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केंद्रीय मंत्री और BJP के सीनियर नेता गिरिराज सिंह ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों, उपचुनाव परिणामों और संसद में जारी हंगामे को लेकर विपक्षी दलों और जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर (PK) पर जोरदार तंज है। गिरिराज सिंह ने स्पष्ट कहा कि जनता का जनादेश सिर-आंखों पर है। लेकिन चुनाव के रुझानों या उपचुनावों के नतीजों पर विपक्ष जिस तरह खुशियां मना रहा है, वह समझ से परे है। संसद में विपक्ष के व्यवहार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि देश में कभी एक पप्पू हुआ करता था। लेकिन अब कई पप्पू आ गए हैं और सदन को नाटक मंडली बना दिया गया है। वीर बांका बनने वाले बताएं, 138 सीटों पर क्या हश्र हुआ प्रशांत किशोर के राजनीतिक दावों पर सवाल उठाते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि बड़ी-बड़ी बातें करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। प्रशांत किशोर बड़ी-बड़ी बातें बोल रहे हैं, जैसे पूरा राज्य उलटकर रख देंगे। खुद को वीर बांका समझ रहे हैं। मैं उनसे पूछता हूं कि 243 में से 138-140 सीटों पर जो स्थिति बनी, उसमें उनका क्या हाल रहा। उसमें क्या वे एक भी सीट जीत पाए। परिस्थितिजन्य जनादेश पर इतना इतराने की जरूरत नहीं है। आरजेडी और कांग्रेस सोच रही है कि वे किसी नए प्रयोग के जरिए सत्ता में वापसी कर लेंगे, लेकिन बिहार की जनता सब समझती है। विपक्ष के अति-उत्साह का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री ने 2009 के बिहार उपचुनाव का उदाहरण दिया। ‘2009 में 17 में से 12 सीट पर उपचुनाव हारा था एनडीए, 2010 में हमें 202 सीटें मिली’ गिरिराज सिंह ने कहा कि 2009 में जब हम नीतीश कुमार के साथ सरकार में थे, तब बिहार की 17 सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उस समय एनडीए 12 सीटें हार गया था। तब भी आरजेडी, कांग्रेस और विरोधी दल ऐसे ही उछल रहे थे। लेकिन 2010 के विधानसभा चुनाव में जनता ने एनडीए को 89 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 202 सीटें देकर फिर से प्रचंड बहुमत दिया। गिरिराज सिंह ने कहा कि जनता फिर से लुटेरों को सत्ता नहीं सौंपेगी। 60 साल के कांग्रेस शासन की तुलना में आज बिहार की सड़कों, बिजली और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। गोरखपुर हारे तब भी स्वीकार किया, लेकिन तेजस्वी-अखिलेश को बिहार स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी हमेशा जनादेश का सम्मान करती है। हमसे कुछ गलतियां रही होंगी, जनता ने सजा दी तो हमने उसे हाथ जोड़कर स्वीकार किया। गोरखपुर में योगी जी के क्षेत्र में जब हम उपचुनाव हारे थे, तब भी हमने सिर झुकाकर जनादेश स्वीकारा था। लेकिन अगर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव या कांग्रेस यह सोचती है कि बिहार की जनता उन्हें कबूल कर लेगी, तो यह उनका भ्रम है। सनातन का अपमान बंद कर अटल-लोहिया से चरित्र सीखें संसद के भीतर और बाहर विपक्षी सांसदों के रवैये पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1952 से देश की संसद में एक से बढ़कर एक दिग्गज विपक्षी नेता रहे हैं। लेकिन आज सोची-समझी रणनीति के तहत सनातन हिंदू धर्म को अपमानित करने और नौटंकी करने का काम हो रहा है। एक पप्पू रहे तो कहूं, अब तो कई पप्पू आ गए हैं। पप्पू पैसा डाल रहे हैं और सदन के भीतर-बाहर सिर्फ नौटंकी हो रही है। यह नाटक मंडली तुरंत बंद होनी चाहिए और देश के काम पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को संसदीय मर्यादा और चरित्र सीखना है, तो उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मधु लिमये और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे महान नेताओं के आचरण से सीखना चाहिए।

