पलामू से शिवेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के चर्चित रामपुर गोलीकांड के मुख्य आरोपी मंटू सिंह के साथ पुलिस रिमांड में बेरहमी से पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है. आरोपी के परिजनों ने दावा किया है कि पुलिस रिमांड के दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उसके शरीर के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं. परिजनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. इस मामले में पुलिस और परिजनों के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है. जहां परिजन पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है.
नौ जून को किया था आत्मसमर्पण
परिजनों के अनुसार, मंटू सिंह ने नौ जून को अदालत में आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद चैनपुर थाना पुलिस ने 22 जून को उसे 24 घंटे के लिए रिमांड पर लिया. आरोप है कि पूछताछ के दौरान रात में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई. इतना ही नहीं, उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया. परिजनों का कहना है कि मारपीट के कारण कमर के नीचे का पिछला हिस्सा पूरी तरह सूज गया है. संबंधित हिस्से पर लाल और काले रंग के निशान भी दिखाई दे रहे हैं.
मेडिकल रिपोर्ट में चोट की पुष्टि का दावा
मंटू सिंह के परिवार का दावा है कि मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) की जांच रिपोर्ट में भी शरीर के पिछले हिस्से में चोट लगने की पुष्टि हुई है. परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने इलाज के लिए दवाएं भी लिखी हैं, जिनमें साइक्लोपारा टैबलेट शामिल है. उन्होंने कहा कि न्यायिक हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति की नियमानुसार मेडिकल जांच कराई जाती है और इसी प्रक्रिया के दौरान चोट के निशान सामने आए हैं.
मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट जाने की तैयारी
मंटू सिंह के परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और झारखंड हाईकोर्ट तक ले जाएंगे. परिजनों ने इसे कथित कस्टोडियल टॉर्चर का मामला बताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार कानून और मानवाधिकार दोनों के खिलाफ है.
डीएसपी ने आरोपों को बताया झूठा
इस मामले में सदर डीएसपी राजेश यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह झूठे हैं और मामले को कमजोर करने के उद्देश्य से इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं. डीएसपी ने कहा कि इस मामले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है और तथ्यों के विपरीत बातें फैलायी जा रही हैं.
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जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
रामपुर गोलीकांड के आरोपी के साथ कथित मारपीट के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. एक तरफ परिजन मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर पुलिस अधिकारी इन दावों को खारिज कर रहे हैं. ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चोटें किन परिस्थितियों में लगीं और आरोपों में कितनी सच्चाई है. फिलहाल यह मामला पलामू में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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