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नालंदा में 2 मई को ‘प्रवेशोत्सव’:आंगनबाड़ी के 16 हजार से ज्यादा का होगा नामांकन, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका बच्चों को लेकर आएंगी


नालंदा में 2 मई को प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में ‘प्रवेशोत्सव’ होगा। विशेष अभियान का मुख्य केंद्र बिंदू आंगनबाड़ी केंद्रों से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर चुके 16 हजार 440 बच्चे होंगे, जिन्हें अब औपचारिक स्कूली शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाना है। शिक्षा विभाग ने इस दिन को महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर इसे एक उत्सव का रूप देने का निर्णय लिया है, ताकि ग्रामीण और वंचित तबके के बच्चों के मन में स्कूल के प्रति आकर्षण और प्रेम पैदा हो सके। जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि स्कूलों में उत्सवी माहौल बनाए रखना अनिवार्य है। प्रवेशोत्सव की सफलता की कमान आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के हाथों में सौंपी गई है, जो स्वयं अपने केंद्रों से पासआउट हुए नौनिहालों को लेकर नजदीकी विद्यालयों में पहुंचेंगी और उनका नामांकन कराएंगी। विभाग की रणनीति यह है कि समन्वय की इस कड़ी में कोई भी बच्चा छूटने न पाए। खासकर उन दलित और वंचित परिवारों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो जागरूकता की कमी के कारण आंगनबाड़ी के बाद अपने बच्चों का दाखिला स्कूलों में नहीं करवा पाते थे।
चॉकलेट से बच्चों का मुंह मीठा कराया जाएगा रंग-बिरंगे गुब्बारों, आकर्षक रंगोली और स्वागत गीतों के बीच जब नए छात्र परिसर में कदम रखेंगे, तो उन्हें चॉकलेट देकर उनका मुंह मीठा कराया जाएगा। इस पहल के पीछे का तर्क यह है कि बच्चों को स्कूल का माहौल घर जैसा सहज और सुखद लगे। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि वे अभिभावकों और शिक्षकों के बीच एक सेतु का काम कर सकें और शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाएं।
पेपर पूरे नहीं होंगे फिर भी नामांकन होगा प्रवेशोत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नामांकन की प्रक्रिया को बेहद लचीला बनाया गया है। समग्र शिक्षा अभियान के डीपीओ मो. शहनवाज ने साफ तौर पर कहा है कि दस्तावेजों की कमी किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बनेगी। यदि किसी छात्र के पास तात्कालिक रूप से जरूरी कागजात नहीं हैं, तब भी उसका नामांकन किया जाएगा और कागजी औपचारिकताएं बाद में पूरी की जा सकेंगी। इसके साथ ही, नामांकन के तुरंत बाद छात्रों को पाठ्य पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि उनकी पढ़ाई का सिलसिला बिना किसी विलंब के शुरू हो सके।
हर प्रखंड के 5 स्कूलों को आदर्श नामांकन केंद्र बनाया प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए हर प्रखंड के 5-5 स्कूलों को ‘आदर्श नामांकन केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। बिहारशरीफ में एक जिला स्तरीय आदर्श केंद्र भी स्थापित होगा, जहां जिले के आला अधिकारी स्वयं उपस्थित रहकर लोगों को जागरूक करेंगे। सत्र 2026-27 के लिए आयोजित इस अभियान का लक्ष्य 6 से 14 साल तक के हर उस बच्चे को स्कूल पहुंचाना है जो अब तक शिक्षा की चौखट से दूर हैं। शिक्षकों को विशेष हिदायत दी गई है कि वे केवल नामांकन तक सीमित न रहें, बल्कि शुरुआती दिनों में इन बच्चों को विशेष सहयोग दें ताकि वे स्कूल के वातावरण में पूरी तरह ढल सकें और भविष्य में ‘ड्रॉपआउट’ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाई जा सके।

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