंगे 7600 करोड़ रुपये केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को रांची में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि देश में औसत एटीएंडसी (ATC) लॉस करीब 15 प्रतिशत है, जबकि झारखंड में यह 24 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे कम किए बिना बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने शहरी विकास के लिए ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड को 7600 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस), डिस्कॉम के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन, भविष्य की बिजली मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की तैयारियों की समीक्षा की गई। मंत्री ने सरकारी विभागों और संस्थानों पर लंबित बिजली बिलों के समयबद्ध निपटारे पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि 31 अगस्त तक सभी सरकारी उपभोक्ताओं और संस्थानों के पारंपरिक बिजली मीटरों को अनिवार्य रूप से प्रीपेड मीटर में बदला जाए। इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी के. श्रीनिवासन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की धीमी प्रगति पर केंद्र ने जताई नाराजगी झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने राज्य में मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए विभिन्न योजनाओं में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मिशन के तहत अपेक्षाकृत कम व्यय (खर्च) होने पर भी चिंता जताई। बैठक में उपयोग किए गए जल के प्रबंधन (वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट), शौचालय एवं मूत्रालय निर्माण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) और कचरे से कम्पोस्ट तैयार करने जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में हो रही देरी के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई। जनजातीय क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क विस्तार और रूफटॉप सोलर पर जोर ग्रिड बिजली की समीक्षा: बैठक में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (डीए-जेजीयूए) के तहत जनजातीय परिवारों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। केंद्र सरकार ने लक्ष्य वाले गांवों और घरों में समयबद्ध तरीके से नए विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार को प्राथमिकता देने की बात कही गई। डीवीसी इंफ्रास्ट्रक्चर: बैठक में दामोदर वैली निगम (डीवीसी) के अधीन आने वाले छह जिलों में ट्रांसमिशन और विद्युत अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती मांग के बीच निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। रूफटॉप सोलर से घटेगा बिजली खरीद का बोझ: केंद्रीय मंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ व ‘प्रधानमंत्री कुसुम योजना’ के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने छतों पर बड़े पैमाने पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की सलाह दी, ताकि बिजली खरीद का वित्तीय बोझ कम हो सके।

