Wednesday, April 22, 2026

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धनबाद के टण्डाबाड़ी बस्ती में फिर भू-धंसान, घरों में दरारें:सड़क फटी, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं; कई परिवार घर छोड़ने को मजबूर


धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड अंतर्गत सोनारडीह ओपी क्षेत्र की टण्डाबाड़ी बस्ती में बुधवार को एक बार फिर भू-धंसान हुआ। इस घटना से इलाके में अफरातफरी मच गई और आधा दर्जन से अधिक घरों में दरारें आ गईं। पास के एक मंदिर की दीवारों में भी बड़ी दरारें पड़ गईं। बस्ती से गुजरने वाली मुख्य पीसीसी सड़क लगभग 100 फीट तक फट गई, जिससे आवागमन बाधित हो गया। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, भू-धंसान के कारण जमीन करीब एक फीट तक धंस गई। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन खतरे को देखते हुए लोग सहमे हुए हैं। भू-धंसान की घटनाएं लगातार हो रही कई परिवार एहतियातन अपने घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि टण्डाबाड़ी बस्ती में भू-धंसान की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसके बावजूद न तो बीसीसीएल प्रबंधन और न ही जिला प्रशासन ने कोई ठोस समाधान निकाला है। स्थानीय निवासी सुनील, दीपक और धीरज पांडेय ने जानकारी दी कि 31 मार्च को भी इसी इलाके में बड़ी भू-धंसान की घटना हुई थी, जिसमें कई घर जमींदोज हो गए थे और एक नाबालिग समेत दो लोगों की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन ने विस्थापन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए। नतीजतन, लोग आज भी जान जोखिम में डालकर उसी क्षेत्र में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि टण्डाबाड़ी बस्ती के सभी प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए और उन्हें रहने, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही लगातार हो रहे भू-धंसान की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है, जबकि बस्ती के लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को विवश हैं।

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