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पटना में दुर्गापूजा में इस बार 1500 पंडाल बन रहे हैं। हर पंडाल की थीम अलग रहेगी। श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए कलाकारों ने भव्य तैयारी की है। बोरिंग कैनाल रोड में शिवलिंग के आकार का पंडाल बनाया जा रहा है। पंडाल को 20 हजार घंटियों से सजाया गया है। मीठापुर में पंडाल पूरी तरह से वातानुकूलित रहेगा। वहीं, एतवारपुर में पटना का सबसे लंबा 121 फीट ऊंचा पंडाल है। जिसे बनाने में 85 लाख लगे हैं, जो पटना में सबसे महंगा पंडाल है। खाजपुरा में पंडालनुमा पर्वत को रावण हाथ से उठाते नजर आएंगे। पटना के प्रमुख पंडाल, उनकी क्या है विशेषताएं, क्या रहेगा आकर्षण का केंद्र, पढ़ें रिपोर्ट… 1. एतवारपुर जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना है पंडाल एतवारपुर का पूजा पंडाल पिछले 3 साल से पटना में टॉप पर रहा है। इस बार यहां जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार हुआ है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई में ज्यादा फर्क नहीं है। ऊंचाई 121 फीट है तो चौड़ाई 120 फीट। इसे 80 कारीगरों ने मिलकर बनाया है। एतवारपुर के पंडाल की खासियत इस बार पंडाल में 3डी मैपिंग शो भी होगा, यह बिहार में पहली बार है। लाइटिंग और मैपिंग तकनीक के माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के साथ भगवान जगन्नाथ, पुरी मंदिर और रथयात्रा समेत कई धार्मिक दृश्य दिखाए जाएंगे। 3डी मैपिंग शो के लिए मुंबई से टीम बुलाने की तैयारी है। विजयादशमी के दिन विसर्जन जुलूस में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा भी निकाली जाएगी। पंडाल के आसपास करीब 2 किलोमीटर तक लाइटिंग है, जो जगन्नाथ मंदिर पर ही आधारित है। कोलकाता के चंदन नगर से लाइटिंग के लिए टीम आई है। सुरक्षा को लेकर पंडाल समिति से 200 वालंटियर रहेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से भी जवान तैनात किए जाएंगे। 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरा और ड्रोन से निगरानी की जाएगी। 2. डाकबंगला खजुराहो मंदिर की थीम पर पंडाल बना डाकबंगला चौराहे पर इस बार खजुराहो मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार हो रहा है। इसकी ऊंचाई करीब 80 फीट और चौड़ाई 55 फीट होगी। पूजा समिति के अध्यक्ष संजीव प्रसाद टोनी के अनुसार पंडाल का निर्माण पश्चिम बंगाल के कांथी के डेकोरेटर कर रहे हैं। इसकी डिजाइन कोलकाता आर्ट कॉलेज के कलाकार रितेश चटर्जी ने तैयार की है। डाकबंगला से कोतवाली थाना तक करीब 57 फीट ऊंचे और 35 फीट चौड़े 4 तोरणद्वार बने हैं। समिति के अनुसार पिछले साल पूजा पर करीब 25 लाख रुपए खर्च हुए थे और इस साल भी बजट लगभग इतना ही है। प्रतिमा का निर्माण कोलकाता के कलाकार जगन्नाथ पाल कर रहे हैं, जो पिछले 31 साल से यहां मां दुर्गा की प्रतिमा बनाते आ रहे हैं। हुगली नदी के जल और मिट्टी से बनी मां की प्रतिमा पंडाल को प्राचीन मंदिर जैसा स्वरूप देने के लिए जूट की बोरियां, फाइबर की मूर्तियां, रंगीन पत्थर और रेशमी धागे का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से मंगाए गए हुगला पत्तों का भी इस्तेमाल सजावट में किया जा रहा है। प्रतिमा निर्माण के लिए बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश और कोलकाता की हुगली नदी से जल और मिट्टी मंगाई गई है। कलश से जल का प्रवाह करते भगवान श्रीगणेश दिखेंगे डाकबंगला चौराहे की लाइटिंग इस बार भी शहर में आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी। मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश की रोशनी वाली आकृति सजेगी, जिसमें वे कलश से जल प्रवाह करते नजर आएंगे। भगवान शिव के त्रिशूल, डमरू और नंदी की आकृति वाला वर्टिकल पैनल श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। चक्र और दिव्य रथ पर सवार देव प्रतिमाओं की पैनल लाइटिंग के साथ मंदिर और राजमहल शैली के कई गेट तैयार किए जा रहे हैं। 3. बोरिंग कैनाल रोड 100 फीट ऊंचा शिवलिंगनुमा पंडाल बना है बोरिंग कैनाल रोड स्थित हिमगिरी चौराहा के पास इस बार करीब 100 फीट ऊंचा और 150 मीटर लंबा शिवलिंगनुमा पंडाल तैयार हुआ है। इसे करीब 20 हजार घंटियों से सजाया जा रहा है। पंडाल में 16 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होगी। करीब 450 फीट लंबे रास्ते को भी आकर्षक लाइटिंग से सजाया जा रहा है। पंडाल निर्माण और विशेष लाइटिंग के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं। समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार के अनुसार इस बार पूजा समिति अपना 45वां स्थापना दिवस मना रही है। पिछले साल पंडाल को छातों से सजाया गया था, जबकि इस बार घंटियों से भव्य सजावट की जा रही है। मोबाइल की लत के खिलाफ मां दुर्गा देंगी संदेश पंडाल में बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत को लेकर सामाजिक संदेश भी दिया जाएगा। इसमें महिषासुर को मोबाइल की लत के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा, जबकि मां दुर्गा इस बुराई पर विजय का प्रतीक होंगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन करीब 10 हजार लोगों का भंडारा आयोजित करने की तैयारी है। 4. पुनाईचक यूरोप के रॉयल पैलेस के मॉडल पर पंडाल पुनाईचक में यूरोप के रॉयल पैलेस की तर्ज पर पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। इसकी ऊंचाई 120 फीट और चौड़ाई 50 फीट है। बंगाल से आए 22 कारीगरों ने मिलकर बनाया है। तीन दिन तक डीजे का सेटअप लगाया जाएगा। अष्टमी को माता का जागरण होगा। करीब 2 किलोमीटर तक लाइटिंग की व्यवस्था है। सप्तमी को हलवा, अष्टमी को खीर, नवमी को खिचड़ी और दसवीं को पूड़ी-चना का प्रसाद दिया जाएगा। माता के प्रतिमा के साथ 22 शेरों के चेहरे बनेंगे पूजा समिति के अध्यक्ष आकाश कुमार ने बताया कि मां की मूर्ति के पीछे एक बहुत बड़ी पेंटिंग बनाई गई है, जिसमें युद्ध को दिखाया गया है। माता का सारा साज-श्रृंगार बंगाल से बनकर आया है। 5. खाजपुरा रावण का वध करते दिखेंगे भगवान राम और हनुमान बेली रोड स्थित खाजपुरा शिव मंदिर के पास इस बार कैलाश पर्वत की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया गया है। पंडाल की ऊंचाई और चौड़ाई दोनों 55 फिट रहेगी। पंडालनुमा पर्वत को रावण हाथ से उठाते नजर आएंगे, जिसका वध एक तरफ से भगवान राम और दूसरे तरफ से हनुमान जी करते दिखेंगे। पंडाल के बाहर कैलाश पर्वत पर भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित होगी। उनकी जटाओं से पानी निकलता नजर आएगा। अंदर पर्वत श्रृंखला के बीच मां दुर्गा का स्वरूप दिखाई देगा, जहां वह राक्षसों का संहार करती नजर आएंगी। इस बार का बजट 16 लाख रखा गया है। लाइट को 24 फीट की हाइट पर लगाया जाएगा जगदेव पथ से सांस्कृतिक विद्यापीठ तक सड़क के दोनों किनारों को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा। लाइट को 24 फीट की हाइट पर लगाया जाएगा। पूजा समिति के अनुसार खाजपुरा शिव मंदिर के पास साल 1930 से दुर्गापूजा का आयोजन होता आ रहा है। सप्तमी से नवमी तक श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित होगा। सप्तमी को खिचड़ी, अष्टमी को हलवा और नवमी को खीर का प्रसाद दिया जाएगा। 6. मीठापुर मीठापुर में बनेगा दक्षिणेश्वरी काली मंदिर जैसा पंडाल मीठापुर नहर स्थित डॉ. अनीता सिंह अस्पताल के पास इस बार दक्षिणेश्वरी काली मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया जा रहा है। करीब 60 फीट ऊंचे और 25 फीट चौड़े इस पंडाल को तैयार करने में बंगाल के 20 से अधिक कारीगर एक महीने से जुटे हैं। पंडाल पूरी तरह वातानुकूलित है। यहां करीब 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा का निर्माण तिमकड़ी पाल और उनके बेटे अभिजीत पाल की टीम कर रही है। श्रद्धालुओं के लिए सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे पंडाल के करीब 500 मीटर के दायरे में रंग-बिरंगी एलईडी लाइटिंग की जाएगी। आसपास के घरों को भी सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए सेल्फी प्वाइंट बनाए जाएंगे और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मीठापुर नहर इलाके में 1981 से मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। प्रतिमा का चेहरा और भाव-भंगिमा पाल शैली में तैयार की जाती है, जबकि गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाओं में मौर्य शैली का प्रयोग किया जाता है। 7. मीठापुर कन्नू लाल रोड राजस्थान के सालासर बालाजी मंदिर की झलक दिखेगी मीठापुर के कन्नू लाल रोड चौराहा स्थित प्राचीन देवी अस्थान में इस बार श्रद्धालुओं को राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर बालाजी मंदिर की झलक देखने को मिलेगी। पूजा समिति की ओर से इसी थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। पंडाल की लंबाई करीब 80 फीट और चौड़ाई 50 फीट होगी। मंदिर की वास्तुकला और धार्मिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए पंडाल को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और निकास को सुविधाजनक बनाने के साथ आसपास के क्षेत्र में भी सजावट की तैयारी की जा रही है। पंडाल तक पहुंचने वाले मार्ग पर 6 तोरण द्वार बनाए जाएंगे पंडाल तक पहुंचने वाले मार्ग पर 6 तोरण द्वार बनाए जाएंगे। इन तोरण द्वारों को आकर्षक सजावटी लाइटों से सजाया जाएगा, जिससे रात के समय पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगाता नजर आएगा। आयोजन को भव्य रूप देने के लिए करीब 2 किलोमीटर के दायरे में विशेष लाइटिंग की जाएगी। पूजा समिति के अनुसार पंडाल निर्माण, सजावट और लाइटिंग समेत पूरे आयोजन पर करीब 18 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। 8. संपतचक महाकालेश्वर मंदिर का दिखेगा स्वरूप संपतचक में इस बार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया जा रहा है। करीब 108 फीट चौड़ा और 108 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया जा रहा है। इसमें 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होगी। पंडाल में महाकालेश्वर के बाबा का शिवलिंग और नंदी महाराज की प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र होगी। संपतचक में करीब 57 साल से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। इस बार बाजार और आसपास करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में विशेष लाइटिंग की जाएगी। पूजा समिति के अनुसार इस साल आयोजन का अनुमानित बजट 40 से 45 लाख रुपए है। विसर्जन में हाथी-घोड़े और ऊंट के साथ निकलेगा जुलूस संपतचक में विजयादशमी के बाद भव्य विसर्जन जुलूस निकाला जाएगा। इसमें हाथी, घोड़े, ऊंट और झारखंड से बुलाए गए बैंड शामिल होंगे। जुलूस संपतचक बाजार से अब्दुल्लाहचक होते हुए बैरिया पहुंचेगा और इसके बाद सोहगी, फतेहपुर, गौरीचक होते हुए पुनपुन नदी तक जाएगा। पूजा के दौरान मगही और भोजपुरी कलाकारों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। समिति के अनुसार आसपास के करीब 50 गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। 9. हनुमान नगर पंडाल के शिखर पर 22 फीट ऊंची शिव प्रतिमा कंकड़बाग मलाही पकड़ी चौक से आगे हनुमान नगर स्थित आवास बोर्ड चौराहे पर कैलाश पर्वत जैसा दृश्य तैयार किया जा रहा है। इंडियन सोसाइटी क्लब की ओर से महाभव्य दुर्गा मंदिर के पास 85 फीट ऊंची पर्वत रूपी गुफा बनाई जा रही है। इसके शिखर पर 22 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पंडाल को आकर्षक बनाने के लिए बेंगा लाइट, रनिंग लाइट, डिस्को लाइट और फॉक्स लाइट का इस्तेमाल होगा। रात में पंडाल नौ अलग-अलग रंगों में रोशन दिखाई देगा। महाभव्य दुर्गा मंदिर से मलाही पकड़ी चौक तक करीब 800 मीटर क्षेत्र में सजावटी रोशनी लगाई जा रही है। रंगीन लाइटों से तोरणद्वार भी बनाए जा रहे हैं। पटना आर्ट कॉलेज के छात्र-कलाकार एक महीने से लगे हैं पटना आर्ट कॉलेज के छात्र-कलाकार भी करीब एक महीने से पर्वत और गुफा को वास्तविक रूप देने में जुटे हैं। प्राकृतिक चट्टानों और गुफाओं का अहसास कराने के लिए विशेष सामग्री और कलाकृतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 10. कदमकुआं मदुरई के महालक्ष्मी मंदिर की प्रतिकृति दिखेगी कदमकुआं स्थित डोमन भगत लेन में इस बार मदुरई के महालक्ष्मी मंदिर की प्रतिकृति तैयार की जा रही है। करीब 50 साल पुरानी श्री श्री नवयुवक दुर्गापूजा समिति की ओर से इस बार भी भारत माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। पंडाल की ऊंचाई करीब 65 फीट और चौड़ाई 40 फीट होगी। निर्माण में बंगाल, झारखंड और बिहार के कलाकार जुटे हैं। पंडाल से करीब 200 मीटर तक विशेष लाइटिंग होगी पंडाल से करीब 200 मीटर पहले से ही विशेष लाइटिंग शुरू हो जाएगी। इस साल आयोजन का बजट करीब 40 लाख रुपए रखा गया है। प्रतिमा का निर्माण पटना के बिट्टू पंडित कर रहे हैं। उनके परिवार की करीब 45 साल से लगातार यहां प्रतिमा निर्माण में भूमिका रही है। अष्टमी, नवमी और शांति पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए भोग-प्रसाद की व्यवस्था होगी। समिति के अनुसार पहले दिन हलवा-पूरी, दूसरे दिन खीर-पूरी और पूर्णिमा के अवसर पर भंडारा प्रसाद वितरित किया जाएगा। षष्ठी से नवमी तक दूधिया रोशनी से जगमगाएगा इलाका दुर्गा पूजा के दौरान षष्ठी से नवमी तक पाटलिपुत्र स्टेशन फ्लाईओवर से रूपसपुर थाने के बीच का पूरा इलाका दूधिया और बहुरंगी एलईडी रोशनी से जगमगाएगा। सड़क के डिवाइडर पर ट्यूबलाइट, रंगीन बल्ब और रोलेक्स लाइटें लगाई जा रही हैं। रोशनी की सजावट से पूरे क्षेत्र में उत्सवी माहौल बनेगा। सप्तमी से नवमी तक तीन दिन बंटेगा प्रसाद श्रद्धालुओं के लिए सप्तमी, अष्टमी और नवमी को विशेष भोग की व्यवस्था की गई है। सप्तमी को मां दुर्गा को शुद्ध घी से बने हलवे का भोग लगाया जाएगा। अष्टमी पर पारंपरिक खीर का विशेष भोग अर्पित होगा, जबकि नवमी को खिचड़ी का महाभोग लगाया जाएगा। तीनों दिन शाम 7 बजे से रात 2 बजे तक श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा।
पटना- एतवारपुर में सबसे महंगा दुर्गा पूजा पंडाल:बोरिंग रोड में 20 हजार घंटियों से सजावट, खाजपुरा में रावण पर्वत उठाते दिखेंगे; देखिए टॉप-10 पंडाल
